“खुला है किसानों को मदद बढ़ाने का विकल्प”

प्रशांत श्रीवास्तव
केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह
केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह

प्रशांत श्रीवास्तव
केंद्र सरकार किसानों के मोर्चे पर अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और यही वजह है कि हाल में पेश 2019-20 के बजट में किसानों को सालाना 6000 रुपये की आर्थिक सहायता घोषित की गई। इसकी 2000 रुपये की पहली किस्त चालू वित्त वर्ष में ही करीब 12.5 करोड़ किसानों के खाते में जमा हो सके इसके लिए मजबूत रणनीति बनाई गई। साथ ही इस मदद में बढ़ोतरी का विकल्प भी सरकार ने खुला रखा है। इस फैसले के साथ ही बजट में किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाने और कर्ज के पुनर्गठन की स्थिति में भी ब्याज छूट का प्रावधान कर दिया गया है। इन कदमों के साथ ही कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए सरकार के फैसलों और बजटीय प्रावधानों पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह के साथ आउटलुक के एसोसिएट एडिटर प्रशांत श्रीवास्तव ने लंबी बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंशः

क्या आपको प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 500 रुपये की मासिक सहायता राशि बहुत कम नहीं लगती है?

किसान जानते हैं कि यह सहायता उनके लिए कितनी महत्वपूर्ण और उपयोगी है। शहरों में एयरकंडीशंड कमरों में बैठने वाले इसे नहीं समझ सकते। यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए है। ऐसे में 6000 रुपये का फायदा हर उस किसान को मिलेगा जिसके पास पांच एकड़ तक जमीन है। अगर किसी किसान के पास आधा एकड़ भी जमीन है तो उसे भी 6000 रुपये मिलेंगे। किसी भी तरह का कोई भेदभाव नहीं है। आलोचकों को जमीनी सच्चाई का पता होना चाहिए। यह पूरी तरह से किसानों के लिए सालाना सहायता के रूप में है। जिसे हर चार महीने में 2000 रुपये की तीन किस्तों में वितरित किया जाएगा। आर्थिक सहायता की यह पहल किसानों को साहूकारों के चंगुल में फंसने से बचाएगी। साथ ही उनकी कृषि गतिविधियों को जारी रखने में भी मदद मिलेगी।

क्या भविष्य में सहायता राशि बढ़ाई जा सकती है?

जब सरकार के पास संसाधन बढ़ेंगे तो निश्चित रूप से आर्थिक सहायता राशि बढ़ाई जाएगी। आपके पास तेलंगाना का उदाहरण है, जिन्होंने पिछले साल इसकी शुरुआत की थी। ओडिशा सरकार भी ऐसा कर रही है। अंतरिम बजट के एक दिन बाद झारखंड सरकार ने भी ऐसी योजना शुरू करने का ऐलान किया है। झारखंड सरकार, केंद्र की 6000 रुपये की सहायता राशि के अलावा इतनी ही राशि आर्थिक सहायता के रूप में अपने राज्य के छोटे किसानों के लिए देगी। कुल मिलाकर जैसे-जैसे संसाधन बढ़ेंगे, राशि भी बढ़ेगी। लेकिन एक बात देखिए, यूपीए सरकार ने दस साल में 52 हजार करोड़ रुपये के किसानों के कर्ज माफ किए थे। लेकिन इस हमारी सरकार द्वारा लागू की जा रही आर्थिक सहायता एक साल में ही 75 हजार करोड़ रुपये होगी। जो दस साल में 7.5 लाख करोड़ रुपये रहेगी। ऐसे में आप खुद अनुमान लगा सकते हैं कि सही रूप में कौन किसानों को अधिक फायदा पहुंचाना चाहता है।

योजना कब लॉन्च होगी और इसके लिए पात्र किसानों का डाटा तैयार करने के लिए क्या तैयारी है? साथ ही दुरुपयोग को कैसे रोकेंगे?

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को 24 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से लॉन्च करेंगे। हमें उम्मीद है, बहुत जल्द ही हमारे पास पांच एकड़ तक की जोत वाले किसानों का पूरा डाटा उपलब्ध होगा। सभी आंकड़ों को सत्यापित करने के बाद उन्हें कृषि मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा। पहली किस्त के रूप में 2000 रुपये की राशि निश्चित तौर पर 31 मार्च 2019 तक लाभार्थियों के खाते में स्थानांतरित कर दी जाएगी।  जहां तक दुरुपयोग रोकने की बात है तो पैसा सीधे किसानों के बैंक खाते में जाएगा। इसमें कोई बिचौलिया नहीं होगा। साथ ही राज्यों के साथ मिलकर पूरे डाटा को सत्यापित किया जाएगा। ऐसे में दुरुपयोग की आशंका नहीं रहेगी।

अभी भी देश के सात करोड़ किसानों के पास क्रेडिट कार्ड नहीं है, ऐसे में बड़े पैमाने पर किसान ब्याज छूट का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं?

