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कला-संस्कृति

स्मृति: आप कैसे चुप हो सकती हैं

“कमला भसीन बहुत जिंदादिल थीं इसलिए बहुत मजबूत थीं” नहीं कहा था कमलाजी! हमने ऐसा तो कहा ही नहीं था कि...

पुस्तक समीक्षाः कुव्यवस्था पर प्रहार करती ‘लीला’

'लीला' अजय मनचंदा प्रकाशक मून लाईट बुक्स, दिल्ली कीमतः 200 रुपए  दिल्ली रंगमंच के स्थापित और प्रतिष्ठित...

सावरकर की प्रासंगिकता

रविदत्त  बाजपेयी इस पुस्तक के केंद्र बिंदु विनायक दामोदर सावरकर और उसके लेखक विक्रम सम्पत दोनों ही...

शहरनामा/ तिरुवनंतपुरम: हरा भरा, समुद्र की लहरों सा जीवंत शहर

“हरा भरा, समुद्र की लहरों सा जीवंत शहर” एवरग्रीन सिटी ऑफ इंडिया शहर के रग में हम है भी कि नहीं, शहर...

दिनकर ओजस्वी, आक्रोशी, विद्रोही, वीर रस के श्रेष्ठ, क्रांतिकारी 'राष्ट्रकवि'

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिन्दी साहित्य में छायावादोत्तर काल के प्रमुख कवि, साहित्यकार थे जो...

शरतचंद्र की नायिकाएं - सशक्त, स्नेहिल, सबल, स्त्री शक्ति का प्रतिनिधित्व करतीं, पर नायकों पर हावी...

अप्रतिम, विरले उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की कहानियों में उनकी नायिकाएं संवेदनशील, करुणामय पर...

शहरनामा | बक्सर: गंगा के तट पर बसा अलसाया, शांत शहर

“गंगा के तट पर बसा अलसाया, शांत शहर” ऋषियों का आश्रम बक्सर! पश्चिमी बिहार में गंगा के तट पर बसा...

KLF मैथिली लिटरेरी फेस्टिवल का आयोजन हुआ संपन्न, वर्चुअल लगा देश-दुनिया के दिग्गज साहित्यकारों का मेला

कलिंग लिटरेरी फेस्टिवल की अगुवाई में आयोजित मैथिली लिटरेरी फेस्टिवल के वर्चुअल आयोजन सोशल मीडिया के...

कलिंग साहित्य महोत्सव बुक अवॉर्ड्स 2020-21 का ऐलान, इन पुस्तकों को मिलेगा सम्मान; जानें- किसे मिली है सूची में जगह

कलिंग साहित्य महोत्सव ने अपने 'बुक अवॉर्ड 2020-21' की घोषणा कर दी है। भुवनेश्वर में 10 दिसंबर से होने जा रहे...

KLF मैथिली लिटरेरी फेस्टिवल का आयोजन 11-12 सितम्बर को, वर्चुअल लगेगा देश-दुनिया के दिग्गज साहित्यकारों का मेला

देश के प्रतिष्ठित साहित्य संगठन कलिंग लिटरेरी फेस्टिवल (केएलएफ) की अगुवाई में आगामी 11-12 सितम्बर 2021 को दो...

पुस्तक समीक्षा । एक देश बारह दुनिया: हाशिये पर छूटे भारत की तस्वीर

एक देश बारह दुनिया शिरीष खरे प्रकाशक  राजपाल प्रकाशन मूल्य: 295 रु.  पृष्ठ: 240   ''लेखक लिखता है कि उनकी...

दुष्यंत कुमार और हबीब तनवीर जयंती- अपनी दुनिया और अलग रास्ते बनाने वाले दो फनकार, सत्ता को ललकारते हैं जिनके शब्द

ग़ज़ल और नाटक दोनों ही विधाएं किसी बरगद की तरह उम्रदराज़ हैं। दोनों विधाओं ने परंपरागत परिवेश से बाहर...

शहरनामा | जगदलपुर: “खूबियों से भरा ये शहर है मेरा”

“खूबियों से भरा ये शहर है मेरा” अपनी मस्ती में मस्त शहर इसकी तारीफ अब मैं क्या बयां करूं, खूबियों से...

व्यंग के भीष्म पितामह हरिशंकर परसाई: समाज के ठेकेदारों को हजम नहीं होती थीं पाखंड पर करारी चोट

पद्मश्री हरिशंकर परसाई जी, हिंदी साहित्य में व्यंग्य को सर्वथा अलग विधा का दर्जा और उत्कृष्ट मुकाम...