आउटलुक-दृष्टि सर्वेक्षण 2019

दृष्टि रिसर्च टीम
देश के टॉप प्रोफेशनल कॉलेज
देश के टॉप प्रोफेशनल कॉलेज
त्रिभुवन तिवारी

दृष्टि रिसर्च टीम
सर्वेक्षण पद्धति

भारत के बेस्ट प्रोफेशनल कॉलेजों की सालाना आउटलुक रैंकिंग (दृष्टि स्ट्रैटेजिक रिसर्च सर्विसेज के साथ) शिक्षा के नौ क्षेत्रों में समझदारी से विकल्प चुनने में छात्रों के लिए मददगार साबित हो सकती है। देश के बेस्ट प्रोफेशनल कॉलेजों की रैंकिंग की प्रक्रिया संस्थानों की विस्तृत सूची तैयार करने और पिछले साल रैंकिंग में हिस्सा ले चुके संस्थानों के निदेशकों से संपर्क करने के साथ शुरू की गई है। इस साल नए संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने के लिए हमने ईमेल, टेलीफोन के अलावा संस्थानों में खुद पहुंचकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने का प्रयास किया है। मानकों के अनुरूप हमने सरकारी मान्यता और संबद्धता वाले और कम से कम तीन बैच निकाल चुके कॉलेजों पर ही विचार किया है। देश भर में नौ विषयों के पाठ्यक्रमों के 2,200 से ज्यादा कॉलेजों को विस्तृत वस्तुनिष्ठ प्रश्नावली हमने भेजी। वे विषय हैं: इंजीनियरिंग, मेडिसिन, आर्किटेक्चर, डेंटल, कानून, सोशल वर्क, होटल मैनेजमेंट, फैशन, मास कम्यूनिकेशन।

इस वस्तुनिष्ठ प्रश्नावली के जरिए कॉलेजों को पांच मापदंडों (चयन प्रक्रिया और इंस्टीट्यूट का प्रोफाइल, अकादमिक, व्यक्तित्व और विकास, प्लेसमेंट, रोजगार और ग्रेजुएट नतीजे और इन्‍फ्रास्ट्रक्चर) पर परखा गया। पिछले साल की रैंकिंग से तुलना हो सके इसलिए इन मापदंडों को इस बार भी उतना ही महत्व दिया गया है, जितना पिछले साल दिया गया था।  इस साल विभिन्न संकायों के कुल 446  संस्थानों ने रैंकिंग प्रक्रिया में भाग लिया। इनमें से 201 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। इस साल अवधारणात्मक सर्वेक्षण की जगह हमने सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया है। इसके तहत हमने विभिन्न कॉलेज के सोशल मीडिया पेज का विश्लेषण किया है। हमने विद्यार्थियों द्वारा किए गए कमेंट का विश्लेषण किया है। अवधारणात्मक सर्वेक्षण नहीं करने की वजह यह है कि हम कुछ वर्षों से यह महसूस कर रहे थे कि जब हम संस्थानों को सर्वेक्षण के लिए लिंक भेजते थे, तो हमें कई बार जो जवाब मिलते थे, वह वास्तविक नहीं लगते थे। ऐसे में सोशल मीडिया लिस्टिंग के जरिए हमें बिना किसी पक्षपात के जवाब मिले हैं। इसके अलावा विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों से भी हमने सलाह ली है।

प्रोफेशनल कॉलेजों से पास होकर निकलने वाले छात्रों की संख्या और नौकरियों की तादाद में अंतर को देखते हुए कॉलेज और कोर्स के बारे में सही निर्णय लेना और भी आवश्यक हो जाता है। उम्मीद है कि आउटलुक की प्रोफेशनल कॉलेजों की रैंकिंग इसमें मददगार साबित होगी। फिर भी होशियारी से चुनिए!

(दृष्टि रिसर्च टीम में ए.के. बालाजी प्रसाद, जिग्नेश बाफना, विजय पारेख, निधि कोटियन, शिवानी मिश्रा, अमीषा बलहारा, मेघा खेतान, दीप्तारका दत्ता और देबस्मिता दीवान शामिल रहे)

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