ऐसे किसान जिनके पास किसान क्रेडिट कार्ड नहीं है, उनके लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके तहत एक सरलीकृत आवेदन पत्र लाया गया है। इसके अलावा राज्यों से भी कहा गया है कि वह किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए गांव और बैंक के आधार पर शिविर लगाएं, जिससे तेजी से किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जा सकें। साथ ही इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने सभी बैंकों को एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें किसान क्रेडिट कार्ड के लिए तीन लाख रुपये तक कर्ज पर ली जाने वाली प्रोसेसिंग फीस, डॉक्युमेंटेशन, जांच और लेजर फोलियो चार्ज खत्म करने की बात कही गई है। साथ ही सर्विस चार्ज भी बैंकों द्वारा नहीं लिए जाने का सुझाव दिया गया है।

ऐसी आशंका जताई जा रही है कि सरकार सीधे नकद देने की स्कीम के बाद दूसरी सब्सिडी खत्म कर देगी?

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का उद्देश्य किसानों को उसकी खेती की जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता देना है। इसका उद्देश्य पहले से दी जा रही सब्सिडी वाली योजनाओं में बदलाव करना नहीं है। ऐसे में एक बात मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मौजूदा योजनाओं के तहत किसानों को मिलने वाली सब्सिडी जारी रहेगी। अगर इस तरह की सब्सिडी रोक दी जाती है तो देश में अराजकता फैल जाएगी।

अंतरिम बजट में पशुपालन और मत्‍स्य पालन करने वाले किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम शुरू की है, इसका उन्हें कैसे फायदा मिलेगा?

पशुपालन और मत्‍स्य पालन करने वाले किसान भी अब किसान क्रेडिट कार्ड ले सकेंगे। साथ ही उन्हें भी ब्याज में छूट का फायदा मिलेगा। यानी तीन लाख रुपये तक के कर्ज पर उन्हें दो फीसदी ब्याज छूट के साथ ही समय पर कर्ज चुकाने पर तीन फीसदी की अतिरिक्त ब्याज छूट का भी फायदा मिलेगा। ऐसे में इन किसानों को भी चार फीसदी के ब्याज पर कर्ज मिल सकेगा।

आपदा के समय किसानों को ब्याज छूट का प्रावधान अंतरिम बजट में किया गया है, यह किस तरह लागू होगा?

किसी प्राकृतिक आपदा से अगर किसान की फसल प्रभावित होती है, तो कर्ज के पुनर्गठन के समय उसे पूरी अवधि के लिए दो फीसदी की ब्याज छूट मिलेगी। साथ ही अगर पुनर्गठन के बाद तय अवधि पर किसान समय से कर्ज चुकाता है तो उसे तीन फीसदी ब्याज छूट अलग से मिलेगी। अभी ऐसी सुविधा नहीं थी। इस कदम से आपदा के समय किसानों को बड़ी राहत मिल जाएगी।

कैश ट्रांसफर से लेकर सस्ते कर्ज का ऐलान अंतरिम बजट में किया गया है, आपको लगता है कि इसका चुनावी फायदा मिलेगा?

देखिए, यह आरोप सरकार में आने के बाद से ही हम सुन रहे हैं। हमारी सरकार ने पिछले पांच साल से लगातार किसानों के लिए काम किया है। हमने वादा किया है कि किसानों की इनकम 2022 तक दोगुना करेंगे। हम उसी दिशा में काम कर रहे हैं। इसके लिए उत्पादन के बजाय आय बढ़ाने पर फोकस किया गया है और उसी के अनुरूप योजनाओं में बदलाव किया गया है और नई योजनाएं लागू की गई हैं। केवल फसलों पर फोकस की पुरानी नीतियों की जगह खेती से जुड़े दूसरे व्यवसाय जैसे डेयरी, बी कीपिंग, मत्‍स्य पालन और बांस की खेती जैसे नये आय के स्रोतों पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही सिंचाई पर निवेश बढ़ाया गया है और फसल बीमा योजना को ज्यादा कारगर बनाने के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।

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