श्रीमती श्यामली नारायण

ज़िद और जुनून से मिली शोहरत

ज़िद, संघर्ष और जुनून का दुसरा नाम श्यामली नारायण है। रसोई की दुनिया में अपनी अलग पहचान रखने वाली इस महिला ने महज़ दो साल में ही अपने यू-ट्‍यूब चैनल के जरिए करोड़ों लोगों के दिलों पर राज़ किया और आज श्यामली किचन के नाम से संचालित उनके चैनल के न केवल 8 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं बल्कि 11 करोड़ के आसपास व्यूज भी हैं

उनके बेहतर काम और चैनल की तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता को देखकर यू-ट्‍यूब द्वारा अभी हाल ही में उन्हें सिल्वर प्ले बटन देकर सम्मानित भी किया गया। भारतीय जनता पार्टी से तीन बार लोकसभा के सांसद रहे श्यामली के पिता स्व.इश्वर चौधरी की 15 मई, 1991 को बिहार के गया में ह्त्या कर दी गई, उस वक़्त श्यामली महज 9 साल की थीं। कमज़ोर आर्थिक हालत के बीच श्यामली की माँ नागेश्वरी देवी ने अपने सभी बच्चों को अच्छी तालीम दिलाई और बाद के सालों में श्यामली ने घर-घर जाकर ट्यूशन पढ़ाना आरम्भ किया।

गया जिले के गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल में शिक्षिका रह चुकी श्यामली का विवाह 2009 में भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी श्रीनिवास नारायण के साथ संम्पन्न हुआ और सरकारी नौकरी का त्याग कर श्यामली पटना आ गयी। होम मेकर रहते हुए श्यामली में कुछ बड़ा करने की चाहत थी, ऐसे में बड़ी बहन सुशीला ने श्यामली को रास्ता दिखाया और उन्होंने मास्टरशेफ बनने का फैसला लिया। ए बी सी कुकिंग क्लास का सफलता पूर्वक संचालन कर चुकी श्यामली ने बिग मैजिक चैनल द्वारा आयोजित कुकिंग शो रसोई की रानी में प्रतिभागी के तौर पर शिरकत की और विनर भी रही। उपरोक्त चैनल ने सभी विजेताओं को फाइनल राउंड के लिए पुनः मुंबई आमंत्रित किया जहाँ प्रसिद्ध मास्टर शेफ रिपु दमन हांडा, श्यामली द्वारा तैयार लज़ीज़ व्यंजनों के कायल हुए और श्यामली एक बार फिर इस शो की विनर बनी।

दिल्ली में जन्मी श्यामली की प्रारम्भिक शिक्षा दिल्ली के गोल मार्केट स्थित केन्द्रीय विद्यालय में हुई लेकिन मई 1991 में क्षेत्र भ्रमण के दौरान उनके पिता की हत्या के बाद पूरा परिवार वापस मानपुर लौट आया और इसके साथ ही शुरू हुआ संघर्ष और तकलीफों का सिलसिला। 1995 में गया के एक निजी विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा पास करने के उपरान्त श्यामली का दाखिला इसी शहर के प्रसिद्ध महिला कॉलेज में हुआ और इसी महाविद्यालय से आई एस सी करने के उपरान्त 2005 में श्यामली ने इतिहास में ऑनर्स किया।

परिवार की खराब माली हालत को देखते हुए श्यामली ने लम्बे वक़्त तक निजी ट्‍युशन का सहारा लिया और आखिरकार उन्हें गया के गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल में बतौर शिक्षिका पढ़ाने का अवसर मिला। साल 2009 में श्यामली का विवाह भारतीय स्टेट बैंक के वरिष्ठ अधिकारी श्रीनिवास नारायण के साथ संपन्न हुआ और श्यामली सरकारी नौकरी का त्याग कर पटना आ गयी। श्यामली के पति श्रीनिवास कहते हैं ‌िक होममेकर के तौर पर श्यामली ने इस परिवार के लिए जो कुछ भी किया, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। हमारे दो पुत्रों प्रभात रंजन और राहुल रंजन के अलावा हमारी लाड़ली मानशी प्रिया की हर छोटी से छोटी खुशियों का ख्याल किया है श्यामली ने।

सालों से हम सभी ये महसूस कर रहे थे ‌िक श्यामली अपने अंदर की प्रतिभा को दुनिया के सामने लाने को बैचैन हैं ऐसे में हम सभी ने उसे सहयोग करने का फैसला लिया। श्रीनिवास आगे कहते हैं ‌िक श्यामली ने कैमरे के सामने घंटों खड़े होकर कुकिंग से सम्बंधित कई एपिसोड तैयार किये। लम्बे समय तक उन्हें सफलता हाथ नहीं लगी लेकिन हमने कभी उन्हें निराश होते नहीं देखा। शायद उन्हें खुद पर पूरा एतबार था और यही वजह है ‌िक उनकी ज़िद के आगे वक्त ने भी घुटने टेक दिए। मुझे अपनी पत्नी पर नाज़ है और मैं गर्व से कहता हूँ ‌िक मैं श्यामली का पति हूँ।

