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कर्नाटक सरकार से जिन 2 विधायकों ने समर्थन वापस लिया वह किसी भी पार्टी से जुड़े नहीं हैं: देवगौड़ा

कर्नाटक में पिछले कई दिनों से जारी राजनीतिक उठा-पटक के बीच दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापस लेने को...
कर्नाटक सरकार से जिन 2 विधायकों ने समर्थन वापस लिया वह किसी भी पार्टी से जुड़े नहीं हैं: देवगौड़ा

कर्नाटक में पिछले कई दिनों से जारी राजनीतिक उठा-पटक के बीच दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापस लेने को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस (जनता दल सेक्युलर) प्रमुख एचडी देवगौड़ा ने कहा कि यह केवल मीडिया द्वारा बनाया गया माहौल है और इससे कर्नाटक सरकार को कोई खतरा नहीं होगा। दरअसल, कर्नाटक में सात माह पुरानी एच डी कुमारस्वामी नीत कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार को झटका देते हुए दो निर्दलीय विधायकों ने मंगलवार को अपना समर्थन वापस ले लिया। ये दोनों विधायक एच. नागेश (स्वतंत्र) और आर. शंकर (केपीजेपी) है। दोनों ने राज्यपाल वजुभाईवाला को पत्र लिख कर तत्काल प्रभाव से समर्थन वापस लेने के अपने फैसले से अवगत कराया है।

'समर्थन वापस लेने वाले दोनों विधायक किसी भी पार्टी से जुड़े नहीं हैं'

न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, एचडी देवगौड़ा ने कहा कि कर्नाटक सरकार से जिन दो विधायकों ने समर्थन वापस लिया है वह किसी भी पार्टी से जुड़े नहीं हैं। वे दोनों निर्दलीय हैं इसलिए इसे इतना बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत करने का कोई मतलब नहीं है। यह केवल मीडिया द्वारा माहौल बनाया जा रहा है यानी मीडिया ही इसे तूल दे रहा है।' 

'हमारा गठबंधन आराम से चल रहा है और मैं निश्चिंत था और निश्चिंत हूं'

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि मुंबई के होटल में मौजूद कांग्रेस के विधायक मीडिया की पहुंच में नहीं हैं, लेकिन मेरी पहुंच में हैं। मैं हर एक के साथ संपर्क में हूं और सभी से बात कर रहा हूं। वो वापस आ जाएंगे। हमारा गठबंधन आराम से चल रहा है और मैं निश्चिंत था और निश्चिंत हूं। चिंता न कीजिए और खुश रहिए।

मैं हमारे सभी विधायकों से संपर्क में हूं: केसी वेणुगोपाल

 

कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने कहा है, ‘मैं हमारे सभी विधायकों से संपर्क में हूं, यह सब कुछ एक-दो दिन में खत्म हो जाएगा। हम सब एक साथ हैं, कांग्रेस में कोई अंदरूनी लड़ाई नहीं है। यह सब आधारहीन है’।

समर्थन वापस लेने के बाद क्या बोले निर्दलीय विधायक एच नागेश

कर्नाटक सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद निर्दलीय विधायक एच नागेश ने कहा, 'गठबंधन सरकार को मेरा समर्थन अच्छी और स्थिर सरकार चलाने के लिए था जो कि असफल हुआ। गठबंधन सहयोगियों के बीच कोई समझदारी नहीं है। इसलिए मैंने स्थिर सरकार के गठन के लिए बीजेपी के साथ जाने का फैसला किया और देखेंगे कि सरकार गठबंधन से बढ़िया प्रदर्शन करेगी।'

हवेरी जिले की राणेबेन्नुर विधानसभा सीट से विधायक शंकर क्षेत्रीय कर्नाटक प्रग्नवंता जनता पार्टी से संबद्ध हैं, वहीं नागेश कोलार जिले की मुलबागल विधानसभा सीट से विधायक हैं।

कांग्रेस का आरोप

कर्नाटक में अपने कुछ विधायकों के पाला बदलने से जुड़ी अटकलों को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हुए कांग्रेस ने मंगलवार को कहा था कि राज्य की कांग्रेस-जद(एस) सरकार ‘पहले भी स्थिर थी, है और आगे भी रहेगी।’ पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर कहा, ‘कर्नाटक में गठबंधन सरकार स्थिर थी, स्थिर है और आगे भी स्थिर रहेगी।’ उन्होंने कहा कि भाजपा को ‘खरीद-फरोख्त करने’ के बजाय मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि आगे के चुनाव में वह बेहतर कर सके।

 ‘अस्थिरता’ का कोई सवाल नहीं: कुमारस्वामी

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने मंगलवार को कहा था कि राज्य में कांग्रेस- जद (एस) की सरकार के ‌लिए ‘‘अस्थिरता’’ का कोई सवाल नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने इन खबरों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया है कि भाजपा उनकी सरकार को गिराने के लिए कथित रूप से ‘‘ऑपरेशन कमल’’ चला रही है। दरअसल, इस तरह की अटकलें हैं कि छह से आठ कांग्रेस विधायक भाजपा के पाले में जाने को तैयार बैठे हैं। ऐसी भी खबरें हैं कि इनमें से कुछ के साथ संपर्क ही नहीं हो पा रहा है।

क्या है कर्नाटक का समीकरण

225 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में अध्यक्ष सहित कांग्रेस के कुल 80 विधायक हैं। जेडीएस के 37 विधायक हैं। भाजपा के पास 104 विधायक हैं। संख्याबल के आधार पर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन जेडीएस के कांग्रेस के साथ जाने के चलते भाजपा राज्य में सरकार बनाने से चूक गई।

क्या हैऑपरेशन लोटस’

2008 विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। भाजपा को 110, कांग्रेस को 80, जेडीएस को 28 और निर्दलीय को 6 सीटें मिली थीं।

भाजपा ने 6 निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई थी। इसके बाद भाजपा ने जेडीएस के चार और कांग्रेस के तीन विधायकों को अपने पक्ष में कर लिया था। इसके लिए उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। बाद में सभी भाजपा में शामिल हो गए। इन सीटों पर उप चुनाव हुए। सात में से पांच विधायक जीत गए। इस तरह सदन में भाजपा की संख्या 115 हो गई। इस पूरी कवायद को ‘ऑपरेशन लोटस’ कहा गया।

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