भारत के महानतम क्रिकेटरों में शुमार पूर्व कप्तान सौरव गांगुली आज 44 बरस के हो गए और भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के चहेते दादा को सोशल मीडिया पर सभी तबकों से बधाई मिली।
वेस्टइंडीज बोर्ड अध्यक्ष एकादश के खिलाफ सेंट किट्स में शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय अभ्यास मैच से पहले भारत के नये मुख्य कोच अनिल कुंबले की नजरें तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की फिटनेस और सलामी बल्लेबाज शिखर धवन की फार्म पर रहेंगी।
Iविम्बलडन में भारतीय चुनौती उस समय समाप्त हो गई जब मिश्रित युगल में लिएंडर पेस और मार्तिना हिंगिस तीसरे दौर में ब्रिटेन के हीथर वाटसन और फिनलैंड की हेनरी कोंटिनेन से हारकर बाहर हो गए।
एसीएचआर के ग्लोबल सर्वे से सामने आया सच कि दुनिया के कई देशों में बेटों की चाह में बेटियों को मारा जा रहा है। बड़े देशों में भारत के हाल सबसे बदतर। कई अविकसित देशों से भी बदतर है भारत में लिंग अनुपात
चार अफ्रीकी देशों की अपनी यात्रा के पहले चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को मोजांबिक पहुंचे। उन्होंने वहां राष्ट्रपति फिलिप न्यूसी से द्विपक्षीय मामलों पर चर्चा की। दोनों राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी में कई अहम समझौतों पर दस्तखत किए गए। भारत के नजरिए से दालों के आयात को लेकर हुआ समझौता सबसे अहम बताया जा रहा है। मोदी सरकार इसके जरिए देश में दलहन की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने की कोशिश में है। मोजांबिक की राजधानी मैपुटो में बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति न्यूसी और मेरे बीच रक्षा एवं सुरक्षा के मसलों पर आपसी सहयोग को मजबूत करने पर सहमति बनी है। उन्होंने मिले सम्मान के लिए प्रेजिडेंट न्यूसी, सरकार और मोजांबिक के लोगों को धन्यवाद दिया।
वेस्टइंडीज दौरे में टेस्ट सीरिज के दौरान दो टेस्ट कोई भारतीय कप्तान नहीं जीत पाया है। विराट कोहली आगामी सीरिज में क्या यह उपलब्धि हासिल कर पाएंगे।
भारत के बैंकिंग क्षेत्र पर मुख्य तौर पर 2011-13 के दौरान अटकी परियोजनाओं के कारण कुछ दबाव है और इन परियोजनाओं की मुश्किलें दूर करने की कोशिशें की जा रही है।
भारत के प्रमुख चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने कहा है कि यदि सभी राजनीतिक दलों में आम सहमति बने और इस संदर्भ में संवैधानिक संशोधन हों तो भारतीय चुनाव आयोग आम चुनाव और राज्य विधानसभा के चुनावों को एक साथ करवाने के लिए तैयार है।
देश को आजाद हुए पैंसठ साल से अधिक का समय हो गया पर भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड पर अभी तक आम राय नहीं बन पाई है। जब इतने समय पर यह नहीं हो पाया तो भाजपा अब क्या सोच समझ कर यूनिफार्म सिविल कोड का ताना-बाना बुनने लगी है। क्या छह माह में इसे लागू करने का दम केंद्र की भाजपा सरकार के पास है या यह महज एक चुनावी चुग्गा है। जो भाजपा ने यूपी चुनाव से पहले जनता की ओर फेंक दिया है।