Advertisement

सबसे बड़ी लड़इया रे...

इस बार बल्ले और गेंद की जंग में पिच की अहम भूमिका, कप्तानों की रणनीति पर भी होगी नजर
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान

क्रिकेट का महाकुंभ विश्वकप 30 मई से शुरू हो गया है। यह विश्वकप कई मायनों में पहले के 11 आयोजनों से बिलकुल अलग है। यह पांचवीं बार है, जब इंग्लैंड इसकी मेजबानी करेगा। इस बार टीमों की संख्या में 14 से घटाकर 10 कर दी गई और इसका फॉर्मेट 1992 के विश्वकप की तर्ज पर रखा गया है। इस विश्वकप की एक और खासियत यह है कि इंटरनेशनल  क्रिकेट काउंसिल (आइसीसी) ने फीफा विश्वकप की तर्ज पर ‘होम ऐंड अवे’ किट सिस्टम लागू किया है। इसके तहत भारत, अफगानिस्तान, श्रीलंका और मेजबान इंग्लैंड अपने पारंपरिक नीले रंग की पोशाक में मैदान पर उतरेंगे। भारतीय खिलाड़ी गहरे नीले रंग की जर्सी में खेलते दिखेंगे, लेकिन कुछ मैचों के लिए ऑरेंज कलर की ड्रेस में भी नजर आएंगे।

 किसकी दावेदारी, कितनी पुख्ता

भारत क्रिकेट विश्वकप के इतिहास में अभी तक दो बार यह खिताब अपने नाम कर चुका है। सबसे पहले 1983 में कपिल देव की अगुआई में भारतीय टीम ने उस समय की अपराजेय मानी जाने वाली वेस्टइंडीज की टीम को हराकर विश्वकप जीता। दूसरी बार, महेंद्र सिंह धोनी की अगुआई में मेजबान भारतीय टीम ने 2011 में श्रीलंका को हराकर खिताब अपने नाम किया। ऐसा पहली बार हुआ था कि कोई मेजबान देश खिताब जीतने में सफल रहा था। इस बार भारतीय टीम विराट कोहली के नेतृत्व में विश्वकप में दावेदारी पेश करती नजर आएगी। उनके लिए सबसे अच्छी बात महेंद्र सिंह धोनी के रूप में अनुभवी खिलाड़ी का होना है, जो किसी भी परिस्थिति में मैच का पासा पलट सकते हैं। वह भी न सिर्फ अपनी बल्लेबाजी, बल्कि विकेट के पीछे से भी। इस साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जबसे उन्होंने अपने फॉर्म में वापसी की है, वह आइपीएल में जारी रहा। उनका यह फॉर्म बांग्लादेश के खिलाफ भी देखने को मिला, जब 102 रन के स्कोर पर टॉप के चार बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे, तो उन्होंने के.एल. राहुल के साथ न सिर्फ भारती पारी को 350 से अधिक रन के स्कोर तक पहुंचाया, बल्कि महज 78 गेंदों में ही 113 रनों की शतकीय पारी भी खेली। इसके अलावा, जसप्रीत बुमराह की अगुआई में भुनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी की ‘पेस बैटरी’ फिलहाल दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों में मानी जा रही है। यही वजह है कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा इस विश्वकप में महेंद्र सिंह धोनी और बुमराह को बड़ा ‘गेम चेंजर’ मान रहे हैं। उनका कहना है कि भारतीय टीम में अनुभव और युवा जोश का मिश्रण है, जिससे टीम के फिर से विश्व चैंपियन बनने की पूरी संभावना है।

अभी तक क्रिकेट विश्वकप के 11 संस्करण हो चुके हैं और इसमें सबसे अधिक पांच बार ट्रॉफी जीतने का रिकॉर्ड कंगारुओं (ऑस्ट्रेलियाई टीम) के नाम दर्ज है। हालांकि, इस बार एरॉन फिंच की कप्तानी में टीम पहले की तरह मजबूत नजर नहीं आ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ और विस्फोटक सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर बॉल टेम्परिंग के आरोपों की वजह से पाबंदी के बाद टीम में वापसी की है। गेंदबाजी का दारोमदार मिचेल स्टार्क पर है, जो अक्सर चोटिल होते रहे हैं। जोश हेजलवुड जैसे गेंदबाज चोटिल होने की वजह से टीम में जगह नहीं बना पाए। हालांकि, हालिया संपन्न आइपीएल में वॉर्नर की बल्लेबाजी कंगारुओं के लिए अच्छी खबर साबित हो सकती है।

