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सोशल मीडिया का एक और झूठ, औरंगजेब की तस्वीर के साथ वायरल की जा रही राहुल गांधी की फोटो

सोशल मीडिया पर खास एजेंडे के साथ किसी की भी छवि बिगाड़ने का काम आजकल आसान हो गया है क्योंकि यह फोटोशॉप...
सोशल मीडिया का एक और झूठ, औरंगजेब की तस्वीर के साथ वायरल की जा रही राहुल गांधी की फोटो

सोशल मीडिया पर खास एजेंडे के साथ किसी की भी छवि बिगाड़ने का काम आजकल आसान हो गया है क्योंकि यह फोटोशॉप युग है।

इन दिनों सोशल मीडिया पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की एक तस्वीर तैर रही है। इसके साथ लिखा हुआ है कि इन देशभक्तों ने यह कौन से देश भक्त की तस्वीर लगा रखी है।

फेसबुक पर ''हिंदुत्व को बचाना है, भगवा लाना है’’ नाम के पेज से यह फोटो शेयर की गई है।

गूगल पर इमेज रिवर्स सर्च का ऑप्शन आता है। आल्ट न्यूज के मुताबिक, इस इमेज को रिवर्स सर्च करने पर राहुल गांधी द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष पद का नामांकन भरते हुए एक फोटो आती है। 4 दिसंबर, 2017 को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक खबर में यह फोटो लगाई गई है। इसमें राहुल गांधी के पीछे महात्मा गांधी की तस्वीर लगी हुई है। यह फोटो कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी है। फोटो में राहुल के साथ मनमोहन सिंह, ज्योतिरादित्य सिन्हा, सिद्धारमैया, आनंद शर्मा जैसे कई कांग्रेसी नेता भी नजर आ रहे हैं।

यह रही असली तस्वीर-

इस तरह की तस्वीरों का इस्तेमाल ट्रोलिंग से लेकर छवि धूमिल करने के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा है। फेक न्यूज के इस दौर में लिखे हुए शब्द भले थोड़ा देर से पहुंचते हों, इस तरह की तस्वीरें तुरंत व्हाट्सएप के गलियारों में चक्कर लगाने लगती हैं और लोग इन्हीं के सहारे अपनी धारणाएं बना लेते हैं। इस तरह के फेक न्यूज फैलाने वालों में एक पैटर्न है। ये लोग ज्यादातर सत्ता पक्ष या उसकी विचारधारा के समर्थक दिखाई देते हैं। ट्रोलिंग करने वालों में भी ऐसे लोगों की भारी संख्या मौजूद है।

राहुल गांधी ऐसे ट्रोल, फेक न्यूज और फोटोशॉप्ड तस्वीरों का पहले भी शिकार होते रहे हैं। ताजा उदाहरण उनके कांग्रेस को 'मुस्लिम पार्टी' बताने को लेकर है। एक अखबार इंकलाब के हवाले से रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने उन पर आरोप लगाया था कि मुस्लिम बुद्धिजीवियों की एक बैठक में राहुल गांधी ने यह बात कही जबकि बैठक में मौजूद कई लोगों ने इस बात से इनकार किया है कि राहुल ने ऐसी कोई बात नहीं कही थी।

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