नीतियों में आमूल-चूल बदलाव जरूरी

प्रशांत श्रीवास्तव
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम

प्रशांत श्रीवास्तव
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को तो पूरा यकीन है कि 23 मई के बाद कांग्रेस और गैर-भाजपा दलों की सरकार देश में बनेगी तो बदलेंगी नीतियां। उन्होंने आउटलुक के एसोसिएट एडिटर प्रशांत श्रीवास्तव से ‘न्याय' योजना, किसान बजट और तमाम योजनाओं के बारे में अपनी राय साझा की। मुख्य अंश...

कांग्रेस ने इस बार घोषणा-पत्र में 'न्याय' योजना पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। ऐसी योजना की क्यों जरूरत है?

गरीब परिवारों को न्यूनतम स्तर की आर्थिक सुरक्षा देना देश की जिम्मेदारी है। इस तरह की सुरक्षा मिलने से गरीबों के लिए जीवन सम्मान के साथ जीना संभव हो सकेगा। इसी सोच का परिणाम कांग्रेस द्वारा लाई जाने वाली ‘न्याय’ योजना है।  हमारा पूर्ण विश्वास है कि संपन्नता और कल्याण भरे कदम एक साथ चल सकते हैं।

'न्याय' योजना के वादे पर असमंजस है, क्या यह ठीक तरह से लागू हो पाएगी?

प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने साफ तौर पर कहा है कि न्याय योजना को बेहतर तरीके से डिजाइन कर अगर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए, तो ऐसा करना संभव है। हमने इसके लिए पूरी तैयारी अपने स्तर पर कर ली है। जब योजना पूरी तरह से लागू हो जाएगी, तो उसका लाभ देश के पांच करोड़ परिवारों को मिलेगा। कुल सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले न्याय योजना की लागत एक फीसदी से भी कम होगी। ऐसे में वादे पर असमंजस का कोई सवाल नहीं उठता है।

बीस फीसदी गरीब परिवारों की पहचान कैसे होगी, क्या योजना पर खर्च अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर डालेगा?

जहां तक गरीब परिवारों के पहचान की बात है तो इसके लिए पर्याप्त आंकड़े मौजूद हैं। खुद भारतीय जनता पार्टी दावा करती रही है, कि उसने आयुष्मान भारत योजना के लिए 10 करोड़ परिवारों की पहचान की है। इसके अलावा राज्य सरकार, बीमा सहित दूसरे आंकड़े मौजूद हैं। इन सबसे ऊपर सामाजिक आर्थिक और जाति के आधार पर हुई जनगणना के आंकड़े मौजूद हैं, जो कि गरीब परिवारों की पहचान के लिए पर्याप्त हैं। ऐसे में परिवारों की पहचान को लेकर कोई समस्या नहीं है। जहां तक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर की बात है तो यह बेमानी है।

घोषणा-पत्र से साफ तौर पर लगता है कि कांग्रेस पार्टी अपनी आर्थिक नीति की पुरानी लाइन को तोड़ रही है, इसकी क्या वजह है?

पार्टी की आर्थिक नीति को लेकर सोच में कोई आमूल-चूल बदलाव नहीं आया है। कोई भी नीति समय के साथ परिपक्व होकर बेहतर बनती है।  हमारा मानना है कि लोगों की आकांक्षाओं और मांग में समय के साथ बदलाव आता रहता है और उस पर खरा उतरना पार्टी का काम है। इस काम को करने के लिए हमारे पास पूरा अनुभव रहा है। पहले की यूपीए सरकारों के काम-काज से आप समझ सकते हैं कि ऐसा करने के लिए हमारे पास पूरी क्षमता भी है।

घोषणा-पत्र में अलग से किसान बजट की बात की गई है, इसे लाने का मकसद क्या है?

किसान बजट में कृषि से जुड़ी चीजों का उल्लेख किया जाएगा। इसके तहत योजनाओं की जानकारी, उन पर होने वाले खर्च, आवंटन और उसके परिणाम का उल्लेख किया जाएगा। किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं और दूसरी सुविधाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, साथ ही किसानों की मुश्किलें भी कम होंगी।

जब आप गृहमंत्री थे, तो आपने कहा था कि सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून की समीक्षा होगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया था। अब फिर कहा जा रहा है, क्या इस बार संभव हो पाएगा?

अब ऐसा करना इसलिए संभव होगा, क्योंकि आज के दौर में मानव अधिकारों को लेकर चेतना का स्तर कहीं ज्यादा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी मणिपुर में उत्पन्न घटनाओं के संबंध में भी एक फैसला दिया है। इसके अलावा खुद भारतीय जनता पार्टी सरकार ने त्रिपुरा, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों से सशस्‍त्र सेना विशेषाधिकार कानून हटा दिया है। अगर वह इसका विरोध करते हैं तो उन्होंने फिर उसे क्यों हटाया? जाहिर है, उनके पास इसका कोई जवाब नही है। हमने सशस्‍त्र सेना विशेषाधिकार कानून में प्रमुख रूप से जबरन गुमशुदा, यौन हिंसा और उत्पीड़न संबंधित मामले में नागिरकों के हितों की रक्षा के लिए बदलाव का प्रस्ताव किया है। ऐसे में इन प्रस्तावों का कौन विरोध कर सकता है?

राजद्रोह संबंधी कानून में बदलाव की बात कही गई है, भाजपा इस ऐलान का लगातार विरोध कर रही है?

राजद्रोह से संबंधित भारतीय दंड संहिता में धारा 124ए को हटाया जाएगा। राजद्रोह से संबंधित मामलों से निपटने के लिए दूसरे कई कानून हैं। भारतीय सुरक्षा अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम में पर्याप्त प्रावधान हैं, जो भारत की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रख सकते हैं।

कांग्रेस ने कहा है कि वह आरबीआइ, सीबीआइ, ईडी जैसी संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्ता में सरकार के हस्तक्षेप को रोकेगी। इसके लिए क्या बदलाव किए जा सकते हैं?

आरबीआइ, सीबीआइ, ईडी सहित दूसरे संवैधानिक संस्थानों का दुरुपयोग हुआ है। स्वायत्तता को कमजोर कर उसे लूटा गया है। हम उनकी स्वायत्ता बहाली के लिए लोकतंत्र में मौजूद तरीकों का इस्तेमाल करेंगे। इसके तहत संसदीय समिति की सलाह के आधार पर कानूनी मजबूती दी जाएगी।

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