इमरान खान की कप्तानी में 1992 का विश्वकप विजेता टीम पाकिस्तान इंग्लैंड के हालिया दौरे से पहले काफी मजबूत दिख रही थी। लेकिन एकदिवसीय मुकाबले में इंग्लैंड के हाथों करारी हार से गेंदबाजी पर सवाल उठने लगे हैं। बल्लेबाज इंग्लैंड के खिलाफ तीन बार 300 से अधिक रन बनाने में कामयाब रहे, लेकिन फिर भी टीम को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन, सरफराज अहमद की कप्तानी वाली टीम को फिर भी कमतर नहीं आंका जा सकता है। फखर जमा जैसे सलामी बल्लेबाज और शोएब मलिक जैसे अनुभवी खिलाड़ी टीम के लिए मजबूत कड़ी साबित हो सकते हैं।

2015 विश्वकप की फाइनलिस्ट किवी (न्यूजीलैंड की टीम) इस बार पहले से अधिक संतुलित लग रही है और वह विश्वकप का सूखा खत्म करने के इरादे से पूरे दमखम से उतरेगी। उसके लिए सबसे अच्छी बात है कि रन मशीन केन विलियमसन बेहतरीन फॉर्म में हैं और ट्रेंट बोल्ट तथा टीम साउदी के रूप में तेज गेंदबाज किसी भी बल्लेबाज को भेदने में माहिर हैं। फिरकी लेती पिचों पर ईश सोढ़ी खतरनाक साबित हो सकते हैं।

1975 और 1979 का विश्वकप जीतने वाली टीम जेसन होल्डर की कप्तानी में किसी भी टीम को हराने का माद्दा रखती है। इसकी वजह है कि ‘सिक्सर किंग’ और ‘यूनिवर्स बॉस’ क्रिस गेल की टीम में वापसी हुई है, तो आइपीएल में 200 से अधिक स्टराइक रेट से रन बनाने वाले ऑलराउंडर आंद्रे रसेल दुनिया की किसी भी गेंदबाजी की धार को कुंद कर सकती है। ऐसा वेस्टइंडीज टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ अभ्यास मैच में 421 रनों का पहाड़ सरीखा स्कोर खड़ा कर साबित भी किया।

पाकिस्तान के खिलाफ एकदिवसीय मैचों की सीरीज में लगातार 300 से अधिक रन बनाने और इससे अधिक रनों का लक्ष्य हासिल करने वाली इंग्लैंड की टीम को इस विश्वकप का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। कप्तान इयॉन मॉर्गन के साथ जो रूट और बेन स्टोक्स, जो बटलर से स्ट्रोक हिटर का होना इंग्लैंड के लिए फायदेमंद हो सकता है।

विश्वकप की एक और बड़ी दावेदार टीम है, दक्षिण अफ्रीका। फैफ डुप्लेसी की कप्तानी में टीम ‘चोकर’ के टैग से पीछा छुड़ाना चाहेगी। हाशिम अमला, क्विंटन डि-कॉक और जेपी डुमिनी जैसे बल्लेबाज एक तरफ तो दूसरी ओर डेल स्टेन, कगीसो रबाडा, नगिडी जैसे तेज गेंदबाजों से लैस अफ्रीकी टीम को अभी भी वर्ल्डकप जीतने का इंतजार है। इमरान ताहिर जैसे फिरकी गेंदबाज शानदार फॉर्म में हैं और अफ्रीकी टीम की गेंदबाजी काफी हद तक उन पर भी निर्भर करेगी। उधर, बांग्लादेश अब अंडरडॉग के टैग से बाहर निकल चुका है। तो अफगानिस्तान ने अभ्यास मैच में जिस तरह पाकिस्तान को हराकर चकमा दिया। उससे लगता है कि राशिद खान, मोहम्मद नबी जैसे विश्वस्तरीय खिलाड़ियों से लैस अफगानी टीम उलटफेर कर सकती है। जबकि 1996 की विश्वविजेता टीम श्रीलंका अभी तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। एंजेलो मैथ्यूज की फिटनेस पर सवाल हैं, लसिथा मलिंगा जैसे गेंदबाज 35 साल के हो चुके हैं और सिर्फ उनकी बदौलत टीम शायद ही कोई चमत्कार कर सकती है।

