नेता-पुत्रों ने कराई थू-थू

भोपाल से रवि भोई
भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय ने बल्ले से की थी निगम अधिकारी की पिटाई
भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय ने बल्ले से की थी निगम अधिकारी की पिटाई

भोपाल से रवि भोई
अपने नेताओं के बेटों के कानून हाथ में लेने की बढ़ती वारदातों से भाजपा बैकफुट पर, कई के राजनैतिक कॅरिअर पर लग सकता है ग्रहण

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नेता-पुत्र आखिर गुंडागर्दी पर क्यों उतारू हैं? केंद्रीय राज्यमंत्री प्रह्लाद पटेल और नरसिंहपुर के विधायक जालमसिंह के बेटे ने छोटी-सी बात पर एक युवक और उसके पिता की पिटाई कर दी। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के विधायक पुत्र आकाश विजयवर्गीय ने इंदौर नगर निगम के अधिकारी की पिटाई बल्ले से कर दी। विधायक कमल पटेल के बेटे सुदीप को एक कांग्रेस नेता को धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। सबसे बड़ी बात तो यह है कि नेता अपने बेटों को समझाने और सीख देने की जगह उनका महिमामंडन कर रहे हैं। कैलाश विजयवर्गीय ने तो अपना गुस्सा मीडिया पर उतारा। जैसा इंदौर में आकाश विजयवर्गीय के मामले में हुआ, कार्यकर्ता ऐसे नेता-पुत्रों को हीरो के रूप में प्रचारित कर रहे हैं। अफसर की पिटाई के बाद आकाश के काम को सराहनीय बताते हुए पूरे इंदौर शहर में ‘सैल्यूट आकाश’ के पोस्टर लगा दिए गए। यही नहीं, जेल से रिहाई के बाद आकाश के सम्मान में भाजपा दफ्तर के सामने पांच बार हवाई फायर भी किए गए।

आकाश विजयवर्गीय की हरकतों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा संसदीय दल की बैठक में नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह कतई बर्दाश्त लायक नहीं है तो राष्ट्रीय नेतृत्व ने आकाश को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया। आगे की कार्रवाई का तो बाद में पता चलेगा, लेकिन कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह कह रहे हैं कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने दोस्त कैलाश विजयवर्गीय के बेटे पर आंच नहीं आने देंगे। आकाश पर कोई कार्रवाई नहीं होने वाली है।

भाजपा प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय का कहना है कि आकाश के मामले में कानून अपना काम कर रहा है। यह मामला केंद्रीय नेतृत्व के संज्ञान में भी है। उनका कहना है कि हर व्यक्ति को कानून के दायरे में रहकर शालीन व्यवहार करना चाहिए। लेकिन पार्टी नेतृत्व की कथनी और करनी का फर्क भी लगातार उजागर होता जा रहा है। मसलन,  चुनाव के वक्त प्रज्ञा ठाकुर के नाथूराम गोडसे वाले बयान को लेकर प्रधानमंत्री ने उन्हें दिल से माफ न करने की बात कही थी। उसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा गया, लेकिन उनको भेजे नोटिस और कार्रवाई का क्या हुआ, यह किसी को पता नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा कहते हैं, “भाजपा में कैलाश विजयवर्गीय का खौफ है। प्रधानमंत्री की टिप्पणी के बाद भी भाजपा तय नहीं कर पाई है कि आकाश पर कार्रवाई करनी है या नहीं।  इससे लगता है कि कैलाश विजयवर्गीय भाजपा से ऊपर हैं। जैसे प्रज्ञा ठाकुर के मामले में भाजपा ने नोटिस देकर सिर्फ खानापूर्ति की, वैसा ही इस मामले में भी किया जा रहा है।”

आकाश विजयवर्गीय पहली बार विधायक बने हैं। वे पिता कैलाश विजयवर्गीय की जगह चुनाव लड़े और जीते। आकाश जमीनी नेता नहीं हैं और न ही अब तक कभी संघर्ष की राजनीति की है। पहली बार जनता की समस्या को लेकर सड़क पर आए और क्रिकेट के विश्वकप के बुखार में अफसर को ही गेंद समझकर बल्ला चलाने लगे। इंदौर नगर निगम पर भाजपा का कब्जा है। यहां महापौर मालिनी गौड़ हैं। महापौर के तौर पर उनका कार्यकाल इस साल के अंत में समाप्त होने वाला है।

