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खाओ अधिक विटामिन, पर क्यों ?

खाद्य पदार्थों में अलग से विटामिन और मिनरल मिलाने के एफएसएसएआइ के निर्देश पर उठे कई सवाल, लोगों की सेहत से खिलवाड़ से लेकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित साधने जैसे आरोप, जानें क्या हैं दलीलें

साइक्लिक नहीं, चेन इफेक्ट

दूरगामी परिणामों का आकलन किए बिना लिए गए फैसलों का हश्र परेशानी बढ़ाने वाला ही होता है, जैसे इस साल का ड्रीम बजट और कश्मीर का फैसला

लोगों की सेहत से खिलवाड़

तमाम वैज्ञानिक तथ्यों और जानकारों की हिदायतों के बावजूद एफएसएसएआइ का खाद्य पदार्थों में अतिरिक्त विटामिन मिलाने का अभियान लोगों की सेहत बर्बाद करेगा और बड़ी कंपनियों को मुनाफा दिलाएगा

फोर्टिफिकेशन से पहले जिम्मेदारियां तय हों

खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों का पालन होना चाहिए

फूड फोर्टिफिकेशन से दूर होगा कुपोषण

देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मानकों को तय करने की अहम जिम्मेदारी फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआइ) के पास है। अथॉरिटी इस दिशा में क्या काम कर रही है और कुपोषण दूर करने में फूड फोर्टिफिकेशन पर उसकी पहल समेत अन्य मुद्दों पर अथॉरिटी की चेयरपर्सन रीता तेवतिया से एसोसिएट एडिटर प्रशांत श्रीवास्तव ने बात की। मुख्य अंश:

कंपनियों के दबाव में है एफएसएसएआइ

एक तरफ भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार देश में कुपोषण को दूर करने के लिए खाद्य पदार्थों में फोर्टिफिकेशन का रास्ता अपना रही है, दूसरी तरफ पार्टी के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा स्वदेशी जागरण मंच सरकार के इस कदम को खतरनाक बता रहा है। उसका कहना है कि फूड रेग्युलेटर एफएसएसएआइ कंपनियों के दबाव में काम कर रहा है। इस संबंध में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखने जा रहा है। संगठन फोर्टिफिकेशन को क्यों गलत मान रहा है, इस मसले पर एसोसिएट एडिटर प्रशांत श्रीवास्तव ने स्वदेशी जागरण मंच के नेशनल को-कनवीनर अश्विनी महाजन से बात कर उनकी दलीलें जानने की कोशिश की...

सेना की बढ़ती तैनाती का सबब

गुलमर्ग में सेना की तेज हलचल और पांगोंग झील के निकट चीनी सैनिकों के साथ टकराव से भविष्य की घटनाओं के संकेत

कश्मीर भरोसे सत्तारूढ़

किसानों, बेरोजगारों और बिजनेस समुदाय के बीच बेचैनी चरम पर, विपक्ष ने दुरुस्त की मोर्चेबंदी

नए अफसाने की तलाश में दोनों

आर्थिक खस्ताहाली, मॉब लिंचिंग से लोग त्रस्त, चुनावी तैयारी जोरों पर

चुनौती की तैयारियां चाक-चौबंद

भाजपा ने एनआरसी का राग छेड़ा तो कांग्रेस ने भी की नई मोर्चेबंदी

जदयू में कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना

जंग नीतीश का उत्तराधिकारी बनने की, बढ़ रही खटास एनडीए में, मुमकिन है अगला विधानसभा चुनाव जदयू अकेले लड़े

जोगी, रमन पर लटकी तलवार

अंतागढ़ मामले में पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी के बयान से राजनैतिक हलचल तेज, विपक्ष लगा रहा बदले की कार्रवाई का आरोप

छात्रवृत्ति की लूट लीपापोती की कोशिश

घोटाले में नेताओं और अफसरों के शामिल होने के आरोप, हाइकोर्ट ने 30 सितंबर तक रिपोर्ट देने को कहा

हम कहां से आए?

वहां से यहां या यहां से वहाः राखीगढ़ी के नए डीएनए अध्ययन से गहरे और अटूट देसीपन, खेती के आविर्भाव...और निवासियों के बारे में कई तथ्य उजागर

रहस्य की कुछ परतें खुलीं

कंकालों के ताजा डीएनए अध्ययन का चौंकाने वाला पहलू यह है कि उनमें से कुछ का संबंध पूर्वी भूमध्यसागरीय देशों ग्रीस और क्रीट से था

सेठों ने बनाया कंपनी राज को कामयाब

ईस्ट इंडिया कंपनी ने न सिर्फ धूर्त तिकड़म या बेहतर सैन्य बल से, बल्कि अपना साम्राज्य भारतीय सेठों और यहां की वित्तीय व्यवस्था की बदौलत भी कायम किया

“अजीब-सी खबरों पर मत जाइए, सब सामान्य है”

बकौल केंद्र सरकार पहले सौ दिन ऐतिहासिक फैसलों के रहे, लेकिन विपक्ष की नजर में सरकार का प्रदर्शन ज्यादातर मोर्चों पर निराशाजनक रहा है। इस फेहरिस्त में कश्मीर से लेकर अर्थव्यवस्थां तक शामिल है। केंद्रीय सूचना-प्रसारण, वन और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक मीडिया निराशाजनक खबरों को ज्यादा तूल दे रहा है, जीडीपी में गिरावट उतार-चढ़ाव के दौर का मामला है, हालात उतने बुरे नहीं हैं। जाहिर है, उनके पास सरकार की उपलब्धियों का अच्छा-खासा हिसाब है। कश्मीर के हालात, अर्थव्यवस्था की चुनौतियों, विपक्ष के नेताओं पर बदले की भावना से सरकारी एजेंसियों की कार्रवाइयों के आरोपों जैसे मामलों पर उनसे संपादक हरवीर सिंह और एसोसिएट एडिटर प्रशांत श्रीवास्तव ने विस्तृत बातचीत की। कुछ अंशः

जाति विनाश जरूरी

जाति प्रथा और हिंदू धर्म के एक-एक तर्क का आंबेडकर ने खंडन किया

(भ)आज(पा) के चाणक्य

गोवा में 2017 में सबसे बड़ी पार्टी न होने के बावजूद भाजपा की सरकार बनाकर शाह ने साबित किया कि एक फीसदी संभावना को भी वे सौ फीसदी में बदलने की क्षमता रखते हैं

संत रैदास और बेगमपुरा की खोज

बेगमपुरा यानी ऐसा नगर जहां कोई उत्पीड़न-शोषण न हो, केवल आनंद ही आनंद का राज हो

बंटाढार न करने के लिए पुरस्कार

पुरस्कार दो तरह के लोगों को मिलते हैं, योग्य और अयोग्य

इस कानून से नहीं रुकेंगे हादसे

हादसों पर नियंत्रण के लिए सुरक्षा मानकों, सड़क और गाड़ियों के डिजाइन में भी सुधार जरूरी

कैसे बदले यह सूरत

कृषि मंत्रालय ने अपनी बात रखी होती तो एपीएमसी के लिए अब जो छूट घोषित की गई है, उसका प्रावधान बजट में ही कर दिया जाता