टीमों का गुना-गणित

भारत, विराट कोहली (कप्तान)

दो बार की विजेता और 2019 वर्ल्डकप की फेवरिट टीमों में एक। दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज में शुमार विराट कोहली की अगुआई में महेंद्र सिंह धोनी जैसे बेस्ट फिनिशर का साथ।

मजबूतीः मजबूत टॉप ऑर्डर बल्लेबाज और जसप्रीत बुमराह की अगुआई में सबसे बेहतरीन “डेथ” ओवरों की गेंदबाजी लाइनअप। कुलदीप कुमार और युजवेंद्र चहल जैसे रिस्ट गेंदबाज टीम को और मजबूती देते हैं।

कमजोरीः शीर्ष के तीन बल्लेबाजों पर हद से अधिक निर्भरता और अस्थिर चौथे नंबर का बल्लेबाजी क्रम।

टीमः विराट कोहली (कप्तान), रोहित शर्मा (उप-कप्तान), शिखर धवन, एम.एस. धोनी, केदार जाधव, भुवनेश्वर कुमार, हार्दिक पांड्या, कुलदीप कुमार, युजवेंद्र चहल, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, विजय शंकर, दिनेश कार्तिक, के.एल. राहुल, रविंद्र जडेजा

 

- ऑस्ट्रेलिया, एरॉन फिंच (कप्तान)

कभी दुनिया की नंबर एक टीम को अभी भी कमजोर नहीं माना जा सकता है। कंगारू पांच बार विश्वकप जीत चुके हैं। कोई और टीम दो बार से अधिक यह खिताब नहीं जीत सकी है।

मजबूतीः स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर की वापसी से टीम को बल्लेबाजी में मजबूती और स्थायित्व मिलेगा।

कमजोरीः चोटिल गेंदबाज चिंता का बड़ा सबब। स्पेशलिस्ट विकेटकीपर एलेक्स कैरी की गैर-मौजूदगी में बैक-अप का नहीं होना।

 

- न्यूजीलैंड, केन विलियमसन (कप्तान)

वर्ल्डकप की अंडरडॉग टीम। 2015 वर्ल्डकप की फाइनलिस्ट किवी इस बार इंग्लैंड में खिताब का सूखा दूर करने की कोशिश करेगी, क्योंकि यहां की स्थितियां उनके मुफीद होंगी।

मजबूतीः रन-मशीन कप्तान केन विलियमसन की अगुआई में मजबूत ऑलराउंडर से भरी टीम मैच किसी भी हालत में अपने पक्ष में करने में सक्षम हैं।

कमजोरीः कागज पर मजबूत टीम दिखने के बावजूद यह अक्सर मैदान पर विफल हो जाती है। शीर्ष बल्लेबाजी क्रम का अचानक फेल हो जाना चिंता की बड़ी बात।

 

 - बांग्लादेश, मशरफे मर्तजा (कप्तान)

क्रिकेट की दुनिया की तेजी से उभरती हुई टीम, जिसने पिछले कुछ वर्षों में अपना कद और

बड़ा किया है। टीम में टैलेंटेड ऐसे खिलाड़ियों की कमी नहीं, जो कभी भी मैच का पासा पलट सकते हैं।

मजबूतीः युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का मिश्रण। इसके अलावा ऑलराउंडर टीम को और मजबूती देते हैं, जिसकी बदौलत बांग्लादेश इस विश्व इवेंट में ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को मात दे चुकी है।

कमजोरीः स्पेशलिस्ट रिस्ट स्पिनर की कमी की वजह से गेंदबाजी खेमा थोड़ा कमजोर। बेहतरीन बल्लेबाजों के बावजूद क्वालिटी गेंदबाजी के सामने अचानक से खराब प्रदर्शन।

 

- इंग्लैंड, इयॉन मॉर्गन (कप्तान)

विश्व की नंबर एक एकदिवसीय टीम तीन फाइनल मैंचों में हार का चक्र तोड़ने के साथ क्रिकेट की जन्मभूमि पर पहली बार खिताब लाने की कोशिश करेगी।

मजबूतीः जो बटलर, जो रूट औऱ बेन स्टोक्स जैसे पावर हिटर सहित दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों से लैस टीम। बेहतरीन तेज गेंदबाजों के साथ मोईन अली और आदिल रशीद जैसे स्पिनरों का साथ।

