जन-धन योजनाः बैंक करने लगे तौबा

चंडीगढ़ से हरीश मानव
पटरी से उतरी योजनाः 28 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री ने की थी इस योजना की शुरुआत
पटरी से उतरी योजनाः 28 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री ने की थी इस योजना की शुरुआत

चंडीगढ़ से हरीश मानव
पंजाब, हरियाणा में बंद हुए जीरो बैलेंस वाले 16 लाख खाते

मेरा खाता भाग्य विधाता। गरीबों को यह बता-जता कर शुरू की गई प्रधानमंत्री जन-धन योजना (पीएमजेडीवाइ) से कहीं किसी का भाग्य बदलता तो नहीं दिखा, पर दबाव में इसे लागू करने वाले बैंक अब इस योजना से नजरें चुराने लगे हैं। पीएमजेडीवाइ में सरकार द्वारा जहां जीरो बैलेंस खाताधारक गरीबों को अब एक लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये दुर्घटना बीमा सुरक्षा का दावा किया जा रहा है, वहीं आरबीआइ ने सितंबर 2018 को बैंकों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत खुले जीरो बैलेंस खाताधारक नोटिस अवधि के 30 दिन के भीतर अपने खातों में कोई लेन-देन नहीं करते तो ऐसे खाते बंद कर दिए जाएं। बैंकिंग सूत्रों के मुताबिक, देश भर में ऐसे एक करोड़ से अधिक खाते बंद किए जा चुके हैं और करीब इतने ही खाते बंद करने की तैयारी है। पंजाब और हरियाणा में बैंकों ने 16 लाख से अधिक प्रधानमंत्री जन-धन खाते बंद करने के नोटिस जारी किए हैं। आरबीआइ की क्षेत्रीय निदेशक रचना दीक्षित के मुताबिक, लंबे समय से जीरो बैलेंस पर चल रहे उन खातों को बंद करने के निर्देश बैकों को दिए गए हैं, जिनमें कोई लेन-देन नहीं हो रहा है।

केनरा बैंक के पूर्व चेयरमैन ए.के. महाजन का कहना है कि यूपीए सरकार के समय वित्तीय समावेश बढ़ाने के लिए गरीबों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने का काम चल रहा था, लेकिन अगस्त 2014 से मोदी सरकार ने बैंकों पर साल भर में ही लाखों खाते खोलने का दबाव बनाया। प्रधानमंत्री ने लाखों बैंक अधिकारियों को पत्र लिखे, एक दिन में 77,000 कैंप लगवाए और एक ही दिन में डेढ़ करोड़ लोगों के खाते भी खुलवा दिए गए। करीब 32 करोड़ पीएमजेडीवाइ खाते अब बैंकों पर ही भारी पड़ने की वजह से यह योजना जल्द ही सिमटने लगी है। टारगेट हासिल करने के दबाव में बैंकों द्वारा कई ऐसे लोगों के भी खाते खोल दिए गए, जिनके पहले से ही बैंकों में दो-तीन खाते थे। पंजाब और हरियाणा राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के मुताबिक, 30 सितंबर 2018 तक पंजाब में खोले गए बैंक खातों में 13 फीसदी और हरियाणा में 10 फीसदी खाते जीरो बैलेंस वाले हैं। तीन करोड़ की आबादी वाले पंजाब में ही बैंकों ने पीएमजेडीवाइ में 67.95 लाख बैंक खाते खोल डाले, जिनमें 9.11 लाख जीरो बैलेंस खातों को बंद करने के नोटिस जारी किए गए हैं।

हरियाणा में खोले गए 65 लाख खातों में से सात लाख जीरो बैलेंस खातों को बंद करने की तैयारी है। पीएमजेडीवाइ में जिन बैंकों के जीरो बैलेंस खाते अधिक हैं, उनमें आइसीआइसीआइ बैंक, कोटक महिंद्रा, एक्सिेस बैंक, एचडीएफसी बैंक और आइडीबीआइ बैंक शामिल हैं।

पीएमजेडीवाइ में जिन बैंकों के जीरो बैलेंस खाते अधिक हैं उनमें आइसीआइसीआइ बैंक के 65, कोटक महिंद्रा बैंक के 56, एक्सिस बैंक के 37, एचडीएफसी बैंक के 26 और आइडीबीआइ बैंक के भी 26 फीसदी जीरो बैलेंस खाते हैं। ग्रामीण बैंकों का प्रदर्शन सरकारी व निजी बैंकों की तुलना में बेहतर रहा है। सतलज ग्रामीण बैंक के सिर्फ 0.45, पंजाब ग्रामीण बैंक के 0.87, मालवा ग्रामीण बैंक के 1.22 और कोऑपरेटिव बैंक के 1.61 फीसदी जीरो बैलेंस खाते हैं। पंजाब राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के पूर्व संयोजक पीएम चौहान के मुताबिक, पीएमजेडीवाइ के तहत ग्रामीण इलाकों में जरूरतमंदों के खाते खोलने पर जोर रहा। वहीं शहरों में इसके उलट केवल खातांे की संख्या बढ़ाने पर बैंकों का जोर रहा इसलिए ग्रामीण बैंकों का प्रदर्शन सरकारी व निजी बैंकों की तुलना में अच्छा रहा। 24 मई 2018 को सरकार के चार साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री ने जन-धन योजना को गरीबी हटाने की दिशा में बड़ी कामयाबी बताया। जो आंकड़े सरकार सामने लाई उनमें देश में 32 करोड़ से अधिक जन-धन खाते खुलना और इन खातों में 82 हजार करोड़ रुपये से अधिक जमा होना सबसे बड़ी उपलब्धि बताई गई।

जन-धन में खाता खुलवाना बैंक से कर्ज मिलने की गारंटी नहीं है। कर्ज पाने के लिए आपको बैंक की बुनियादी शर्तों को पूरा करना पड़ेगा। इस पर पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल कहते हैं, “सूट-बूट की सरकार तो उन कंपनियों से भी ज्यादा छलावा कर रही है जो नियम और शर्तें बारीक अक्षरों में नीचे लिख देती हैं, यहां तो करोड़ों खाते प्रधानमंत्री की जुबान के भरोसे खुल गए और बाद में बारीक अक्षर में नियम शर्तें लगा दी गईं।” 2011 में मनमोहन सिंह सरकार की तरफ से भी ऐसी ही योजना शुरू हुई थी, तब 2000 से अधिक आबादी वाले गांवों को बैंक से जोड़ा जाना था। जन-धन शुरू करते समय ही सरकार ने अपने दस्तावेजों में माना था कि यह पुरानी योजना का विस्तार है। ऐसे में जन-धन का अंजाम भी पुरानी योजना जैसा न हो।

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