विज्ञापन सितारे: इश्तेहारी चेहरे

अर्शिया धर
एयरटेल की साशा छेत्री
एयरटेल की साशा छेत्री
अपूर्व सलकड़े

अर्शिया धर
कुछ चेहरों ने हजारों उत्पादों में दिलचस्पी जगाई, उनमें आज कुछ जाने-पहचाने हैं, तो कुछ पुराने विज्ञापनों के जादू से ही हैं चमकदार

हममें से ज्यादातर लोगों का दिन एक कप गरम चाय और अखबार के साथ शुरू होता है। कुछ की सुबह टीवी खबरों के साथ खिलती है तो 'मिलेनियम' पीढ़ी की सुबह सोशल मीडिया अपडेट के बिना अधूरी होती है। लेकिन ताजा खबरों के साथ कुछ चेहरे भी नमूदार हो जाते हैं, जिनकी मुस्कान से आंखें चुराना मुश्किल होता है। कुछ नए, कुछ लकदक पोशाक में, तो कुछ ऊब पैदा करने वाली घिसी-पिटी अदा से आपको किसी टेलीकॉम कंपनी का नंबर लेने, डिओ खरीदने, या होटल बुक करने के लिए खास ऐप का उपयोग करने को लुभाते हैं। इन चेहरों में ज्यादातर नामी अभिनेता, खिलाड़ी या टीवी स्टार नहीं हैं। फिर भी ये टीवी विज्ञापनों से लेकर यूट्यूब और हर नुक्कड़-चौराहे पर टंगे बड़े-बड़े होर्डिंग तक में हर पल आपका पीछा करते हैं। जैसे, फिल्म द ग्रेट गैट्सबी में वेस्ट एग से लेकर मैनहट्टन की सड़क पर बिलबोर्ड से झांकतीं डॉ. एकलेबर्ग की बाहर-सी निकलीं निगाहों से आंख चुराना नामुमकिन-सा होता है। उनमें आपके दिमाग में गड़ जाने की गजब की कला है। इनमें कई सेलेब्रिटी हो गए हैं। जो लोग हर मौके-बेमौके इन चेहरों को देख कई बार खीज जाते हैं, अक्सर वे भी वायरल विज्ञापनों के झांसे में आ जाते हैं।

साशा छेत्री को ही लीजिए, जिन्हें लोग ‘एयरटेल 4जी गर्ल’ के रूप में ज्यादा अच्छी तरह जानते हैं। यह ऐसा चेहरा है जिसने पिछले चार साल में भारतीय विज्ञापनों में अलग जगह बनाई है। मुंबई की एक प्रोडक्शन कंपनी में ब्रांड स्ट्रेटेजिस्ट रही छेत्री का जीवन रातोरात नाटकीय रूप से बदल गया। देहरादून की इस 26 साल की लड़की, जिसका चेहरा एयरटेल4जी के हजारों विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल किया गया, उसे यह सब किसी “परीकथा” की तरह लगता है। साशा कहती हैं, “एयरटेल से पहले मेरा जीवन सामान्य था। मैंने कई एजेंसियों, प्रोडक्शन हाउसेज के लिए काम किया और सप्ताहांत पर संगीतकार के रूप में काम करती थी।” फिर एक दिन उनकी दोस्त ने उन्हें एयरटेल के ऑडिशन के बारे में बताया और इस विज्ञापन ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। शुरुआत में सेट पर साशा खुद को असहज महसूस करती थीं। लेकिन अब साशा न सिर्फ एक्टिंग में, बल्कि संगीत में भी पूरी तरह अपना करिअर बनाना चाहती हैं। वह हंसकर कहती हैं, “मैं फिलहाल तेलुगु फिल्म की शूटिंग कर रही हूं और अपने संगीत पर भी काम कर रही हूं। मुझे तो यकीन ही नहीं होता।” लेकिन परीकथा में दुश्वारियां भी आती हैं। सोशल मीडिया में दिखने पर ट्रोलिंग का खतरा साथ चला आता है और ‘एयरटेल गर्ल’ भी इसका हिस्सा रही। साशा कहती हैं, “कुछ दर्शक मेरे खुशमिजाज व्यक्तित्व से जुड़ते हैं तो कुछ खुद को अलग भी कर लेते हैं। वे पूछते हैं, “ये है कौन?” “ये इतनी खुश क्यों है?” लेकिन वह सिर्फ एक भूमिका है जो मैंने निभाई। मैं इस प्रतिक्रिया को समझती हूं, क्योंकि मुझे ही बार-बार खुद को देखना पड़े तो मुझे भी गुस्सा ही आएगा। वह नई पीढ़ी को ज्यादा पहचान की भावनात्मक कीमत चुकाने के लिए भी चेताती हैं। वह कहती हैं, “ऐसे भी दिन थे जब मैं बाहर नहीं जाती थी, क्योंकि मैं डरती थी कि लोग मुझे पहचान जाएंगे। मुझे अपना लुक बदलना पड़ा। कहीं कोई राहत नहीं थी, क्योंकि मैं हर जगह थी।”