कमजोरीः जरूरत से अधिक उम्मीद बोझ साबित हो सकता है और उनके कैंपेन को प्रभावित कर सकता है।

 

- अफगानिस्तान, गुलबदीन नैब (कप्तान)

हाल के वर्षों में अपने खेल में बेहतरीन सुधार करने वाली टीम, जो विश्वकप में अंडरडॉग होने के बावजूद उलटफेर करने का माद्दा रखती है।

मजबूतीः स्पिन गेंजबाजी सबसे बड़ी मजबूती। राशिद खान और मोहम्मद नबी जैसे विश्वस्तरीय फिरकी गेंदबाज।

कमजोरीः अफगानिस्तान की चिंता की बड़ी वजह उसकी बल्लेबाजी है। नए कप्तान नैब को अभी खुद को साबित करना है, विश्वकप के लिहाज से यह प्रयोग सही साबित नहीं हो सकता है।

 

 - दक्षिण अफ्रीका, फैफ डु प्लेसी (कप्तान)

दक्षिण अफ्रीका अक्सर जीती हुई मैच भी हार जाती है, जिससे आजतक उसके नाम “चोकर” का तमगा है। इस बार टीम इस दाग को धोने के इरादे से उतरेगी।

मजबूतीः सबसे बेहतरीन गेंदबाजी अटैक। डेल स्टेन और कगीसो रबाडा जैसे तेज गेंदबाज के अलावा इमरान ताहिर जैसे फिरकी गेंदबाज किसी भी बल्लेबाज के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।

कमजोरीः ए.बी. डिविलियर्स जैसे दिग्गज बल्लेबाज की कमी टीम को खल सकती है। इसके अलावा गैर-भरोसेमंद बल्लेबाजी भी टीम को परेशानी में डाल सकती है।

 

 - श्रीलंका, डिमुथ करुणारत्ने (कप्तान)

1996 की विश्वकप विजेता और हाल तक बेहतरीन टीमों में एक, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। नए कप्तान की अगुआई में टीम अपने प्रदर्शन को बेहतर करना चाहेगी। और, लसिथा मलिंगा से भी प्रशंसकों को काफी उम्मीदें होंगी।

मजबूतीः मलिंगा अपने बूते टीम को एक या दो मैचों में जीत दिला सकते हैं, तो युवा फिरकी गेंदबाज अकिला धनंजय भी विरोधी टीम को घुटने टेकने पर मजबूर कर सकते हैं।

कमजोरीः टीम बिलकुल बिखरी-सी नजर आती है। बल्लेबाजी कमजोर है और एंजेलो मैथ्यूज जैसे स्टार खिलाड़ी फॉर्म से जूझ रहे हैं।

 

- वेस्टइंडीज, जैसन होल्डर (कप्तान)

शुरुआती दो विश्वकप की विजेता टीम वेस्टइंडीज अपनी पुरानी चमक की तलाश में है। जैसन होल्डर की अगुआई में टीम को काफी मजबूती मिली है।

मजबूतीः आंद्रे रसेल जैसे शक्तिशाली और तेजतर्रार बल्लेबाज के साथ खतरनाक गेंदबाजी क्रम के साथ वेस्टइंडीज के पास विश्वकप जीतने के सारे हथियार मौजूद हैं।

कमजोरीः टेम्परामेंट बड़ी चुनौती, क्योंकि टीम दबाव में ऐन मौके पर बिखर सकती है।

 

- पाकिस्तान, सरफराज अहमद (कप्तान)

अगर पाकिस्तानी टीम को किसी एक वजह से जाना जाता है, तो वह है उसके प्रदर्शन में अस्थिरता। 1992 विश्वकप की विजेता टीम अगर लय में हो तो वह किसी भी टीम को हरा सकती है। 2017 के चैंपियंस ट्रॉफी में भारत को शिकस्त देकर उसने यह साबित भी किया।

मजबूतीः फखर जमा जैसे टैलेंटेड बल्लेबाज के साथ मध्यक्रम में मजबूत बल्लेबाजी। बेहतरीन तेज गेंदबाज।

कमजोरीः पावर हिटर बल्लेबाज की कमी, जो पूरी इनिंग तक खेल सके। अचानक बिखरने का इतिहास।

 

 

 

 

 

Advertisement
Advertisement
Advertisement