चौधराहट की मुश्किल लड़ाई

चंडीगढ़ से हरीश मानव
मुश्किल डगरः बल्लभगढ़ में रोड शो के दौरान मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर
मुश्किल डगरः बल्लभगढ़ में रोड शो के दौरान मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर
मनोज कुमार

चंडीगढ़ से हरीश मानव
जेजेपी, एलएसपी, आप जैसे दलों के प्रदर्शन से तय होगी भाजपा, कांग्रेस और इनेलो के मुकाबले की तस्वीर

हरियाणा लोकसभा में केवल दस सांसद भेजता है। लेकिन, बीते चुनावों के नतीजे बताते हैं कि यह राज्य जिस करवट बैठता है, केंद्र में सरकार उसकी ही बनती है। इतना ही नहीं, लोकसभा चुनाव के नतीजे यह भी बता जाते हैं कि राज्य में अगली सरकार किसकी होगी। 2014 में राज्य की 10 लोकसभा सीटों में से सात पर भाजपा जीती और कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव में 90 में से 46 सीटें जीती थीं। उससे पहले 2009 और 2004 में बाजी कांग्रेस तथा 1999 में एनडीए के हाथ लगी थी। लेकिन, इस बार न तो बीते चुनाव की तरह मोदी लहर है और न ही एयरस्ट्राइक के नाम पर मतदाताओं को गोलबंद करने की भाजपाई रणनीति काम करती नजर आ रही है। कांग्रेस गुटबंदी को खत्म करके सभी को एकजुट करने में जुट गई है। पार्टी आलाकमान ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में समन्वय समिति बनाई है। इस समिति में प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर, राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला, किरण चौधरी और कुमारी शैलजा को भी शामिल किया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री देवीलाल के परिवार में मची कलह ने इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की भी जमीन कमजोर कर रखी है।

रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्‍त्र के प्राध्यापक रहे हरभाग सिंह छिक्कारा की मानें तो भाजपा की रणनीति गैर-जाट मतदाताओं को गोलबंद करने पर टिकी है। राज्य में 25 फीसदी जाट और 75 फीसदी गैर-जाट मतदाता हैं। गैर जाटों में 24 फीसदी अन्य पिछड़े वर्ग, 30 फीसदी ब्राह्मण, बनिया, पंजाबी और 21 फीसदी दलित हैं। चुनाव के लिए प्रत्याशी इसी को ध्यान में रखकर तय किए जा रहे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला का कहना है कि सामाजिक संतुलन का खयाल रखकर उम्मीदवार तय किए जाएंगे। अटकलें हैं कि आठ सीटों पर पार्टी गैर-जाट चेहरे को मौका दे सकती है। मौजूदा सांसदों में से केवल फरीदाबाद से कृष्णपाल गुर्जर और गुड़गांव से राव इंद्रजीत सिंह की उम्मीदवारी पक्की बताई जा रही है। करनाल से केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और सोनीपत से पहलवान योगेश्वर दत्त को मैदान में उतारने की चर्चा है। हिसार और रोहतक में पार्टी जाट चेहरों पर दांव लगा सकती है। केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह अपनी जगह हिसार से अपने आइएएस बेटे बिजेंद्र के लिए टिकट चाहते हैं। लेकिन, आलाकमान उन्हें रोहतक में दीपेंद्र हुड्डा के खिलाफ उतारना चाहता है। हिसार से राज्य के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को मौका मिलने की चर्चाएं हैं।

गुटबाजी में फंसी कांग्रेस के पास किसान कर्जमाफी के अलावा प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरने का कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। हालांकि किसानों के मसले भाजपा को परेशान कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा लोकसभा और विधानसभा चुनाव में जीत मिलने पर छह घंटे के भीतर किसान कर्जमाफी का वादा कर रहे हैं। पार्टी चुनाव में सोनीपत से पूर्व मुख्यमंत्री, रोहतक से सांसद दीपेंद्र हुड्डा, सिरसा से अशोक तंवर, हिसार से कुलदीप बिश्नोई, कुरुक्षेत्र से नवीन जिंदल, फरीदाबाद से अवतार सिंह भड़ाना, गुड़गांव से राव दान सिंह, अंबाला से कुमारी शैलजा, भिवानी-महेंद्रगढ़ से किरण चौधरी की बेटी पूर्व सांसद श्रुति चौधरी को उतार सकती है। करनाल से पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे हैं। 

बसपा से गठबंधन टूटने से इनेलो को तगड़ा झटका लगा है। पार्टी के दो विधायक समेत कई नेता और कार्यकर्ता जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) में शामिल हो गए हैं। इनेलो के समक्ष मजबूत उम्मीदवारों का संकट हो गया है। हिसार में इनेलो के राष्ट्रीय महासचिव एवं विधानसभा में विपक्ष के नेता अभय चौटाला भतीजे दुष्यंत चौटाला को चुनौती दे सकते हैं।

इनेलो से अलग होकर बनी जेजेपी और भाजपा से बगावत कर अपनी पार्टी बनाने वाले सांसद राजकुमार सैनी की लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी (एलएसपी) भी खम ठोंक रही है। बसपा के साथ आने से एलएसपी को नई ताकत मिली है, तो आप कांग्रेस या जेजेपी से गठबंधन की कोशिश में है। ये दल भले चमत्कार न कर पाएं लेकिन नतीजों पर इनकी छाप तय है।

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