5-स्टार जोड़ी राणा प्रताप सेंगर (बाएं) और गगन दुग्गल

1970 के दशक में भारतीय विज्ञापन के अपने जलवे थे। एलिक पद्मसी ने लिरिल साबुन का विज्ञापन लॉन्च किया, जिसमें ‘लिरिल गर्ल’ करेन लिनेल ने काम किया। हरे रंग का स्विम सूट पहने, कांच से पारदर्शी झरने के नीचे किल्लोल करती, मुस्कराती करेन को ‘मेल फेंटेसी’ का सटीक उदाहरण कहा जा सकता था। लेकिन यह विज्ञापन इसके विपरीत था। कहा जाता है कि यह विज्ञापन महिलाएं वास्तव में क्या चाहती हैं यह उसका प्रतिबिंब था। शॉवर के नीचे वे दुनिया के बेकार के कामों को भूल कर सिर्फ आनंद लेना चाहती हैं। अब न्यूजीलैंड में स्कूल टीचर लिनेल ने आउटलुक से कहा, “मुझे हमेशा सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलीं। उस उत्पाद का चेहरा बनने का मैंने हमेशा आनंद उठाया। वह विज्ञापन अपने समय से काफी आगे था।” लिरिल के विज्ञापन ने 20 साल की लिनेल को स्टारडम दिया और उन्हें भारत का सबसे ज्यादा पहचाना चेहरा बना दिया। एयर इंडिया में एयर-होस्टेस के रूप में शामिल होने से पहले, लिनेल ने 1975 से 1983 तक नियमित रूप से विज्ञापनों के लिए शूटिंग जारी रखी। भारतीय विज्ञापनों की पहली ‘वायरल’ चेहरे वाली यह पूर्व मॉडल कहती हैं, “यह निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण काम था, बेवक्त उठना, जमा देने वाली ठंड में गीले स्विमसूट में कोडाइकनाल और खंडाला में शूटिंग करना और बीच-बीच में कंबल में खुद को लपेटना। हम इसे सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए दृढ़ थे। जब तक यह चला मुझे बहुत मजा आया।”

ट्रिवागो गाॅय’ अभिनव कुमार

विख्यात एडमैन विलियम बर्नबैक कहते हैं, “आपके द्वारा चलाए जाने वाले विज्ञापनों की संख्या को कोई नहीं गिनता, वे सिर्फ आपके द्वारा छोड़ी गई छाप याद रखते हैं।” लेकिन हाई-स्पीड इंटरनेट के युग में, एक से अधिक माध्यमों से इसका पता चलता है। इंटरनेट के कारण एक अपरिचित व्यक्ति के भी प्रसिद्ध हो जाने के मौके बढ़ जाते हैं। इंटरनेट पर बार-बार दिखने पर लोगों को आश्चर्य होता है कि ये कौन हैं और इतनी बार क्यों दिख रहे हैं। ट्रिवैगो के अभिनव कुमार इसकी बहुत अच्छी तरह व्याख्या करते हैं। बिहार के रहने वाले हंसोड़ ‘ट्रिवैगो गाय’ कहते हैं, “मैं पांच साल तक भारतीय बाजार के लिए ट्रिवैगो का कंट्री डेवलपर था। पिछले साल हम लोग अपने विज्ञापन के लिए अभिनेता खोज रहे थे। ब्रांड मार्केटिंग के प्रमुख ने सुझाव दिया कि मैं ही इसे कर लूं।” फिलहाल, जर्मनी के डसेलडोर्फ में रहने वाले कुमार को अलग-अलग तरीकों से ट्रोल करने और उन पर बनने वाले ढेरों मीम के कारण याद किया जाता है। सोशल-मीडिया में उनके बारे में पूछा जाता है, “ब्रांड ने एक अनजान चेहरा क्यों चुना।” लेकिन यही सब ट्रिवैगो के लिए फायदे का सौदा है। कुमार कहते हैं, “लोगों को इस पर चर्चा करते हुए देखना अच्छा लगता है।” निश्चित रूप से, ट्रिवैगो का विज्ञापन कर रहा लड़का अतिरिक्त सेवाओं के बारे में शिकायत नहीं कर रहा है जो उसने भारतीय होटलों में ‘ट्रिवैगो गाय’ होने के कारण पेश की हैं।

