संजय चौधरी

पानी को बनाया मनोरंजन का हथियार


तक्षशिला सीज एेंड रिसोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन और पटना के संपतचक स्थित फैंटेसिया वाटर पार्क की शुरुआत करने वाले संजय चौधरी का पूरा जीवन संघर्षमय रहा है। बिहार में डुमरांव के निकट एकरासी गाँव के मूल निवासी संजय का जन्म उनकी ननिहाल समस्तीपुर में हुआ। संजय के पिता महेंद्र चौधरी पतरातू थर्मल प्लांट में फोरमैन के तौर पर कार्यरत रहे, ऐसे में उनकी प्रारम्भिक शिक्षा समस्तीपुर स्थित केंद्रीय विद्यालय में हुई और उन्होंने यहीं से मैट्रिक और फिर बारहवीं तक की पढ़ाई की। 90 के दशक में संजय चौधरी ने कलकत्ता स्थित डी एमईटी यानी डायरेक्टर ऑफ़ मेरीन इंजीनियरिंग में अपना नामांकन करवाया और 1995 में बी टेक की डिग्री हासिल कर मेरिन इन्जीनियर बने। इसी साल इंग्लैंड के ग्लास्गो स्थित प्रसिद्ध शिपिंग कंपनी एककोमेरिट से संजय को नौकरी का ऑफर मिला और वे 6 माह के कॉन्ट्रेक्ट के साथ इस कंपनी के मालवाहक जहाज़ एम वी पोनी पर सवार हो गए

संजय कुमार चौधरी, बिहार के उभरते युवा व्यवसायी हैं। उन्होंने अपनी बी-टेक (मरीन इंजीनियर) की डिग्री डी. मेट कोलकता से प्राप्त की। बिल्कुल साधारण परिवार से संबंध रखने वाले चौधरी, प्रारंभ से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी रहे हैं। इनकी माता रेश्मा देवी एक सामान्य गृहणी हैं, जबकि पिता पतरातू थर्मल पावर स्टेश्न से रिटायर फोरमेन हैं। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा अपने मामा श्री महेन्द्र चौधरी, जो समस्तीपुर रेलवे स्टेश्न के एएसएम थे वहाँ रह कर पुरी की।

स्वावलंबन इनके जीवन का मूल मंत्र रहा है। डीमेट में पढ़ाई करते हुए उन्होंने पढ़ाई का खर्च अपने उपार्जन से पूरा किया। बी टेक डिग्री प्राप्त करने के पश्चात वे अलग अलग शिपिंग कंपनियो में उन्होंने अपनी सेवा दी और चीफ इंजीनियर की उँचाई तक पहुँचे, पर नौकरी करना उन्हें पसंद नहीं था, वे दूसरों को नौकरी देना पसंद करते थे। मानसिक स्तर पर व्यवसाय को अपना लक्ष्य निर्धारित कर लिया। यहीं से उनके संघर्ष की कहानी शुरू होती है। 2008 में प्रोफेशनल शिपिंग मैनेजमेंट के रूप में उन्होंने एक कंपनी की शुरूवात की। यह कंपनी सेवा-प्रदायी कंपनी थी। इस क्रम में इस कंपनी ने पॉयलट बोट की सेवा प्रदान करने हेतु स्वयं बोट निर्मित कीे। श्री चौधरी ने अपने इनोवेशन के द्वारा बोट निर्मान की लागत बहुत कम कर अपकी प्रतिभा का परिचय दिया। इस कंपनी के प्रारंभ करने से संचालित करने तक उन्हें आर्थिक संसाधनों की कमी से झुझना पड़ा, पर उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा। संघर्ष एक जीवन दृष्टि देती है, साथ ही मानवीय तथा सामाजिक मूल्यों को परखने का एक अर्न्तदृष्टि भी देती है। श्री चौधरी ने इस संधर्ष से जो जीवन दृक्षत होता है। व्यवसाय इनके लिए लाभ का फलसफा नहीं है बल्कि इनके लिए आर्थिक निर्माण का साधन है। इसी का परिणाम है ‘फंटेशिया वाटर पार्क’ जो बिहार एवं झारखण्ड जैसे पिछडे है। फंटेशिया वाटर पार्क ‘बिहार तथा समीपवर्ती राज्य के लोगों के लिये मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण साधन तो है ही, साथ ही साथ यह कई महिलाओं तथा बालिकाओं को विशेष छूट इसके अन्य आयाम हैं। रोजगार सृजन में इस पार्क के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। चौधरी अपनी व्यावसायिक गतिविधि को झारखण्ड में भी जीवंत करने के लिए प्रयासरत है।

पटना के ललित नारायण मिथिला इंस्टीट्यूट से एमबीए और मानव संसाधन में पीएचडी कर चुकी संजय चौधरी की पत्नी नूतन कुमारी और उनकी दो बेिटयाँ वियंका एवं वाणी उनके इस संघर्ष में हमेशा साथ रही विशाल वाटर पार्क का प्रबंधन एवं सूरक्षा को देखकर इतना तो कहा ही जा सकता है कि वह सफल प्रबंधक तथा इस इलाके के लिए जिम्मेवार अभिभावक की भूमिका सशक्त रूप से निभा रहें हैं। निश्चय ही श्री चौधरी बिहार के मिट्टी के लाल हैं और बिहारी होने पर उन्हें गर्व है।