आकाश विजयवर्गीय इंदौर तीन और मालिनी गौड़ इंदौर चार की विधायक हैं। मालिनी स्व. लक्ष्मण सिंह गौड़ की पत्नी हैं। स्व. गौड़ और कैलाश विजयवर्गीय की राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता जबर्दस्त रही है। दुर्घटना में लक्ष्मण सिंह गौड़ के निधन के बाद कैलाश विजयवर्गीय और उनके विधायक मित्र रमेश मेंदोला ने इंदौर चार सीट में दखल देने की कोशिश की। लेकिन मालिनी गौड़ ने अपने पति द्वारा तैयार जमीन पर पार्टी के इन दोनों नेताओं को पांव पसारने का मौका नहीं दिया। कहा जाता है कि दोनों ने राऊ के पूर्व विधायक जीतू जिराती के जरिए भी इंदौर चार में दखल की कोशिश की थी, पर वे नाकाम रहे।

कैलाश विजयवर्गीय अनुभवी नेता होने के कारण पार्टी के भीतर लड़ाई अपनी तरह से लड़ते रहे। चाहे शिवराज सिंह के साथ हो या मालिनी गौड़ और सुमित्रा महाजन के साथ, उन्होंने लड़ाई कभी सार्वजनिक नहीं की। लेकिन उनके बेटे आकाश सीधे सड़क पर आ गए। नगर निगम की टीम किसी कब्जे को ढहाने या कार्रवाई करने गई तो आकाश ने अपनी पार्टी की महापौर से बात कर कार्रवाई रुकवाई क्यों नहीं? मालिनी गौड़ ने सार्वजनिक तौर पर कहा भी कि आकाश को उनसे बात करनी थी।

इस घटना से कुछ दिनों पहले ही केंद्रीय राज्य मंत्री प्रह्लाद पटेल के बेटे प्रबल पटेल और नरसिंहपुर के विधायक जालमसिंह के बेटे मोनू पटेल ने एक युवक और उसके पिता की पिटाई कर फायरिंग की। तब 12 लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया। हरदा से भाजपा विधायक कमल पटेल के बेटे सुदीप को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन पर कांग्रेस नेता सुखराम बामने को धमकी देने का आरोप है। भाजपा नेतृत्व ने इन दोनों मामलों में जरा भी सख्ती नहीं दिखाई। शायद यही वजह है कि आकाश विजयवर्गीय ने अफसर पर बल्ला चला कर अपनी नई छवि पेश कर दी। इसके बाद उन्हें हीरो बनाने की कोशिश की गई, लेकिन इस बार दांव उल्टा पड़ गया।

मध्य प्रदेश की राजनीति में कैलाश विजयवर्गीय की छवि भले साफ-सुथरी नहीं मानी जाती, लेकिन भाजपा के राज में मुख्यमंत्री पद के लिए उनका नाम कई बार चर्चा में रहा। संगठन में पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के बारे में अब तक कहा जाता रहा है कि मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार को अगर भाजपा गिराने में कामयाब हो जाती है तो मुख्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय होंगे। लेकिन बेटे की हरकत पर प्रधानमंत्री की टिप्पणी से उनकी राजनैतिक साख पर बट्टा तो लग ही गया। विरोधी अभी तो चुप्पी साधे हैं, लेकिन राजनीति में कब क्या होगा, कहा नहीं जा सकता। एक बात तो साफ है कि बेटे आकाश ने कैलाश विजयवर्गीय का राजनैतिक खेल बिगाड़ दिया है।

पार्टी उपाध्यक्ष प्रभात झा के बेटे तुष्मुल झा पर भी मारपीट के आरोप लग चुके हैं। शिवराज के मंत्री रहे रामपाल सिंह के बेटे ने एक युवती से प्रेम किया, दोनों शादी करना चाहते थे। लेकिन मंत्री जी ने नहीं चाहा तो युवती को जान गंवानी पड़ी। कमलनाथ सरकार के लिए यह बड़ी चुनौती है। लेकिन चाल, चरित्र, चेहरे और सुचिता की बात करने वाले भाजपा नेताओं की नई पौध गुंडागर्दी की तरफ क्यों जा रही है? भाजपा मध्य प्रदेश में लगातार 15 साल तक सत्ता में रही। यह नेता-पुत्रों की दादागीरी की एक वजह हो सकती है।

15 साल बाद सत्ता गई तो भाजपा के नेता और उनकी नई पीढ़ी आवेदन और निवेदन को छोड़कर दनादन पर उतर आई है। ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को नई पीढ़ी को शालीनता का पाठ पढ़ाना होगा। जनता दनादन का मजा भले ही ले ले, लेकिन वह इसे अच्छे नजरिए से नहीं देखती है। इसका समाज में भी अच्छा संदेश नहीं जाता है। अंतत: इसका नुकसान पार्टी को होता है। ऐसा सिर्फ मध्य प्रदेश में नहीं हो रहा है। महाराष्ट्र के बड़े नेता नारायण राणे के विधायक बेटे नितेश राणे ने कणकवली में एक इंजीनियर के साथ मारपीट की। यह जनप्रतिनिधियों में सहनशीलता और मर्यादा घटने का परिचायक भी है।

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