न सम्मान, न इनाम

चंडीगढ़ से हरीश मानव
खेल मंत्री अनिल विज (सफेद कपड़े में) के अनुसार खिलाड़ी ज्यादा थे, इसलिए सम्मान समारोह नहीं किया गया
खेल मंत्री अनिल विज (सफेद कपड़े में) के अनुसार खिलाड़ी ज्यादा थे, इसलिए सम्मान समारोह नहीं किया गया

चंडीगढ़ से हरीश मानव
खट्टर सरकार ने खिलाड़ी प्रोत्साहन नीति बदली, रद्द किया समारोह

हरियाणा में इन दिनों नए तरह का खेल चल रहा है। यह खेल खेल रही है राज्य की मनोहर लाल खट्टर सरकार। यहां राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को वादे के मुताबिक इनाम राशि नहीं दी जा रही है। तीन साल से उनका सम्मान समारोह नहीं हुआ है। पुलिस नौकरी में इनका कोटा भी खत्म कर दिया गया है। नाराज खिलाड़ी शिकायत के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। 24 जून को पंचकूला में होने वाला जो समारोह रद्द किया गया, उसमें 3,000 खिलाड़ियों को 90 करोड़ रुपये की इनाम राशि दी जानी थी। खेल मंत्री अनिल विज का कहना है कि एक दिन में इतने खिलाड़ियों को सम्मानित करना संभव नहीं था, इसलिए आयोजन रद्द किया गया।

दरअसल, बगैर समारोह के ही इनाम राशि खिलाड़ियों के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई, पर उसमें भारी कटौती से खिलाड़ियों में रोष है। 65 किलो भार वर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब तक सात गोल्ड मेडल जीतने वाले पहलवान बजरंग पूनिया ने आउटलुक से कहा, “खिलाड़ी मेडल लाता है, तो वह देश की जीत होती है। सरकार इनाम राशि घटाकर खिलाड़ियों के आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचाए।” पूनिया ने बताया कि उनके खाते में तीन करोड़ की जगह 2.25 करोड़ रुपये आए हैं। खेल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें बताया कि साल के पहले सबसे बड़े मेडल की पूरी इनाम राशि दी जाएगी। दूसरे मेडल पर राशि में 50 प्रतिशत और तीसरे पर 25 प्रतिशत कटौती होगी। एक साल में चौथे और उससे अगले मेडलों पर इनाम राशि नहीं मिलेगी।

अंतरराष्ट्रीय स्तर के दो और एथलीट ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनकी भी इनाम राशि बकाया है। एक एथलीट के खाते में 25 लाख आए हैं, जबकि यह राशि एक करोड़ से अधिक होनी चाहिए थी। दूसरे के खाते में सिर्फ 15 लाख रुपये आए हैं।

रेसलर विनेश फोगाट ने मुख्यमंत्री और खेल मंत्री को टैग करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “प्रिय सर, लगता है पांच साल पहले आप लोग यह कसम खाकर आए थे कि हरियाणा में न तो खिलाड़ी छोड़ने हैं, न ही उनका मान-सम्मान। आज छोटा-बड़ा कोई भी खिलाड़ी आपकी पॉलिसी से खुश नहीं है।”

खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए कांग्रेस की पूर्व भूपिंदर सिंह हुड्डा सरकार की पॉलिसी को खट्टर सरकार ने 2015 की हरियाणा स्पोर्ट्स ऐंड फिजिकल फिटनेस पॉलिसी में जारी रखा। 2015 में इनाम राशि 50 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई, लेकिन यह रकम देने से पहले ही दिसंबर 2018 में पॉलिसी बदल दी गई। जननायक जनता पार्टी के नेता और पूर्व सांसद दुष्यंत चौटाला ने आउटलुक से कहा कि सम्मान समारोह रद्द करके सरकार ने कई बार खिलाड़ियों को अपमानित किया है। सरकार उनके सम्मान की बहाली के लिए पुलिस नौकरी में तीन प्रतिशत भर्ती कोटे को बहाल करे। कांग्रेस के पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि स्पोर्ट्स ऐंड फिजिकल एप्टीट्यूड टेस्ट (स्पैट) और “पदक लाओ, पद पाओ” स्कीम के तहत हुड्डा सरकार ने 10 वर्ष में खिलाड़ियों को करोड़ों के इनाम दिए। 700 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां दीं। परिणामस्वरूप 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में मिले भारत के 38 स्वर्ण पदकों में 22 हरियाणा के खिलाड़ियों के थे। 2012 के ओलंपिक गेम्स में छह पदकों में से चार हरियाणा के खिलाड़ियों की झोली में आए। आज खट्टर सरकार ने गांवों की खेल अकादमियां भी बंद करा दी हैं।

इन आरोपों को नकारते हुए खेल मंत्री विज का कहना है कि “कैच देम यंग” अभियान के तहत हर जिले में 20-20 खेल नर्सरी स्थापित की जा रही है। प्रदेश भर में 400 से अधिक खेल नर्सरी खोली जाएंगी और हरेक पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। खिलाड़ियों को डेढ़ करोड़ रुपये तक नकद इनाम के अलावा मेडल के हिसाब से नौकरी की गारंटी भी है।

अब आप हिंदी आउटलुक अपने मोबाइल पर भी पढ़ सकते हैं। डाउनलोड करें आउटलुक हिंदी एप गूगल प्ले स्टोर या एपल स्टोर से