मुश्किल से मुस्कराने वाली, सफेद साड़ी और लाल बड़ी बिंदी वाली सौम्य ललिता जी आपको बचत के लिए सर्फ खरीदने की सलाह देती हैं। वहीं, महाशय जी एमडीएच मसाले बेचते हैं। अतीतानुरागी भारतीय दिल इन शानदार विज्ञापनों के लिए धड़कता है। ओनिडा टेलीविजन के लिए दो सींग वाले शैतान बनने वाले डेविड व्हिटब्रेड कहते हैं, “20 साल बाद भी मेरा परिचय ओनिडा मॉडल के रूप में कराया जाता है।” 1985 से 1999 तक व्हिटब्रेड शैतान के रूप में छाए रहे जिसने भारतीयों को अपने सम्मोहन में बांधे रखा। साठ के होने जा रहे व्हिटब्रेड फिलहाल कुन्नूर में फ्रीलांस स्टाइलिस्ट और मॉडल कोरियोग्राफर हैं।

जब वे मुंबई में मॉडल कोऑर्डिनेटर थे तो उनके आर्ट डायरेक्टर गोपी कुकडे ने उनसे टेलीविजन पर शैतान बनने के लिए संपर्क किया। नामी स्टाइलिस्ट व्हिटब्रेड कहते हैं, “मैंने मना कर दिया और उन्हें एक मॉडल खोजने की पेशकश की। मुझे समझाने में उन्हें कुछ महीने लगे। मैं कैमरे के सामने रहना पसंद नहीं करता था। लेकिन एक बार जब शूट शुरू हुआ तो मुझे लगा शैतान को कौन सा ग्राहक पसंद करेगा! आखिर उत्पाद बेचना सुंदर लड़कों और लड़कियों का काम था। शैतान बनने के एवज में उन्हें उस वक्त 7,000 रुपये मिले थे। डेढ़ महीने बाद उन्होंने शैतान रूपी खुद को एक अंग्रेजी दैनिक के अंतिम पृष्ठ पर फिर से देखा। व्हिटब्रेड याद करते हैं, “मुझे लगा कि कोई मुझे पहचान नहीं पाएगा... इस बारे में मैंने कभी किसी को नहीं बताया था। लेकिन प्रेस ने मुझे खोज लिया था। मुझे ऑटोग्राफ देने के लिए कहा जाने लगा। लोग रेस्तरां में मेरी तरफ इशारा करने लगे। शर्मीला होने के कारण मैंने उन पलों का बहुत आनंद नहीं लिया। लेकिन जो भी था वह बहुत अच्छा था। व्हिटब्रेड के शैतान जैसे चरित्र एक पीढ़ी की घटना हैं। दर्शकों को ऐसे विज्ञापन मिलते हैं जो एक युग को परिभाषित करते हैं। ये विज्ञापन समय की कसौटी पर खड़े होते हैं। 2006 की शुरुआत में कैडबरी 5-स्टार चॉकलेट के जुड़वां, रमेश और सुरेश ने ओगिल्वी और माथर एजेंसी के साथ 250 से अधिक विज्ञापनों के बाद भी भारत में टीवी पर आज तक अपना कब्जा जारी रखा है। कैडबरी अब जाना-पहचाना चॉकलेट ब्रांड है। सुरेश उर्फ गगन दुग्गल कहते हैं,

“मैं लेखन और निर्देशन में हूं। मैं सिर्फ 5-स्टार विज्ञापन करना जारी रखना चाहता हूं और दुनिया की यात्रा करता रहता हूं। लोग दुग्गल और उनके साथी को अक्सर जुड़वां मान लेने की भूल कर लेते हैं। दुग्गल और उनके साथी रमेश उर्फ राणा प्रताप सेंगर के पास नासमझ, मूर्ख, भुलक्कड़ और लगभग अपने आप में खोए हुए लड़कों के रूप खूबसूरत यादें हैं। दुग्गल हंसते हुए बताते हैं, “हम 5-स्टार के एक विज्ञापन के सिलसिले में रोमानिया जा रहे थे। दोहा में हमें थोड़ी देर रुकना था। वहां एयरपोर्ट पर एक व्यक्ति ने हमसे पूछा कि हम कहां के हैं और यहां किसलिए आए हैं। जैसे ही हमने 5-स्टार कहा वह तुरंत हमें पहचान गया। इसके बाद तो एयरपोर्ट पर दूसरा स्टाफ भी हमारे पास फोटो खिंचवाने आया और एयरक्राफ्ट तक जाने के लिए अलग से जीप का इंतजाम किया। 2016 में अभय देओल-डायना पेंटी अभिनीत फिल्म हैप्पी भाग जाएगी में नजर आने वाले सेंगर का, इस विज्ञापन के शुरू होते ही जीवन बदल गया। ऑडिशन में दो बार खारिज किए जाने के बाद भी सेंगर तीसरी बार गए। इस बार उन्होंने अलग कपड़े पहने और दो बार खारिज किए गए उम्मीदवार के भाई होने का नाटक किया और वे चुन लिए गए। सेंगर कहते हैं, “मैंने बच्चों को दुकानदार से, “रमेश-सुरेश वाला चॉकलेट” कहते सुना है। इस जोड़ी को हॉलीवुड कॉमेडी डंब एेंड डंबर के हिंदी रीमेक की पेशकश की गई थी लेकिन किसी कारण यह प्रोजेक्ट असफल रहा।

