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बदलती नौकरियों की फिक्र करो, नए हुनर सीखो

आप युवा हैं और रोजगार की दुनिया में कदम रखने को एकदम तैयार हैं, लेकिन कम होते रोजगार अवसरों से हतोत्साहित हैं? ऐसे में आइए रोजगार बाजार में भविष्य के ट्रेंड के बारे में जानें

अर्थ पर भारी राजनीति

यह भी नहीं भूलना चाहिए कि मतदाता कई बार चौंकाने वाले नतीजे देता है और अर्थव्यवस्थाा की खस्ताहाली से उसे लगता है कि सरकारें कारगर नहीं हैं, तो अप्रत्याशित नतीजे भी आ सकते हैं

हरियाणा और महाराष्ट्र के नतीजों से स्थानीय मुद्दों और नेतृत्व की वापसी

बात हरियाणा की करें तो पार्टी ने चुनाव का जो एजेंडा बनाया वह मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर सका

आउटलुक-आइकेयर इंडिया एमबीए रैंकिंग 2020

आज जब प्योर साइंस के शिक्षण संस्थान भी युवा इंटरप्रेन्योर की फिक्र करने लगे हैं, तो हमने देश के सर्वश्रेष्ठ मैनेजमेंट स्कूलों के सर्वे से यह जानने की कोशिश की कि कौन एकदम खरे हैं, कौन पारंपरिक ढर्रे के और किसकी पहचान परवान चढ़ने लगी गै

नए भारत के नए विश्वविद्यालय

नए निजी विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा की कमी को विदेश के मुकाबले काफी कम कीमत पर पूरा कर रहे हैं। वे समाज पर प्रभाव डाल रहे हैं और नया ज्ञान भी विकसित कर रहे हैं

लिबरल बनाम पेशेवर पढ़ाई

बिजनेस एजुकेशन में अब फंडामेंटल आर्ट्स और विज्ञान के तमाम क्षेत्रों पर फोकस

रंग दिखा सकते हैं स्थाानीय मुद्दे

पानी का संकट और दशकों पुरानी दूसरी समस्याएं दे रहीं भाजपा-शिवसेना गठबंधन को टक्कर, लेकिन विपक्ष बिखरा-बिखरा

पचहत्तर पार आसान तो नहीं

भाजपा को कश्मीर और एनआरसी के सहारे बड़े लक्ष्य की उम्मीद लेकिन विपक्ष का कृषि संकट, महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर जोर

पटखनी के दांव

निकाय अध्यक्ष चुनाव से पहले कमलनाथ ने दिखाई अपनी ताकत

सबके लिए फैशन

मोटे और दिव्यांग आरामदायक कपड़े पहन कर रैंप पर हैं, पुतलों की तरह के मॉडलों के दिन लद चुके। फैशन की दुनिया बदल गई है

“किसी भी जिम्मेदारी के लिए तैयार”

महाराष्ट्र में ठाकरे परिवार के युवा नेता आदित्य ठाकरे भी इस बार चुनावी समर में किस्मत आजमा रहे हैं। शिवसेना में यह पहली बार होगा कि ठाकरे परिवार से कोई चुनाव लड़ रहा है। शिवसेना की युवा सेना इकाई के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे से भावना बिज अरोड़ा और गिरिधर झा ने राजनीति, चुनाव, आरे मामला और भाजपा से गठबंधन जैसे मुद्दों पर बात की। मुख्य अंशः

“विपक्ष इक्का-दुक्का सीट ही जीत पाएगा”

हरियाणा में सत्तारूढ़ भाजपा आश्वस्त है कि कश्मीर और एनआरसी के मुद्दे राज्य में किसानों की नाराजगी, बेरोजगारी, आर्थिक मंदी जैसे वास्तविक मुद्दों पर भारी पड़ेंगे और विपक्ष के पास भी उसका कोई तोड़ नहीं है। इसलिए उसे 75 से ज्यादा सीटें जीतने के लक्ष्य की राह में कोई बाधा नहीं िदखती है। इन तमाम मसलों और विपक्ष की चुनौती पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से संपादक हरवीर सिंह और वरिष्ठ सहायक संपादक हरीश मानव ने बातचीत की। प्रमुख अंश :

“सांप्रदायिक राष्ट्रवाद का खेल खतरनाक”

चुनावों में भारतीय जनता पार्टी जिस तरह खर्च कर रही है, सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी उसे कॉरपोरेट-सांप्रदायिक गठजोड़ मानते हैं। सरकार कॉरपोरेट को छूट देती है, जिसका फायदा उसे चुनावी फंडिंग में मिलता है। स्थानीय मुद्दों के बजाय राष्ट्रवाद के नाम पर चुनाव लड़े जाने पर उनका मानना है कि रोज की परेशानियों और नौकरी का सवाल आएगा तभी चीजें बदलेंगी। इन विषयों पर डिप्टी एडिटर एस.के. सिंह ने उनसे बात की। मुख्य अंश :

जिए जा रहे जीवन की गूंज

जो लोग कुलदीप कुमार को साहित्यिक-सांस्कृतिक, सामाजिक-राजनैतिक विषयों पर निरंतर हिंदी-अंग्रेजी में लिखने वाले सजग-सचेत पत्रकार के रूप में जानते रहे हैं, वे उनके कवि-रूप को पाकर निश्चय ही अचरज से भर उठेंगे, प्रसन्नता से भी

वास्तविक समाजवादी

विकल्प और संभावना किशन जी के प्रिय शब्द थे

भूला-बिसरा कलमकार

कहानीकार अरविंद कुमार ने भोजपुरी जी की रचनावली निकाल कर नई पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व और योगदान से परिचित कराया है

नोबेल पुरस्कार और छात्र राजनीति

हाऊडी-हाऊडी पर न्योछावर होने वाले सोशल मीडिया पर अभिजीत बनर्जी के खिलाफ लिखने में जुटे

हमारी जड़ खोपड़ी में ज्ञान का प्रकाश

हमारे देश में अक्सर ऐसे ज्ञान के सर्चलाइट जलते रहते हैं, जिससे सारे भारतीय समाज के दिमागों में ज्ञान का प्रकाश फैलता रहा है

अपनी ड्यूटी की अनदेखी

न्यायपालिका का अपनी मूलभूत ड्यूटी, अधिकार क्षेत्र का सरकार को सौंपते जाना लोकतंत्र के लिए घातक

ग्लोबल से पहले लोकल जरूरी

दूसरे देशों के साथ होने वाले कृषि समझौतों से पहले सरकार किसानों से बात नहीं करती, वह इनको गोपनीय बनाकर रखती है