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किस पर दिल मेहरबान

त्रिकोणीय मुकाबले में आप काम पर तो कांग्रेस सत्ता विरोधी रुझान और भाजपा मोदी फैक्टर के सहारे
पूर्वी दिल्ली से आप उम्मीदवार आतिशी

आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस के बीच गठबंधन की अटकलों के विराम लगने के बाद दिल्ली में चुनावी चौसर की गोटियां साफ हो गई हैं। आप, कांग्रेस और भाजपा तीनों बड़े दल सभी सातों सीटों पर आमने-सामने हैं। काफी सोच-विचार के बाद कांग्रेस ने नई दिल्ली से भाजपा की मीनाक्षी लेखी और आप के ब्रजेश गोयल के खिलाफ अजय माकन, चांदनी चौक से डॉ. हर्षवर्धन के खिलाफ जेपी अग्रवाल, उत्तर-पूर्व दिल्ली से पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, पश्चिमी दिल्ली से महाबल मिश्रा, पूर्वी दिल्ली से अरविंदर सिंह लवली, उत्तर-पश्चिम से राजेश लिलोठिया और दक्षिण दिल्ली से बॉक्सर विजेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है।

हालांकि, आप और कांग्रेस के बीच गठबंधन की कवायद नामांकन के आखिरी दिन तक चली, लेकिन यह परवान नहीं चढ़ पाया। अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के साथ दिल्ली की सात, हरियाणा के 10 और चंडीगढ़ यानी 18 सीटों के लिए गठबंधन करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि दिल्ली की सात सीटों और हरियाणा में गठबंधन के लिए बातचीत तय हो चुकी थी। कांग्रेस और आप के नेता 23 अप्रैल की रात साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सहमत भी हो गए, लेकिन अचानक अगली सुबह कांग्रेस पीछे हट गई। हालांकि कांग्रेस ने आरोप लगाया कि दिल्ली में 4-3 सीट की साझेदारी पर सहमति के बाद उन्होंने अचानक हरियाणा और चंडीगढ़ को भी गठबंधन में जोड़ दिया। ऐसे में गठबंधन का सवाल ही नहीं उठता।

रोड शो के दौरान भाजपा उम्मीदवार गौतम गंबीर

नए हालात में अब त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बिल्कुल साफ हो चुकी है। भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों की सूची देखें, तो दोनों दल सेलेब्रिटी उम्मीदवारों के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की कवायद में हैं, जबकि आम आदमी पार्टी पिछले साढ़े चार साल दिल्ली में किए अपने काम के जरिए नतीजों को भुनाना चाहती है। आप के दिल्ली के संयोजक गोपाल राय कहते हैं, “हमारा मुख्य मुद्दा दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना है।”

हालांकि, सेलेब्रिटी चेहरों को टिकट देने का खामियाजा भी उठाना पड़ सकता है। भाजपा ने पूर्वी दिल्ली से क्रिकेटर गौतम गंभीर और उत्तर-पश्चिम दिल्ली से गायक हंसराज हंस को टिकट दिया है, जिससे मतदाताओं में नाराजगी भी देखी जा रही है। पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के लक्ष्मीनगर में रहने वाले रोशन झा बताते हैं कि गंभीर के लिए यहां मुश्किलें अधिक हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें शक है कि बड़े स्टार स्थानीय लोगों की समस्याओं का हल कर पाएंगे, क्योंकि उनके पास पहुंचना ही बड़ी बात होती है। कांग्रेस ने इस सीट पर अरविंदर सिंह लवली को टिकट दिया है, जो चार बार एमएलए रहने के बावजूद 2015 का चुनाव हार गए थे। उनके सामने आम आदमी पार्टी की आतिशी मैदान में हैं, जिन्हें दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने वाली शख्सियत के रूप में जाना जाता है। लवली को मैदान में उतारने से कांग्रेस से मुस्लिम वोटर के भी छिटकने का खतरा है, क्योंकि उन्होंने भाजपा का दामन थामा था, फिर कांग्रेस में लौटे।

उत्तरी-पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट से आप ने गुगन सिंह को, तो कांग्रेस ने राजेश लिलोठिया को टिकट दिया है। भाजपा ने यहां पंजाब के सूफी गायक हंसराज हंस को उतारा है। उनसे पहले उदित राज भाजपा के टिकट पर इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। यहां के कुतुबगढ़ गांव के जोगिंद्र लांबा ने बताया कि बाहरी उम्मीदवार स्थानीय समस्याओं का हल नहीं कर पाते। वे बताते हैं कि यहां की सड़कें टूटी हैं और कई बार शिकायत के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत उत्तर-पश्चिम लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के मौजूदा सांसद उदित राज ने गांव जौंती को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। गांव के पंडित अनिल शर्मा ने बताया कि यह मात्र घोषणा ही रह गई। उन्होंने बताया कि गांव में पीने के पानी की सबसे ज्यादा दिक्कत है, जिससे लोग उदित राज से नाराज थे। नाराजगी के कारण भाजपा ने उम्मीदवार तो बदला, लेकिन यह उम्मीदवार भी बाहरी ही है।