) एमडीएच के महाशय धरमलाल गुलाटी

वास्तव में किसी विज्ञापन अभियान की सफलता का अनुमान लगाना लगभग असंभव है। लेकिन ‘जनरेशन-जेड’ के लिए किसी भी चीज का अंतिम परीक्षण उसका ‘वायरल’ होना है यानी यह ‘मीम बनने के काबिल है या नहीं’ या फिर वे वाइल्ड स्टोन डियोडरंट विज्ञापन के अमोल पाराशर उर्फ ‘कुणाल’ पर भरोसा करते हैं। पाराशर कहते हैं, “हम अब ऐसे समय में नहीं रह रहे हैं जब किसी उत्पाद को बेचने के लिए केवल पारंपरिक फिल्मी नायक या नायिका की आवश्यकता होती है। ‘गुड-लुकिंग’ की परिभाषा भी बदल रही है। यदि आप जुड़ाव महसूस करा सकते हैं तो लोग आपको पसंद करने लगेंगे। लोग कुणाल को लेकर हर तरह की मीम बनाने लगे हैं। राजनैतिक से लेकर एवेंजर तक। वह लड़का हर कहीं है!” आइआइटी ग्रेजुएट इस लड़के के पास एक सफल वेब सीरीज भी है। अमोल बताते हैं, “2016 में वाइल्ड स्टोन के विज्ञापन से छह महीने पहले वायरल फीवर का ट्रिपलिंग आया था। मुझे लगता है वहां से माहौल बनना शुरू हुआ। निश्चित तौर से इसने मेरे लिए नए दरवाजे खोले।”

डेविड व्हिटब्रेड ओनिडा विज्ञापन में

जबकि राजेश खेरा (जिन्होंने ओनिडा के लिए व्हिटब्रेड की जगह ली थी) टाइपकास्ट होने और कई अन्य ऑफर न मिलने पर बाहर हो गए। उन्हें लगता था, “लोगों को केवल शैतान की याद दिलाने से ऐसा हुआ।” जबकि 90 के दशक में धारा के विज्ञापन वाले छोटे लड़के परजान ने कई फिल्मों और टीवी शो में अभिनय किया। कुछ कुछ होता है (1998) में अविस्मरणीय सरदार बच्चे की भूमिका निभाने वाले परजान दस्तूर बताते हैं, “उस विज्ञापन की बहुत हल्की यादें हैं। तब मैं चार साल का था। मुझे याद है कि मैं स्कूल से सीधे सेट पर पहुंचता था और भूखा होता था। वो लोग खाने को मुझे जलेबी देते थे। जलेबी मुझे बहुत पसंद थी। तो उस विज्ञापन में जलेबी पर जो प्रतिक्रिया है वो असली है।” लेकिन यह ‘जलेबी बॉय’ उसी लोकप्रियता में अटका रह गया। दस्तूर कहते हैं, “लोग अभी भी मुझे उसी विज्ञापन के लिए याद करते हैं। वे भले ही अक्सर तेल के ब्रांड के बारे में असमंजस में रहें लेकिन उस लड़के को नहीं भूलते जो बारीक आवाज में कहता था, ‘जलेबी।’ दुनिया हर अगली मीम के लिए अगले वायरल चेहरे को निचोड़ लेने की तलाश में रहती है। उदासीनता की मादक, पुरानी यादें कभी भी लोगों को नहीं रोकतीं। हमारी यादों में अमिट स्याही से खींचे गए उन सभी पात्रों के लिए जिनमें कुछ की धुंधली यादे हैं, कुछ की आश्चर्यजनक रूप से हर बात याद है। ये सभी दूरदर्शन की पुरानी धुन और धुंधले दिनों की यादें हैं, जो हमें याद दिलाती हैं कि वह समय चला गया।

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