विजय पताका लिए सेनापति दो वर्षों की अवधि में तीन सेनाओं के नेतृत्व का दावा कर रहे हैं। ऐसा चमत्कार तो रामायण-महाभारत काल या विक्रमादित्य और सम्राट अशोक के शासनकाल के युद्ध में भी पढ़ने-सुनने को नहीं मिलता। भारतीय लोकतंत्र में नेहरू-इंदिरा गांधी-राजीव गांधी, नरसिंह राव, अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में सत्ता और संगठन के साथ विचारधाराओं के आधार पर जन समर्थन की सफलता-विफलता देखने को मिली। राव-मनमोहन राज और अटलजी की सत्ता के अंतिम दौर में ‘शाइनिंग इंडिया’ से जुड़ी राजनीतिक टीम और पर्दे के पीछे मोटी रकम देकर सर्वेक्षणों एवं विज्ञापनों की एजेंसियों की सहायता ली गई। लेकिन मोदी युग में समानान्तर राजनीतिक सत्ता का एक नया केन्द्र उभरकर आया। भाजपा, आर.एस.एस. एवं इससे संबद्ध विभिन्न संगठनों, स्वामी रामदेव के लाखों समर्थकों, नए-पुराने नेताओं के धुआंधार प्रचार के बावजूद मोदी-भाजपा की सफलता का श्रेय ‘राजनीतिक प्रचार प्रबंधक’ प्रशांत किशोर ने लिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने भाषण में कांग्रेस नेतृत्व पर करारा हमला किया। राहुल गांधी की ओर से बुधवार को खुद पर किए गए प्रहारों का करारा जवाब पीएम मोदी ने राजीव गांधी, इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के उद्धरणों का इस्तेमाल करते हुए दिया।
लोकसभा में बुधवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष बहुत आक्रामक मुद्रा में नजर में आए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि मोदीजी प्रधानमंत्री का मतलब पूरा देश न समझें। मोदी सरकार की योजनाओं की धज्जियां उड़ाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने काला धन योजना को फेयर एंड लवली योजना तक करार दे दिया।
उच्चतम न्यायालय ने एक कांग्रेस नेता की ओर से दाखिल उस जनहित याचिका पर सुनवाई से शुक्रवार को इनकार कर दिया जिसमें हाल ही में पारित किशोर कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। हाल में पारित किशोर कानून में प्रावधान किया गया है कि यदि 16 साल और उससे ज्यादा उम्र के किशारों पर बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराध के आरोप लगते हैं तो उन पर वयस्कों पर लागू होने वाली धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने लंबे समय से चली आ रही इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वह अंतरिम प्रधानमंत्री बनना चाहते थे। प्रणब ने इन अटकलों को गलत और द्वेषपूर्ण करार दिया है।
अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने के केंद्र के फैसले के खिलाफ कांग्रेस की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख तय की है।