मोदी बनाम ममता

प्रशांत श्रीवास्तव
ममता बनर्जी के धरने पर पहुंचे आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडु और अन्य विपक्षी नेता
ममता बनर्जी के धरने पर पहुंचे आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडु और अन्य विपक्षी नेता
संदीपन चटर्जी

प्रशांत श्रीवास्तव
आम चुनावों के पहले सीबीआइ केंद्र-राज्य टकराव का कारण बनी, ममता बनीं मोदी विरोधी मोर्चे की अगुआ

इसमें तो दो राय नहीं कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) से विवाद का नाता चोली-दामन का है। ऐसे दौर कम ही रहे हैं जब विवाद के दाग उसके दामन से दूर रहे हों। लेकिन पिछले साल खासकर अक्टूबर से ही सीबीआइ ऐसे दलदल में फंसी कि अपने साथ तमाम दूसरी संस्‍थाओं और मर्यादाओं को भी दागदार बनाती चल रही है। ताजा मामले में सीबीआइ केंद्र-राज्य टकराव या कहिए मोदी-ममता टकराव का वायस बन गई। यह टकराव ऐसा विकराल बना कि अचानक 2019 के लोकसभा चुनावों की राजनैतिक जंग का केंद्र कोलकाता या कहिए पश्चिम बंगाल बन गया। इसके बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली भारतीय जनता पार्टी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधे टक्कर है। यह टकराहट भी अचानक नहीं है। ऐसा लगता है कि ममता ने राज्य में भाजपा की रथयात्रा और रैलियों पर रोक लगाई और विपक्षी एकजुटता को मंच मुहैया कराया तो दूसरी तरफ से सीबीआइ का दांव आ गया। इसके खिलाफ ममता धरने पर बैठीं तो कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, तेलुगुदेशम पार्टी, आम आदमी पार्टी से लेकर लगभग पूरा विपक्ष ममता बनर्जी के साथ खड़ा हो गया है।

ताजा टकराव रविवार 3 फरवरी की देर शाम शुरू हुई जब सीबीआइ के करीब 40 अधिकारी बिना किसी सूचना, बिना समन, बिना वारंट के कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के निवास पर पहुंच गए, जबकि पश्चिम बंगाल सरकार सीबीआइ को स्वाभाविक मंजूरी वापस ले चुकी है, इसलिए उसके लिए राज्य सरकार की मंजूरी अनिवार्य बन जाती है। सीबीआइ के अधिकारी कथित तौर पर शारदा और रोज वैली चिटफंड घोटाले में सुबूत मिटाने के लिए राजीव कुमार से पूछताछ या शायद गिरफ्तार करने पहुंचे थे। शायद सीबीआइ की मंशा भांपकर स्‍थानीय पुलिस-प्रशासन भी हरकत में आ गया। सीबीआइ की टीम को पुलिस ने कमिश्नर आवास में जाने से रोक दिया। पुलिस ने सीबीआइ टीम को हिरासत में ले लिया और शेक्सपियर सारणी थाने लेकर गई। बाद में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल बुलाया गया और उन्हें कोलकाता के सीबीआइ कार्यालय में ले जाया गया।

वैसे, सीबीआइ का कहना था कि राजीव कुमार जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और उसके समन का जवाब भी नहीं दे रहे थे। लेकिन सीबीआइ के पुलिस कमिश्नर के घर पहुंचने की खबर जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगी तो वे फौरन राजीव कुमार के घर पहुंच गईं। वहां करीब एक घंटा मीटिंग करने के बाद सीधे मीडिया से मुखातिब हुईं। उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “सीबीआइ और दूसरी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनैतिक हित के लिए किया जा रहा है। लेकिन मैं डरने वाली नहीं हूं। मैं लोकतंत्र बचाने के लिए धरने पर बैठ रही हूं।”

इस ऐलान के बाद वे कोलकाता के धर्मतल्ला मैदान में धरने पर बैठ गईं। यह वही जगह है जहां 12 साल पहले उन्होंने सिंगूर में टाटा के कार प्लांट के विरोध में धरना दिया था। उनके धरने के दौरान पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के साथ दूसरे अधिकारी भी पहुंचे। हालांकि बाद में ममता बनर्जी ने इसका खंडन किया कि राजीव कुमार भी उनके साथ धरने पर बैठे थे। ममता बनर्जी ने अगले दिन सोमवार को भी धरना जारी रखा और वहीं कैबिनेट की बैठक भी की।

ममता बनर्जी के धरने से फौरन केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी भी एक्शन में आ गई। भाजपा की पूरी कोशिश थी कि लोगों में यह संदेश जाए कि ममता बनर्जी शारदा घोटाले में अपने साथियों को बचाने के लिए राजीव कुमार का समर्थन कर रही हैं। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, “आखिर पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार में ऐसी क्या बात है कि उनसे पूछताछ होने भर से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं। साफ है कि राजदार बहुत कुछ जानता है इसलिए वे परेशान हैं।” लोकसभा में सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “सीबीआइ के अधिकारियों को न सिर्फ रोका गया, बल्कि बल प्रयोग भी किया गया। पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। वे सीबीआइ के समन जारी करने पर जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। देश की कानून लागू करने वाली एजेंसी से यह टकराव असंवैधानिक है। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि ये संवैधानिक संस्थाओं को तोड़ने की कोशिश है।”

