प्रियम्वद सिंह

मार्केटिंग का दिग्गज


बिहार के बेगूसराय जिले के मूल निवासी और अपने ज़माने के ख्यातिप्राप्त साहित्यकार और टी.एन.बी कॉलेज भागलपुर में प्रोफेसर रहे रामसागर प्रसाद सिंह के पुत्र प्रियम्वद सिंह का नाम आज बिहार की उन चंद हस्तियों में शुमार है जिन्होंने अपनी सूझबूझ, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिश्रम की बदौलत न केवल अपनी एक अलग पहचान बनाई बल्कि डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री के सिरमौर कहे जाने वाले एमवे के व्यापार में डबल डायमंड का खिताब अपने नाम कर देश में सर्वोच्च दूसरा स्थान हासिल किया। उनकी उपलब्धियों को ध्यान में रखकर जुलाई 2014, 2017-18 और 2018-19 में एमवे द्वारा प्रकाशित पत्रिका एमाग्राम के कवर पेज पर न केवल इस जोड़े की तस्वीरों के साथ इनकी सफलता की कहानी दी गई बल्कि इंडिया टुडे के जून 2019 के ताज़ा अंक में प्रियम्वद सिंह के इंटरव्यू को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है

प्रियम्वद सिंह का जन्म बिहार के बेगूसराय जिले के पहसारा गाँव में हुआ किन्तु उनकी प्रारंभिक शिक्षा कहलगांव एवं भागलपुर में हुई। प्रियम्वद ने मेकेनिकल इन्जीनियरिंग की पढ़ाई एम.आई.टी मुजफ्फरपुर से पूरी कर इन्जीनियरिंग की नौकरी नहीं की एवं अपने सपनों को नई उड़ान देने और अपने राज्य बिहार में कुछ कर गुजरने की चाहत के बीच बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की और बिहार वित्त सेवा (सेल्स टैक्स) में नौकरशाह बने। सरकारी नौकरी में रहते हुए प्रियम्वद ने टैक्स सुधार, वैट सेल, विश्व बैंक की टीम के
साथ प्रशिक्षण का काम एवं आप्त सचिव के रूप में परिवहन एवं कला संस्कृति एवं युवा विभाग में अपना योगदान दिया।

साथ ही राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा निजी संस्थानों में अलग-अलग विषयों पर छात्रों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षित एवं प्रेरित करने में भी इनकी भूमिका अग्रणी रही लेकिन प्रियम्वद सिंह का सफर यहीं नहीं थमा। उनके परिवार के सदस्य बताते हैं ‌िक प्रियम्वद के दिलो-दिमाग में अपनी शर्तों पर आज़ाद और निर्बाध ज़िन्दगी जीने के साथ कुछ बड़ा करने की ख्वाहिश हमेशा से रही।

गुज़रे ज़माने को याद कर प्रियम्वद सिंह कहते हैं ‌िक वह भी एक वक़्त था जब मैं शाम के समय ईस्ट एंड वेस्ट नामक आई.ए.एस कोचिंग इंस्टिट्‍यूट में वहां के छात्रों को पढ़ाने का काम करता था, उसी दौरान साल 2001 में मेरी पत्नी सुनीता ने विश्व के 100 से ज़्यादा देशों में संयुक्त डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री के सिरमौर एमवे के अवसर को देखा और नौकरी के बाद खाली बचे समय में शाम के वक़्त सुनीता और प्रियम्वद ने इस काम को शुरू किया।
 
कौशल विकास, स्वरोजगार, नेतृत्व विकास, देश-विदेश की लोकप्रियता तथा राज्य के विकास में योगदान जैसी संभावनाओं को समझ प्रियम्वद अभिभूत हो गए और उन्होंने लोगों की ज़िन्दगी बदलने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने का निर्णय लिया। दिन, महीने और साल बदलते गए और बदलते वक़्त के साथ प्रियम्वद ने वह सब कुछ हासिल किया जिसे पैसे से खरीदा जा सकता था और वह सब भी जिसे पैसे से कभी खरीदा नहीं जा सकता।

