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कला-संस्कृति

एक धीमी सी याद

एक धीमी सी याद

उनकी मुंदी आंखों के नीचे अंधेरे की गाढ़ी परत बिछी हुई थी। सरकारी अस्पताल के उस आईसीयू में गुजरे जमाने के मशहूर गवैए उस्ताद इकराम मुहम्मद खान को उनकी जिंदगी आखरी सलामी देने की तैयारी कर रही थी।
डर

डर

उमाशंकर चौधरी की कविताएं
जयपुर में जुटे साहित्य के दिग्गज

जयपुर में जुटे साहित्य के दिग्गज

जयपुर धीरे-धीरे देश की साहित्य‌िक राजधानी बन गया है। देश का सबसे बड़ा साहित्योत्सव यहां 21 से 25 जनवरी के बीच आयोजित किया गया जिसमें भारत ही नहीं पूरी दुनिया के चर्चित साहित्यकार शामिल हुए।
जेरेनियम का फूल

जेरेनियम का फूल

अध्यापिका मारिया यीरेमोवना ने कहा कि कक्षा में एक सजीव कोना बनाना है और प्रत्येक छात्र कोई न कोई सजीव वस्तु लाए।
अड्डे पर साझा उदासी

अड्डे पर साझा उदासी

अड्डे पर लोग सात बजे शाम से जुटने लगते हैं। साढ़े सात तक प्राय: सभी पहुंच जाते हैं। जो नहीं पहुंच पाता उसकी तलाश शुरू हो जाती है।
उदासियों, संघर्षों और जिजीविषा का चितेरा

उदासियों, संघर्षों और जिजीविषा का चितेरा

राबिन शॉ पुष्प के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सुबह लौटते हुए पीछे छूटते गांवों से निकलकर उनकी कहानी में प्रवेश लेना था। यह कहानी आभा ब्राउन की नहीं है, ओनील और आभा ब्राउन और उनके माता-पिता मेरे साथ हो लिए थे।
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