एक और वीआइपी सीट उत्तर-पूर्वी दिल्ली है, जहां से मशहूर भोजपुरी गायक मनोज तिवारी भाजपा के सांसद हैं। यहां के लोगों का कहना है कि सांसद तक अपनी फरियाद पहुंचाना बहुत मुश्किल है। मुकुंदपुर इलाके में रहने वाले संतोष बताते हैं कि भलस्वा झील के बगल में सड़क निर्माण की कई बार मांग की गई, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिला। यहां अनधिकृत कॉलोनियों का मामला भी काफी बड़ा है। लोगों का कहना है कि इसकी वजह से वे अपनी प्रॉपर्टी पर लोन भी नहीं ले सकते हैं। कांग्रेस की तरफ से यहां पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित मैदान में हैं। संतोष का कहना है कि यहां कांग्रेस को हासिल करने के लिए कुछ नहीं है, क्योंकि जब उसकी सरकार थी, तो उसने कॉलोनियों को रेगुलराइज नहीं किया। आप ने यहां से दिलीप पांडे को टिकट दिया है। जाति गणित भी इस सीट पर अहम साबित हो सकता है। यही वजह है कि तीनों पार्टियों ने यहां से ब्राह्मण चेहरों को उतारा है। इसके अलावा यहां पूर्वांचली वोटर काफी प्रभावी हैं।

दावेदारी कितनी मजबूतः उत्तर-पूर्व दिल्ली से पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी मैदान में

इसी तरह, चांदनी चौक सीट पर तीनों दलों ने जाति समीकरण पर भरोसा जताते हुए बनिया चेहरों को मैदान में उतारा है। यहां व्यापारियों की तादाद अधिक होने की वजह से यह फैक्टर प्रभावी होगा। आप ने पंकज गुप्ता, तो कांग्रेस ने जे.पी. अग्रवाल और भाजपा ने डॉ. हर्षवर्धन को टिकट दिया है। डॉ. हर्षवर्धन यहां से मौजूदा सांसद हैं, लेकिन सीलिंग के मुद्दे को लेकर व्यापारी वर्ग में काफी नाराजगी है। शायद यही वजह है कि 19 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तालकटोरा स्टेडियम में व्यापारी वर्ग को संबोधित किया था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी कहते हैं, “हमने सीलिंग का विरोध किया। लेकिन अरविंद केजरीवाल कहां थे? सीलिंग की साजिश तो केजरीवाल की थी।”

पश्चिमी दिल्ली से कांग्रेस ने महाबल मिश्रा, तो भाजपा ने मौजूदा सांसद प्रवेश वर्मा पर फिर से भरोसा जताया है। आप ने बलबीर सिंह जाखड़ को मैदान में उतारा है। नजफगढ़ के बीटेक के छात्र हितेश गिल ने बताया कि यहां जाम और पीने के पानी की सबसे ज्यादा समस्या है। बाईपास नहीं होने के कारण हमेशा जाम लगा रहता है। मायापुरी में सीलिंग को लेकर हाल में काफी विवाद हुआ था। आम आदमी पार्टी के लोकसभा के उम्मीदवार बलबीर सिंह जाखड़ बताते हैं कि सीलिंग नियम विरुद्ध है, क्योंकि वे प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयां नहीं हैं। बिना नोटिस के उन पर सीलिंग का दस्ता कार्रवाई के लिए आ पहुंचा था।

इसी तरह दक्षिण दिल्ली भी स्टार वॉर वाली सीट बन गई है। रमेश बिधूड़ी यहां से भाजपा के सांसद हैं और फिर मैदान में हैं। आप ने यहां टीवी पर पार्टी के पसंदीदा चेहरे राघव चड्ढा को उतारा है। कांग्रेस ने बॉक्सर विजेंद्र सिंह को मैदान में उतारकर मुकाबला रोचक बना दिया है। पानी और स्वच्छता यहां का मुख्य मुद्दा है। संगम विहार इलाके में रहने वाले भागीरथ श्रीवस बताते हैं कि यहां सड़कों पर नालियों के पानी का बहाव आम बात है। लोगों को पीने का पानी खरीदकर पीना पड़ता है। विजेंद्र सिंह भी दक्षिण दिल्ली में सफाई और पीने के पानी को अहम मुद्दा मानते हैं। भागीरथ कहते हैं कि विजेंद्र सिंह के मैदान में आने से मुकाबला दिलचस्प तो हुआ है, लेकिन असली लड़ाई आप और भाजपा के बीच ही है। 

रुझान किधर

दिल्ली में मध्यम वर्ग, निम्न मध्य वर्ग और झुग्गी-बस्तियों के लोगों को महत्वपूर्ण माना जाता है। 2015 के विधानसभा चुनाव में आप की भारी जीत में निम्न मध्य वर्ग और झुग्गी-बस्तियों के लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है। पिछले कुछ वर्षों में आप की इन पर पकड़ कम हुई हो सकती है, लेकिन क्या इसका फायदा भाजपा या कांग्रेस को होगा, ये तो नतीजे ही तय करेंगे। इसके अलावा चांदनी चौक, पूर्वी दिल्ली और उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में अधिकांश मुसलमान कांग्रेस का समर्थक रहा है। लेकिन पिछले कुछ समय से इसका झुकाव आप की तरफ देखा गया है। इस वोट के लिए आप और कांग्रेस के बीच खींचतान जारी है। भाजपा मध्य वर्ग और मोदी फैक्टर के आसरे हैं।

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