एक प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर प्रियम्वद की छवि अब न केवल लोगों को प्रभावित कर रही थी बल्कि लाखों की संख्या में वैसे लोग भी सामने आने लगे जो उनकी छवि में खुद को तलाश रहे थे।

तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता के बीच साल 2009 में यह खबर मिली ‌िक प्रियम्वद सिंह ने बिहार-झारखंड में पहले डायमंड का खिताब अपने नाम कर लिया है। इस खबर ने एमवे बिज़नेस से जुड़े लाखों लोगों का न केवल उत्साह बढ़ाया बल्कि खुद प्रियम्वद सिंह की गिनती डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्रीज से जुड़े देश के सर्वश्रेष्ठ लोगों में की जाने लगी। अपने कठिन परिश्रम के बूते डायमंड के शिखर पर पहुँचने वाले प्रियम्वद सिंह ने कभी पलट कर पीछे नहीं देखा और विगत दस वर्षों में हिन्दुस्तान के सफलतम शीर्ष तीन लोगों में उनका नाम शुमार है और आज प्रियम्वद सिंह एमवे के डायरेक्ट सेलिंग के व्यापार में डबल डायमंड है। एमवे के व्यापार से जुड़े जानकारों का मानना है कि हज़ारों लोगों की जीवन शैली में बदलाव एवं बिहार के कौशल विकास और जी.डी.पी में प्रियम्वद सिंह के आंशिक योगदान से इनकार नहीं किया जा सकता।

प्रियम्वद की उद्यमिता एकांगी नहीं रही। 2011 में अपनी वरीय सरकारी नौकरी का त्याग कर उन्होंने अपने कुछ महत्वाकांक्षी मित्रों के साथ पटना जिले के बिहटा में प्राइवेट फ्रेट टर्मिनल यानी रेलवे साइडिंग के निर्माण में महती भूमिका निभाई जो आज बिहार के व्यवसायियों के लिए देश भर से माल ढुलाई का लोकप्रिय प्लेटफार्म है। प्रियम्वद ने बिहार और झारखंड में रिटेल-आउटलेट का बढ़िया प्लेटफार्म भी तैयार किया है जो पटना, मुजफ्फरपुर, देवघर और धनबाद में विभिन्न ब्रांडों
यथा एडिडास, खादिम, वी.आई.पी आदि के रूप में कार्यरत है।

प्रियम्वद की पत्नी सुनीता कहती हैं ‌िक उनके पति का शरीर यदि व्यवसाय और लोगों की ज़िन्दगियों को बदलने में लगा रहा तो उनकी आत्मा लिखने-पढ़ने और लोगों को प्रेरित करने से जुडी रही है।

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अपनी कविताओं और लेखनी के माध्यम से पाठकों के सामने रहे प्रियम्वद को विश्व भर के लाखों लोग उनकी सी.डी,यू-ट्‍यूब एवं सेमीनार से उनके जीवन को प्रकाशित करने में लगे हैं। प्रियम्वद ने दुनिया के 40 से ज़्यादा देशों का भ्रमण किया है और एक अदभुत वक़्ता के तौर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

आज प्रियम्वद न केवल युवाओं के आदर्श के रूप में लोगों के सामने हैं बल्कि उनका करिश्माई व्यक्तित्व भी लोगों को अपनी ओर खींचता है। बातचीत के क्रम में प्रियम्वद कहते हैं ‌िक मेरा सपना है ‌िक बिहार का प्रत्येक जिला स्वरोजगार और उद्यमिता से भरपूर हो एवं डायरेक्ट सेलिंग और कौशल विकास के माध्यम से लाखों लोग एक शानदार ज़िन्दगी जी सकें और बिहार का नाम देश के पहले पायदान पर हो।