हमारे मन में बसा हमारा पड़ोसी

राजेंद्र धोड़पकर
चुनावी मुद्दे
चुनावी मुद्दे
इलस्च्रेशनः राजेंद्र धोड़पकर

राजेंद्र धोड़पकर
हमारे यहां शास्‍त्रों में कहा गया है कि जब कोई लगातार चिंतन करता है तो वह उसी तरह का हो जाता है। ईश्वर का चिंतन करने वाले और नाम जपने वाले अपना स्वरूप खोकर ईश्वर में लीन हो जाते हैं

हमारे यहां शास्‍त्रों में कहा गया है कि जब कोई लगातार चिंतन करता है तो वह उसी तरह का हो जाता है। ईश्वर का चिंतन करने वाले और नाम जपने वाले अपना स्वरूप खोकर ईश्वर में लीन हो जाते हैं। दुश्मनी में भी अगर कोई किसी के बारे में लगातार सोचता है तो वह वैसा ही हो जाता है। कई राक्षस ईश्वर से ऐसी एकाग्र दुश्मनी पाले रहे कि ईश्वर स्वरूप हो गए। अगर इस जन्म में नहीं हुए तो अपने यहां अगले जन्म का तो पक्का इंतजाम है। शास्‍त्रों में इसके कई उदाहरण हैं। ऋषि जड़भरत की कथा है कि वे अपने प्रिय हिरण का चिंतन करते रहे तो अगले जन्म में हिरण बन गए।

यह शास्‍त्रीय प्रसंग याद आने की वजह आजकल का माहौल है। ऐसा लग रहा है कि हम भारतीयों में पाकिस्तान को लेकर एक धुन सवार है। हम जागते हैं तो पाकिस्तान के नाम पर, सोते हैं तो पाकिस्तान के नाम पर। यहां तक कि आम चुनाव भी पाकिस्तान के मुद्दे पर ही लड़ा जा रहा है। अगर कोई नागरिक कहता है कि हमारे यहां पानी की बड़ी किल्लत है तो नेता कहते हैं, “पाकिस्तान मुर्दाबाद।” अगर कोई कहता है कि नौकरी नहीं है तो नेता कहते हैं, “देशद्रोही हो क्या? देख नहीं रहे हो पाकिस्तान का कितना बड़ा खतरा है।” कोई सरकार की आलोचना करे तो उसे पाकिस्तान का एजेंट कह देते हैं। यहां तक कि कई देशभक्त लोगों की स्थिति यह है कि बीवी अगर कहे कि कल तुम जो आम लाए थे, उनमें से दो खट्टे निकले, तो वे बीवी से कह देते हैं कि ऐसा है तो पाकिस्तान चली जाओ, वहां के आम तुम्हें मीठे लगेंगे। यानी माहौल यह है कि चुनाव भारत में हो रहे हैं, भारत की सरकार चुनने के लिए हो रहे हैं और मुद्दों से भारत गायब है, हर ओर पाकिस्तान-पाकिस्तान का शोर है।

इस प्रक्रिया में हो यह रहा है कि हम पाकिस्तान बनते जा रहे हैं। अगर हम रात-दिन पाकिस्तान का जाप करते रहे तो यही होने वाला है। अगर हम पाकिस्तान की ओर नजर दौड़ाएं तो वह भारत के मुकाबले बहुत ही छोटा मुल्क है, हर नजरिए से, आकार प्रकार से, जनसंख्या के लिहाज से, ताकत के लिहाज से। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की तुलना तो भारत से हो ही नहीं सकती। अब तक तो यह भी लगता था कि दो-चार और नोटबंदी हो जाएं तो भी भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान के स्तर तक नहीं गिर सकती। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान जैसा बनने के सिलसिले में भारत इतना सिकुड़ने की कोशिश कर रहा है कि वह ठीक पाकिस्तान के आकार का हो जाए, हर मामले में।

अब तो भारत में कुछ लोगों का भूगोल का ज्ञान ऐसा हो गया है कि दुनिया में उन्हें दो ही देश नजर आते हैं भारत और पाकिस्तान। उन्हें बताओ कि डोनाल्ड ट्रंप के मुकाबले जो बिडेन के चुनाव लड़ने की उम्मीद है तो वे पूछेंगे कि क्या ये दोनों पाकिस्तानी हैं। वह तो भला हो अक्षय कुमार का कि उसकी वजह से लोगों ने कनाडा का नाम सुन लिया वरना वे तो यही मानते हैं कि चीन भी पाकिस्तान का ही एक प्रांत है। पाकिस्तान के मामले में आजकल हमारे देशभक्तों की हालत ‘पिया-पिया रटते मैं तो’ वाली नायिका जैसी हो गई है। वही धर्मांधता, वही कट्टरता, वही घास-फूस खाएंगे लेकिन हजार साल तक दुश्मन का मुकाबला करेंगे, वाला जज्बा। मरहूम शायरा फहमीदा रियाज ने काफी पहले भारतीयों के लिए ‘तुम तो हम जैसे ही निकले भाई’ नज्म लिखी थी। क्यों हमारे देशभक्त उस नज्म को सही साबित करने में लगे हैं?

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