आउटलुक 25 सितंबर 2017 SEP 11 , 2017 अनुज खरे

यूं बनते हैं बंदूकबाज

बंदूकबाज का इंटरव्यू
अनुज खरे
बंदूकबाज ने बताए अपने हुनर

बंदूकबाज से एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

इस धंधे में कैसे आए? पुराना बदला लेना था या यूं ही मूंगफली खाते-खाते दिमाग में खयाल आ गया?

बंबाभाई-सानदार, जबरदस्त, जिंदाबाद सवाल। अपना बचपनई से ख्वाब था। बहुतई तैयारी लगी। अपना सिलेक्शन बजरिए कैंपस प्लेसमेंट हुआ था। पुराने बंदूकबाज की कंपनी का विज्ञापन निकला रहा। हमने अप्लाई किया रहा। हमें तो उसकी एजुकेशन क्वालिफिकेशन सहित हर रिक्वायरमेंट आज तक फुल-फुल याद है।

हें... एजुकेशन क्वालिफिकेशन! अच्छा रिक्वायरमेंट क्या थी?

बंबाभाई-बहुतई भयंकर थी। बंदूकबाज चइए था उन लोगन को, खटकेदार-धारदार चलाने वाला। कलेजा फौलाद का। आंखें उल्लू जैसी चइए थीं। रनिंग कुत्ते के माफिक। टक्कर मारके सिर खोलने के लिए खोपड़ी घोड़े के सिर जैसी चाहिए थी। कहै रहे अनिवार्य योग्यता में पुराना पुलिस रिकॉर्ड होना चइए। बहुतई जुगाड़ करके बनवाए थे हम।

ऐसी क्वालिफिकेशन!  कुछ और भी चाहिए था उन्हें बाबूभाई?

हओ, सर्टिफिकेट भी चइए थे, मोहल्ले के दादा या किसी पुराने बंदूकबाज के। खून से अटैस्टेड, ब्लड ग्रुप कोई भी चलेगा, बस सर्टिफिकेट ओरिजनल होना चइए। कई भाषाओं में गाली-गुफ्ता करने वाले को प्राथमिकता। कसम से, एक मिनट को तो भगवानई से भरोसा उठ गया रहा।

जबरा टेलेंट चाहिए था उन्हें तो बाबूभाई?

बंबाभाई-हओ, चारखाने की लुंगी के साथ 400 मीटर रनिंग का टेस्ट भी।

कोई रिटन एक्जाम मतलब पेपर-शेपर भी था?

बंबाभाई-हओ, पहले सवाल मेंई अपने पसीनई छूट गए थे। पूछे थे, कट्टा और पिस्तौल का फोटो बनाते हुए दोनों का डिफरेंस बताओ। कभई चलाते वक्त कट्टा फटा हो तो उसका सर्टिफिकेट भी लगाओ। सर्टिफिकेट प्राइवेट डॉक्टर का चइए। सरकारी डॉक्टर का नई चलेगा।

फिर तो बाबूभाई कोई कॉमनसेंस, एटीट्यूड वगैरहा का टेस्ट भी हुआ क्या?

बंबाभाई-पूछे थे, तीन मिनट में तीन लोगों को पीटना हो और उन्हीं तीनों को गोली मारनी हो तो टाइम मैनेजमेंट कैसे करोगे?

फिर?

बंबाभाई-डेढ़ मिनट पीटेंगे-डेढ़ मिनट में गोली मारेंगे फिर भग लेंगे।

गजब, क्या बोले वो लोग?

बंबाभाई-बोले, कच्चा खिलाड़ी है। गोली मारना हो तो पीटने में टाइम खोटी क्यों करना!

हमारा आखिरी सवाल, युवा पीढ़ी को क्या संदेश देना चाहेंगे?

बंबाभाई-हमारा जीवन ही संदेस रहा है। सिलेक्सनई देख लो कितना टाइट रहा। लुंगी पहनकर पटरियों के किनारे बैठना आसान है लेकिन भगने में बहुतई जोर लगता है। इससे तो आसान है चुपचाप पढ़ो-लिखो। कायदे की नौकरी कर लो। 

अब आप हिंदी आउटलुक अपने मोबाइल पर भी पढ़ सकते हैं। डाउनलोड करें आउटलुक हिंदी एप गूगल प्ले स्टोर या
एपल स्टोर से

Copyright © 2016 by Outlook Hindi.