श्यामली किचन को लेकर दिए गए एक सवाल का जवाब देते हुए श्यामली कहती है कि मैं इसका सारा श्रेय अपनी बड़ी बहन सुशीला नारायण, अपने पति श्री निवास नारायण और अपने परिवार के सदस्यों को देना चाहूंगी जिनके मार्गदर्शन ने मुझे इस मुक़ाम तक पहुंचाया। श्यामली की बहन सुशीला नारायण जानती थी ‌िक श्यामली की स्वादिस्ट व्यंजन तैयार करने में गहरी रूचि है ऐसे में सुशीला ने उनदिनों स्टार प्लस पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक मास्टर शेफ की ओर श्यामली का ध्यान खींचा। वे चाहती थीं ‌िक श्यामली टेलीविज़न पर दिखे। ऐसे में श्यामली ने भी जागती आँखों से सपना देखना शुरू कर दिया और देखते ही देखते दोनों बहनों का यह सपना हकीकत में तब्दील होने लगा।

सुशीला कहती हैं ‌िक श्यामली के भीतर ज़िद और जुनून तो हमने बचपन से ही देखा था लेकिन बदलते वक़्त के साथ वो कही दब सा गया था जिससे बाहर निकलना शायद श्यामली के लिए भी आसान न था। शुरुआती दिनों में श्यामली तीन रेसिपी प्रतिदिन याद किया करती और उसे अलग तरीके से बनाने का प्रयास भी करती। कुछ ही समय बाद श्यामली ने ए बी सी कुकिंग क्लास के नाम से स्वयं का एक प्रशिक्षण संस्थान शुरू किया और इन सभी के पीछे श्यामली की एक ही तम्मन्ना थी। स्टार प्लस पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक मास्टर शेफ में शामिल होकर संजीव कपूर तक पहुँच बनाना और कुछ बेहतर और अलग करना।

2016 में बिग मैजिक चैनल पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम रसोई की रानी में जब श्यामली विनर बनी तब चैनल द्वारा उन्हें मुंबई आने का निमंत्रण मिला। मुंबई में चैनल द्वारा आयोजित भव्य शो में भारत के जाने-माने शेफ रिपु दमन हांडा ने श्यामली के काम को सराहा और श्यामली इस शो में एक बार फिर फिर विनर रहीं। श्यामली कहती हैं ‌िक इस शो में मिली सफलता के बाद मुझे कुकिंग शो से संबंधित काम के कई बड़े ऑफर मिले लेकिन परिवार को छोड़ मुंबई में काम करना मेरे लिए आसान न था, ऐसे में मुझे वापस पटना लौटना पड़ा।

जानकार बताते हैं ‌िक बिहार जैसे राज्य में कुकिंग व्यवसाय को प्रमोट करने के लिए न तो किसी प्रकार की सरकारी योजना है और न ही इसके प्रोमोशन से संबंधित इवेंट की व्यवस्था। ऐसे में यह व्यवसाय आज प्रदेश में हाशिए पर पड़ा है। बाहर के प्रदेशों में इस विषय की पढ़ाई और प्रशिक्षण की अच्छी व्यवस्था है और इसके दम पर लोग अच्छी नौकरी भी हासिल कर लेते हैं, लेकिन बिहार की इस बेटी ने आज जिस प्रकार कुकिंग क्लास और इससे संबंधित प्रशिक्षण लिए बगैर शेफ कोट और सेलिब्रिटी शेफ तक का जो सफर तय किया है वो काबिले-तारीफ़ है।

श्यामली बताती हैं कि पति और बच्चों के अलावा मैं खुद की ज़िन्दगी भी जीना चाहती थी, ऐसे में बगैर डिग्री के शेफ बनना काफी मुश्किल था। अपनी छिपी पहचान को दुनिया के सामने लाने की मेरी ज़िद मुझपर इस कदर हावी रही ‌िक सबकुछ कैसे बदलता चला गया यह पता ही नहीं चला! श्यामली कहती हैं कि अगस्त 2017 में जब मैंने श्यामली किचन के नाम से अपने यू-ट्‍यूब चैनल की शुरुआत की थी उस वक़्त 100 विडियो अपलोड किये जाने तक हमारा न तो कोई व्यू था और न ही सब्सक्राइबर। पड़ोसियों से मिलने वाले तानों के बीच यदि मेरे पास कुछ था सिर्फ परिवार का साथ और
सफल होने की ज़िद और इन्हीं रास्तों पर चलते हुए आज हमारे चैनल के 8 लाख से अधिक सब्सक्राइबर और 10 करोड़ से अधिक व्यू हैं। साल 2018 में श्यामली
नारायण ने इजी होम रेसिपी चैनल के नाम से एक अन्य चैनल की भी शुरुआत की है जिसके दर्शकों की संख्या में तेज़ी से इज़ाफ़ा हो रहा है।

बहरहाल, छोलनी और कड़ाई को अपना हथियार बना चुकी श्यामली नारायण कहती हैं कि महिलाओं के अंदर एक छिपी हुई शक्ति होती है और यदि कोई गृहिणी कुछ करने की ठान ले तो कुछ भी नामुमकिन नहीं। मैं अपने करोड़ों दर्शकों से यही कहना चाहूंगी ‌िक जीत का असली मज़ा तब है जब लोग आपके हारने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हों। जो इंसान लाचार होते हुवे भी मन से नहीं हारता, उसे दुनिया की कोई ताकत हरा नहीं सकती। मैं रहूं या न रहूं लेकिन अपने काम, अपनी शक्ल और आवाज़ के रूप में मैं सदैव अपने दर्शकों के सामने रहूंगी।