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अमित जेठवा हत्या मामले में पूर्व भाजपा सांसद समेत सात लोगों को उम्र कैद की सजा

गुजरात में अहमदाबाद की सीबीआई अदालत ने आरटीआई कार्यकर्ता अमित जेठवा हत्या मामले में सात लोगों को...
अमित जेठवा हत्या मामले में पूर्व भाजपा सांसद समेत सात लोगों को उम्र कैद की सजा

गुजरात में अहमदाबाद की सीबीआई अदालत ने आरटीआई कार्यकर्ता अमित जेठवा हत्या मामले में सात लोगों को उर्मकैद की सजा सुनाई है। इन सात आरोपियों में भाजपा के पूर्व सांसद दीनू सोलंकी भी शामिल हैं। बता दें कि 20 जुलाई 2010 को अमित जेठवा की हाईकोर्ट के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

जिस समय अमित जेठवा की हत्या को अंजाम दिया गया उस समय जेठवा गिर वन क्षेत्र में अवैध माइनिंग के खिलाफ आरटीआई लगा रहे थे। इसके बाद ही उनकी हत्या हो गई थी। जांच में गुजरात पुलिस का कहना था कि जेठवा हत्याकांड में दीनू सोलंकी का कोई हाथ नहीं है। लेकिन आरटीआई कार्यकर्ता अमित के पिता की याचिका पर हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।

6 जुलाई को अदालत पूर्व भाजपा सांसद दीनू सोलंकी समेत सात को ठहराया था दोषी

इस मामले में शनिवार (6 जुलाई) को सीबीआई की अदालत ने पूर्व भाजपा सांसद दीनू बोघा सोलंकी समेत सात को दोषी ठहराया था। उस समय अदालत ने सजा सुनाने के लिए 11 जुलाई की तारीख तय की थी। विशेष अदालत ने शनिवार को पूर्व सांसद सोलंकी सहित सभी सातों आरोपितों को हत्या और आपराधिक साजिश रचने का दोषी माना। सोलंकी 2009 से 2014 तक जूनागढ़ से भाजपा के सांसद रहे हैं। गुजरात पुलिस की क्राइम ब्रांच शाखा ने पूर्व सांसद सोलंकी को क्लीन चिट दे दी थी। इसके खिलाफ जेठवा के पिता ने हाई कोर्ट में अपील की थी। इसके बाद मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी गई थी।

जानें क्या था मामला

सासण-गीर जंगल में अवैध खनन के खिलाफ अमित जेठवा ने हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दायर की थीं। इसमें पूर्व सांसद सोलंकी की संलिप्तता के आरोप लगाए थे। जेठवा की 20 जुलाई 2010 को अहमदाबाद में सरखेज-गांधीनगर हाइवे पर हाई कोर्ट के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय जेठवा हाईकोर्ट में दायर एक मामले के सिलसिले में अपने वकील से मिलकर बाहर निकले थे।

पिता बोले- मिल गया न्याय

जेठवा के पिता भीखाभाई जेठवा ने सातों लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाए जाने पर कहा कि उन्हें आज न्याय मिल गया है। बेटे की हत्या के बाद उन्हें व गवाहों को धमकी, प्रलोभन आदि दिए गए, लेकिन वे न्याय के लिए अडिग रहे। कुछ गवाहों को भी धमकी मिली जिसके चलते उन्होंने बयान बदले, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 18 गवाहों को सुरक्षा दी गई और उन्होंने इस मामले को इस अंजाम तक पहुंचाया।

 

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