इसी बीच, केंद्र ने राज्यपाल से रिपोर्ट भी मांग ली है और सोमवार को ही सीबीआइ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। सीबीआइ का आरोप था कि राजीव कुमार जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, जबकि दूसरे पक्ष का दावा था कि सीबीआइ राजनीति से प्रेरित होकर काम कर रही है। सोमवार को शाम होते-होते ममता बनर्जी फिर आक्रामक मूड में नजर आईं। उन्होंने कहा, “मैं अपनी जान देने के लिए तैयार हूं, लेकिन कोई समझौता नहीं करूंगी। जब आपने टीएमसी नेताओं को छुआ तो मैं सड़कों पर नहीं गई। लेकिन मुझे गुस्सा आया जब उन्होंने कोलकाता पुलिस कमिश्नर की कुर्सी का अपमान करने की कोशिश की, वह संस्था का नेतृत्व कर रहे हैं।” मामले का तात्कालिक पटाक्षेप मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले से हुआ, जिसमें उसने राजीव कुमार की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी और कहा है कि राजीव कुमार मेघालय के शिलांग में पूछताछ के लिए सीबीआइ दफ्तर पहुंचे और जांच में पूरी तरह से सहयोग करें।

पूरे घटनाक्रम पर सीबीआइ की भूमिका पर गहरे सवाल उठ रहे हैं। सीबीआइ के पूर्व ज्वाइंट डायरेक्टर एन.के.सिंह ने आउटलुक से कहा,  “सीबीआइ की टाइमिंग पूरे मामले में सही नही लगती है। जब सोमवार को नवनियुक्त डायरेक्टर ऋषि शुक्ला चार्ज संभालने वाले थे, तो एक दिन पहले इस तरह के एक्शन की क्या जरूरत थी। सीबीआइ को इस मामले में कोर्ट से अनुमति लेकर कदम उठाना चाहिए था, जिससे आगे कोई विवाद नहीं हो। आमतौर पर जब सीबीआइ किसी राज्य में इस तरह की कार्रवाई करती है तो वह स्थानीय पुलिस स्टेशन को इसकी पूर्व सूचना देती है। लेकिन यहां तो पुलिस कमिश्नर का ही मामला था, ऐसे में सीबीआइ को हर पहलू को देखकर कदम उठाना चाहिए था।”

केंद्रीय जांच एजेंसी के अंतरिम डायरेक्टर नागेश्वर राव की हड़बड़ी भी सही नहीं लगती है। खासतौर पर उन्हें सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि वे कोई नीतिगत फैसला नहीं ले सकते हैं। वहीं, सीबीआइ के एक अन्य पूर्व ज्वाइंट डायरेक्टर शांतनु सेन का कहना है कि पूरे मामले में दोनों पक्षों ने पेशेवर रवैया नहीं अपनाया है। दोनों पक्षों को कोर्ट का सहारा लेना चाहिए था, ताकि विवाद की स्थिति न पैदा हो।

फिर यह सवाल भी उठ रहा है कि शारदा मामले में ही फंसे मुकुल रॉय और हेमंत बिस्वा सरमा पर कार्रवाई क्यों सुस्त पड़ी है। रॉय तृणमूल से और असम के मंत्री सरमा कांग्रेस से भाजपा में शामिल हो गए, तो उनके खिलाफ सीबीआइ ने अपनी कार्रवाइयां सुस्त कर दीं। सीबीआइ का कहना है कि उनके खिलाफ जांच में कुछ खास नहीं मिला। लेकिन ममता ने शारदा चिटफंड के गिरफ्तार कर्ताधर्ता सुदीप्तो सेन की अखबार में छपी वह चिट्ठी दिखाई जिसमें सरमा पर तीन करोड़ रुपये लेने का आरोप है। जाहिर है, आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला अभी थमेगा नहीं। और आम चुनाव के पहले इसके और भी रंग दिखेंगे।

पूरे घटनाक्रम को देखते हुए एक बात तो साफ है कि अभी यह लड़ाई खत्म नहीं हुई है। दोनों पक्ष किसी समझौते के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। इसीलिए ममता बनर्जी ने धरना खत्म होते ही यह ऐलान कर दिया है कि वे 13 और 14 फरवरी को एक बार फिर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन करेंगी। इसी बीच, केंद्र सरकार ने भी कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के खिलाफ एक्शन लेने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कर कहा कि राजीव कुमार ने अनुशासन का उल्लंघन किया है। ऐसे में उनके खिलाफ एक्शन लेना चाहिए। अब यह लड़ाई पूरी तरह से मोदी बनाम ममता बन चुकी है। अब देखना यह है कि यह लड़ाई आगे किस दिशा में बढ़ती है।

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