पद्मश्री डॉ. विजय प्रकाश सिंह

बिहार की चिकित्सा जगत में बिग हॉस्पिटल की दस्तक

पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग में प्रोफ़ेसर सह विभागाध्यक्ष पद्मश्री डॉ विजय प्रकाश सिंह बिहार की चिकित्सा जगत का जाना माना नाम है। 1954 को बिहार के बांका में जन्मे डॉ.विजय प्रकाश का बचपन संघर्ष और तकलीफों के दौर से गुज़रा। बिहार पुलिस में कॉन्स्टेबल और फिर सब-इंस्पेक्टर रहे विजय के पिता की मृत्यु 1972 में सरकारी नौकरी के दौरान ही हो गयी थी, ऐसे में पढ़ाई को जारी रखने में विजय को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अत्यंत मेघावी छात्र के रूप में पहचान रखने वाले विजय प्रकाश ने 1971 में रांची विश्वविधालय द्वारा आयोजित आई.एस.सी की परीक्षा में न केवल टॉपर रहे बल्कि विजय को पटना मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री के साथ 1978 में सर्वश्रेस्ठ स्नातक के रूप में सम्मानित भी किया गया। अपनी बेहतर चिकित्सा के दम पर डॉ.विजय प्रकाश सिंह ने प्रदेश की चिकित्सा जगत में जो अमिट छाप छोड़ी है वो अद्भुत भी है और बेमिसाल भी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की बिहार इकाई से जुड़े कई सदस्य बताते हैं की डॉ.प्रकाश ने हमेशा से कुछ बड़ा और कुछ अलग करने का प्रयास किया और इस कड़ी में डॉ.विजय प्रकाश द्वारा पटना में संचालित बिग हॉस्पिटल इसका एक बेहतरीन उदाहरण है जहाँ हर तबके से आने वाले मरीज़ों के इलाज की समुचित व्यवस्था है। डॉ.विजय प्रकाश की बेहतर चिकित्सा और कामों को ध्यान में रखकर साल 2003 में उन्हें भारत के तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति डॉ.ए पी जे अब्दुल कलाम के हाथों पद्मश्री देकर सम्मानित किया गया इसके अलावा डॉ.प्रकाश की उपलब्धियों को देखते हुए दिसंबर 2018 में आउटलुक पत्रिका समूह द्वारा उन्हे "आइकॉन्स ऑफ़ बिहार" अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है

बतौर प्रतिभाशाली छात्र डॉ. विजय प्रकाश ने राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड से एनबीआई में डिप्लोमा हासिल किया और उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए लंदन के रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन का रुख किया। उन्होंने कॉलेज में महज साढ़े चार महीने की अवधि के दौरान 1988 में जब एमआरसीपी की उपाधि हासिल की, तो इससे न सिर्फ उनके परिवार बल्कि बिहार का भी सम्मान बढ़ा। सूत्रों के अनुसार, डॉ. विजय प्रकाश के 20 शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने 20 वर्ष तक पीएमसीएच में स्नातकोत्तर शिक्षक के रूप में अपनी सेवा के दौरान 40 से अधिक शोध कार्यों का पर्यवेक्षण किया। उन्हें चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्‍ट योगदान के लिए 2003 में तत्कालीन राष्ट्रपति ए.पी.जे अब्दुल कलाम द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। डॉ. विजय प्रकाश कहते हैं कि उन्होंने अपने लंबे मेडिकल करियर के दौरान पाया कि बेहतर, सुव्यवस्थित, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में बिहार, झारखंड और अन्य ऐसे राज्यों के मरीज दिल्ली, मुंबई और दूसरे विकसित राज्यों की ओर रुख करते हैं। इसलिए, उन्होंने एक अच्छे निजी अस्पताल की जरूरत महसूस की, ताकि मरीजों को व्यवहारिक और किफायती इलाज उपलब्ध कराकर उन्हें बड़े शहरों की ओर पलायन से रोका जा सके। इसने उन्हें पटना के अगमकुआं में मल्टी सुपर-स्पेशलिटी बिग हॉस्पिटल स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।

वर्ष 1954 में बांका सदर अस्पताल में जन्मे डॉ. विजय प्रकाश सिंह को बचपन में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बिहार पुलिस में एक कांस्टेबल और फिर सब-इंस्पेक्टर रहे डॉ. विजय के पिता की 1972 में नौकरी के दौरान ही मृत्यु हो गई। विजय के बड़े भाई को परिवार की जिम्मेदारियां निभानी पड़ी और कठिनाइयों से जूझते हुए उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। अपने माता-पिता की तीसरी संतान विजय प्रकाश की पढ़ाई में गहरी रुचि थी और वे अपने छात्र जीवन में स्कूलों द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में पहला स्थान हासिल करते थे।

परिवार के सदस्यों के अनुसार, विजय ने अपना बचपन भागलपुर के पास कहलगांव में बिताया। उन्होंने रांची के पास नेतरहाट विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में भाग लिया और उसमें टॉप किया। चूंकि वह एक प्रतिभाशाली छात्र थे, तो उनका परिवार चाहता था कि वह एक डॉक्टर बनें। उन्होंने परिवारवालों की भावनाओं का सम्मान किया और अगले दो दशकों में एमबीबीएस, एमडी और एमआरसीपी जैसी डिग्री हासिल की।

प्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट पद्मश्री डॉ. विजय प्रकाश एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया, इंडियन एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल मेडिसिन, इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी ऑफ इंडिया और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जैसी विभिन्न संस्थाओं के आजीवन सदस्य हैं। उन्होंने लंबे समय तक इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के बिहार चैप्टर में सचिव और अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है। उन्हें 1986 में पटना में इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी द्वारा पटना में आयोजित एक संयुक्त संगोष्ठी के सफल आयोजन के साथ एक संयुक्त आयोजन सचिव के रूप में कार्य करने की मान्यता प्राप्त है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डॉ. विजय प्रकाश न सिर्फ एक सफल चिकित्सक हैं, बल्कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय है। एक प्रसिद्ध चिकित्सक और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की बिहार इकाई के अध्यक्ष का कहना है कि डॉ. विजय प्रकाश ने पीजीआई, चंडीगढ़ की स्थायी शैक्षणिक समिति, राष्ट्रीय परीक्षा की संचालन परिषद, भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में समिति, पटना विश्वविद्यालय में चिकित्सा संकाय और आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के निर्वाचित सदस्य के रूप में सराहनीय काम किया। पिछले 20 वर्षों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाओं, सेमिनारों और सम्मेलनों में 16 पत्रों की प्रस्तुति के साथ स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के अध्ययन में एक प्रोफेसर के रूप में सक्रिय रहे हैं।

वैसे भी न केवल राज्यों के मरीजों बल्कि चिकित्सा जगत ने भी डॉ. विजय प्रकाश के आधुनिक बिग हॉस्पिटल के नए परिसर का इंतजार किया, जिसका हाल में उद्‍घाटन हुआ। यह दस मंजिला अस्पताल बिहार के चिकित्सा क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा।