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कला-संस्कृति

हिंदी और उसका सत्ता विमर्श

“हिंदी के नाम पर एक पूरा उद्योग स्थापित हो गया है जिस पर करदाता का अरबों रुपया खर्च किया जाता है, फिर...

किताब पर प्रतिबंध के लिए दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- लेखक के कौशल का होना चाहिए सम्मान

सुप्रीम कोर्ट ने उस पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने के लिए दायर याचिका बुधवार को खारिज कर दी, जिसमें एक हिन्दू...

संपूर्ण सिनेमा की तलाश

प्रताप सिंह साहित्य की कई विधाओं में अपनी सजग-उपस्थिति और संपन्न दृष्टि से चौंकाने वाले वरिष्ठ...

हरिशंकर परसाई, जिन्होंने व्यंग्य को समाज के व्यापक प्रश्नों से जोड़ा

हरिशंकर परसाई 22 अगस्त 1922 को मध्यप्रदेश के होशंगाबाद के जमानी गांव में पैदा हुए। ‌शिक्षा के दौरान ही...

इस्मत चुगताई को अपनी कहानी की वजह से झेलना पड़ा मुकदमा, इस लेखिका पर बना गूगल का डूडल

उर्दू की प्रसिद्ध साहित्यकार, पद्मश्री से सम्मानित इस्मत चुगताई की आज 103वीं जयंती है और इस अवसर पर गूगल...

कलम के मोहपाश में बांध लेने वाली विद्रोही लेखिका इस्मत चुगताई

अपनी कलम के मोहपाश में बांध लेने वाली विद्रोही लेखिका इस्मत चुगताई की आज 107वीं जयंती है। हालांकि उनके...

'मेरी कविता जंग का ऐलान है, पराजय की प्रस्तावना नहीं'

ठन गई, मौत से ठन गई, जूझने का मेरा इरादा न था, मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था, मैं जी भर जिया, मैं मन से...

कामयाबी की उड़ान

अमेरिकी एक्जीक्यूटिव कोच मार्शल गोल्डस्मिथ जिन्हें अस्सी से ज्यादा सीईओ को प्रशिक्षित करने का श्रेय...

कार्टून की दुनिया

राजेंद्र धोड़पकर जब हम लोग कार्टून की दुनिया में कदम रख रहे थे, तब तक राजिंदर पुरी नियमित कार्टून बनाना...

द इंडियन स्टोरी ऑफ ऐन ऑथर: प्रतिरोध का मौन हथियार

जब कहने को बहुत कुछ हो तो मौन सबसे बड़ा हथियार है। कई बार इसका असर हजारों शब्दों से ज्यादा होता है। यही...

नये शेखर की जीवनी: इस किताब के वाक्य 'वन-लाइनर्स' की तरह इस्तेमाल होंगे

वाणी प्रकाशन से नयी किताब आयी है- नये शेखर की जीवनी। लेखक हैं अविनाश मिश्र। अज्ञेय की लिखी 'शेखर-एक...

‘सेवा सदन’ सौ वर्ष बाद भी प्रासंगिक

प्रेमचंद की सभी रचनाएं सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत हैं। सेवा सदन उनका ऐसा ही उपन्यास है, जो इस साल सौ...

महिलाओं के माथे की ‘बिंदिया’ बना ‘टिकुली आर्ट’

उमेश कुमार राय पटना के दानापुर निजामत के नासरीगंज गांव में रहनेवाली संध्या सिंह गृहिणी हैं। एक वक्त...

...मानो आजादी का संदेश्‍ा लेकर जन्‍मा थ्‍ाा ये ‘महाबली’ लेख्‍ाक

दिल्ली का साहित्य जगत, फिर दिल्ली का ही क्यों पूरे देश के लेखक, साहित्य प्रेमी और संस्‍थाएं तीन साल बाद...