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शिवराज के हाथ खाली

भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी पर कांग्रेस को नहीं दे पाई मात
हाथ आई जीतः सिंधिया के साथ कमलनाथ और कांतिलाल भूरिया का रोड शो

मध्य प्रदेश उन राज्यों में है जहां इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां की राजनीतिक बयार को समझने के लिए उपचुनावों के नतीजों पर गौर क‌रिए। राज्य में 2013 विधानसभा चुनाव के बाद से 14 उपचुनाव हुए हैं। इनमें नौ में सत्ताधारी भाजपा और पांच में कांग्रेस को जीत मिली है। इस सिक्के का दूसरा पहलू भी है। अप्रैल 2017 के बाद जो चार उपचुनाव हुए हैं उनमें भाजपा को शिकस्त खानी पड़ी है। अटेर, चित्रकूट के बाद कोलारस और मुंगावली में भी कांग्रेस जीतने में कामयाब रही है।

मुंगावली और कोलारस उपचुनाव साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माने जा रहे थे। 2013 में भी दोनों सीटों पर कांग्रेस को सफलता मिली थी। सो, 28 फरवरी को आए उपचुनाव के नतीजे चौंकाने वाले भले न हों, लेकिन भाजपा की लगातार कमजोर होती स्थिति का अंदाजा जरूर देते हैं। कोलारस में कांग्रेस के महेंद्र राम सिंह यादव को 82,523 और भाजपा के देवेंद्र जैन को 74,437 वोट मिले। मुंगावली में कांग्रेस के ब्रजेन्द्र सिंह यादव को 70,808 और भाजपा के राव देशराज सिंह यादव को 68,685 मत मिले।

दोनों सीटें पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र की हैं। बीते साल सितंबर में जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भोपाल आए थे तो उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी 29 सीटों पर जीत का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके लिए कांग्रेस के कब्जे से छिंदवाड़ा, गुना और झाबुआ लोकसभा सीट छीननी जरूरी है। ऐसे में उपचुनाव सिंधिया के घर में सेंधमारी का भाजपा के पास अच्छा मौका था।

प्रदेश भाजपा के पोस्टर बॉय और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन उपचुनावों में पूरी ताकत झोंक दी थी। प्रचार की कमान खुद संभाल रखी थी। साथ में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सांसद प्रभात झा, प्रदेश के 19 मंत्री और 41 से ज्यादा विधायक प्रचार में जुटे थे। चौहान ने प्रचार के दौरान आठ रातें इन क्षेत्रों में बिताईं। शिवपुरी जिले के आदिवासी बहुल कोलारस में 500 करोड़ रुपये की विकास कार्यों की घोषणाएं कीं। करीब 25 दिनों में 50 से ज्यादा सभाएं कीं। ऐसा ही अशोक नगर जिले के मुंगावली में भी देखने को मिला। यहां मुख्यमंत्री ने 25 आम सभाएं और 58 रोड शो किए। लगभग 600 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणाएं कीं। यहां तक कि मुंगावली को स्मार्ट सिटी बनाने की बात भी कही।

मुख्यमंत्री के बेटे कार्तिकेय ने भी उपचुनावों के माध्यम से अपना राजनीतिक दमखम दिखाने की कोशिश की थी। उपचुनाव की तारीख के ऐलान से पहले ही सात जनवरी को कोलारस पहुंच उन्होंने भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की थी।

दूसरी तरफ, कांग्रेस की ओर से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मोर्चा संभाल रखा था। उन्होंने कोलारस में 40 सभाएं और 10 रोड शो और मुंगावली में 35 सभाएं और 10 रोड शो से ही भाजपा के अरमानों पर पानी फेर दिया। नतीजों से मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर पेश किए जाने की उनकी दावेदारी भी मजबूत हुई है। उपचुनाव प्रचार के दौरान सिंधिया ने आउटलुक को बताया था, “संसद के चुनाव हों या स्‍थानीय चुनाव, जनता चेहरा देखना चाहती है। जिन राज्यों में आपके पास चेहरे हैं वहां जरूरत और उपलब्धता के हिसाब से आपको चेहरा देना ही होगा।”

उपचुनाव के नतीजों ने जहां कांग्रेस को एक नई ऊर्जा दी है, वहीं भाजपा में भीतरी लड़ाई तेज हो गई है। नतीजों के बाद सिंधिया की तारीफ करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने कहा, “मुंगावली-कोलारस में भाजपा नेताओं ने जनता से पांच महीने का समय मांगा। जब आपने 14 साल की सरकार में कुछ नहीं किया तो पांच महीने में क्या कर लेते? आजकल का वोटर मंत्रियों की भीड़ से प्रभावित नहीं होता। सिंधिया को भाजपा ने अभिमन्यु समझकर चक्रव्यूह रचा था, लेकिन वे अर्जुन निकले।”  

वैसे, इस राजनीतिक समर के असली अर्जुन की पहचान तो साल के अंत में ही होगी जब विधानसभा चुनावों के नतीजे आएंगे।

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