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नौ लोगों को मिला आउटलुक एग्रीकल्चर कॉनक्लेव एंड स्वराज अवॉर्ड्स, सहकारिता और एफपीओ में किया बेहतरीन काम

आउटलुक एग्रीकल्चर कॉनक्लेव एंड मेरा स्वराज अवॉर्ड्स का आगाज आज सिम्पोजियम हॉल, नेशनल एग्रीकल्चर...
नौ लोगों को मिला आउटलुक एग्रीकल्चर कॉनक्लेव एंड स्वराज अवॉर्ड्स, सहकारिता और एफपीओ में किया बेहतरीन काम

आउटलुक एग्रीकल्चर कॉनक्लेव एंड मेरा स्वराज अवॉर्ड्स का आगाज आज सिम्पोजियम हॉलनेशनल एग्रीकल्चर साइंस सेंटर (एनएएससी) कॉम्प्लेक्सआईसीएआर में हुआ। इसमें सहकारिता, एफपीओ, मछली पालन से लेकर मुर्गी पालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने वालों को पुरस्कृत किया गया।

पहला पुरस्कार श्रेष्ठ प्राथमिक सहकारिता समिति कैटेगरी में ओडिशा की मयूरभंज गोटरी डेवलपमेंट कोऑपरेटिव सोसायटी को दिया गया। सोसायटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉक्टर प्रियब्रत माझी और उनकी सहयोगी सेक्रेटरी निबेदिता माझी ने पुरस्कार लिया।

मयूरभंज सोसायटी की शुरुआत 2016 में 51 किसानों के साथ हुई। इसके ज्यादातर सदस्य आदिवासी हैं, जो बकरियों के जरिए अपनी आय बढ़ा रहे हैं। बकरियां कैसे इनके लिए फायदेमंद साबित हो रही हैं, वह इसी से समझा जा सकता है कि उन्हें वह एटीएम भी कहते हैं।

दूसरा अवॉर्ड महिला कैटेगरी में श्रेष्ठ प्राथमिक सहकारिता समिति के लिए दिया गया। यह असम के माजुली क्षेत्र की रेंगम वीमेन इंडस्ट्रियल कोऑपरेटिव सोसायटी के खाते में गया। सोसायटी की चेयरपर्सन करुणा कुटुम और सेक्रेटरी दीपा रानी पयुन ने पुरस्कार ग्रहण किया।

असम के सुदूर क्षेत्र माजुली में गरीब महिलाओं को लेकर साल 2011 में इस सोसायटी की शुरुआत हुई। शुरुआत में केवल 24 महिलाएं साथ में जुड़ीं जो अब बढ़कर 161 तक पहुंच गई हैं। महिलाओं के सशक्तिकरण का यह बेहतरीन उदाहरण है।

अवॉर्ड की दूसरी कैटेगरी रही श्रेष्ठ जिला सहकारी समिति। यह अवॉर्ड दिया गया कर्नाटक के देवनगिरी की TUMCOS सोसायटी को। सोसायटी के चेयरमैन शिवकुमार और एमडी मधु एनपी ने अवॉर्ड लिया।

यह संघ सुपाड़ी के बिजनेस में किसानों को लोन देने का काम करता है। संघ के 11,000 सदस्य हैं। संघ 600 करोड़ का कारोबार कर रहा है।

श्रेष्ठ जिला सहकारी समिति की महिला कैटेगरी का अवॉर्ड गुजरात की श्री मोरबी डिस्ट्रिक्ट वीमेन कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लिमिटेड को, जिसे मयूर डेयरी के नाम से भी जाना जाता है। यूनियन की चेयरपर्सन हंसाबेन मगनभाई वडाविया और एमडी प्राणजीवन कुंदरिया को अवॉर्ड दिया गया।

यह भारत की पहली महिला मिल्क कोऑपरेटिव यूनियन है। इसकी शुरुआत 11 मई 2016 को हुई। इसका प्रोडक्शन 34,500 लीटर प्रतिदिन है। सोसायटी पहले साल से ही मुनाफे में आ चुकी है और दूसरे साल इसका मुनाफा 7.30 करोड़ रुपये पहुंच चुका है।

राज्य कैटेगरी में श्रेष्ठ राज्य सहकारी समिति का पुरस्कार दिया गया बिहार स्टेट मिल्क कोऑपरेटिव फेडरेशन को। सोसायटी की चेयरमैन एन विजयलक्ष्मी और एमडी शिखा श्रीवास्तव ने पुरस्कार लिया।

यह सोसायटी सुधा डेयरी के नाम से प्रसिद्ध है। इसके तहत 22,455 समितियां हैं जो दूध का बिजनेस कर रही हैं। इसकी स्थापना साल 1983 में हुई थी। सोसायटी का टर्नओवर तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है।

महिला कैटेगरी में श्रेष्ठ राज्य सहकारी समिति का अवॉर्ड रांची के झारखंड वीमेन सेल्फ सपोर्टिंग पोल्ट्री कोऑपरेटिव फेडरेशन को दिया गया। इसके लिए फेडरेशन की अध्यक्ष अंजना सरदार और उपाध्यक्ष भगवती देवी को सम्मानित किया गया।

इस सहकारी संघ की स्थापना 31 मार्च, 2005 को हुई। इसमें आज 10 प्राथमिक पोल्ट्री सहकारी समितियां हैं। समिति महिलाओं को मुर्गीपाल के लिए पूंजी, चूजा, दाना, दवाई, वेटनरी सेवा और बाजार प्रबंधन की सुविधाएं मुहैया कराती है। 2017-18 में सभी महिलाओं ने 11,000 मीट्रिक टन उत्पादन किया और लगभग 150 करोड़ रुपये का कारोबार किया।

अगली कैटेगरी है श्रेष्ठ सहकारी समिति- राष्ट्रीय पुरस्कार। यह अवॉर्ड नेशनल फेडरेशन ऑफ फिशर्स कोऑपरेटिव लिमिटेड (फिशकोफेड) को दिया गया। कोऑपरेटिव के एमडी बीके मिश्रा और चेयरमैन टी प्रसाद ने अवॉर्ड लिया।

यह सोसायटी मछली पालन को प्रोत्साहित करती है। इस सोसायटी के 32 लाख सदस्य हैं। इसकी स्थापना 1980 में हुई। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत इसने 26 लाख 65 हजार मछली पालकों को बीमा कवर कराया।

सहकारिता प्रोत्साहन पुरस्कार राष्ट्रीय स्तर कैटेगरी में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को अवॉर्ड दिया गया।

एनसीडीसी किसानों की सहकारी संस्थाओं को फाइनेंस उपलब्ध कराने से लेकर ट्रेनिंग देने का काम करती है, जिसका फायदा आज देशभर के किसान उठा रहे हैं।

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