प्रोफेसर के.सी. सिन्हा

गणित के महागुरु

बिहार पीढि़यों से अपनी बौद्धिक संपदा के लिए प्रसिद्ध है। प्रोफेसर के.सी. सिन्‍हा एक ऐसा ही चमकता सितारा हैं जिन्‍होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपना अलग मुकाम बनाया है। प्रतियोगी परीक्षाओं, स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों के लिए गणित की कई लोकप्रिय किताबों के लेखक प्रोफेसर सिन्‍हा पिछले तीन दशक से बिहार की चर्चित हस्‍ती बने हुए हैं। अपने शिक्षण एवं अपनी किताबों के जरिये वे न सिर्फ बिहार बल्कि देश के बाकी हिस्‍से में भी नई पीढ़ी के भविष्‍य को आकार देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

पटना विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रो. के सी सिन्हा वर्तमान में पटना साईंस कॉलेज के प्राचार्य और पटना विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के डीन एवं पूर्व में पटना यूनिवर्सिटी में गणित विभाग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। प्रो सिन्हा शिक्षण, लेखन और भविष्य के शिक्षकों को तैयार करने में सक्रिय रूप से शामिल हैं। प्रो सिन्हा पीएचडी के कई छात्रों को गाइड कर रहे हैं और उनके मार्गदर्शन में कई छात्रों ने पीएचडी की उपाधि हासिल की है। खुद प्रोफ़ेसर सिन्हा कहते हैं," मैं अपने काम का पूरा आनंद लेता हूँ और मैंने रिटायर होने की योजना कभी नहीं बनाई"। प्रोफेसर के.सी. सिन्हा का जन्म बिहार के एक छोटे से शहर आरा के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। चार भाइयों और दो बहनों में से एक प्रोफेसर सिन्‍हा की औपचारिक शिक्षा उनके 9 वर्ष पूरा करने के बाद शुरू हुई। उन्‍होंने आरा के जिला स्‍कूल से अपनी स्‍कूली शिक्षा पूरी की। घर में पैसे की कमी को देखते हुए उन्‍हें आरंभ में ही लग गया था कि इस स्थिति से पार पाने का एकमात्र तरीका शिक्षा ही है। वे पटना से उच्‍च शिक्षा लेना चाहते थे और इसके लिए उन्‍हें छात्रवृत्ति की जरूरत थी। इसके लिए उन्‍होंने कड़ी मेहनत की। हाई स्‍कूल के बाद उन्होंने पटना साइंस कॉलेज में प्रवेश लिया और बी.एससी (ऑनर्स) और एमएससी के इम्तिहान में टॉपर रहते हुए गोल्ड मेडलिस्ट बने।

उन्‍होंने शिक्षण में अपने कॅरिअर की शुरुआत 1977 में एक लेक्चरर के रूप में आरा में एचडी जैन कॉलेज ज्वाइन करने के साथ की। इसके दो साल बाद उनकी शादी हो गई और 1983 में उन्‍होंने पटना विश्वविद्यालय ज्वाइन कर लिया, जहां पर एक शिक्षक और लेखक के रूप में उनकी ख्याति फैलने लगी। उनकी पहली पुस्तक 1982 में आई और कुछ वर्षों में में ही यह पुस्‍तक आईआईटी-जेईई के उम्मीदवारों के बीच लोकप्रिय हो गई। इसी दौरान उन्‍होंने अपनी पीएचडी की और 1990 का साल आते-आते उनकी लिखी कई किताबें छात्रों के बीच लोकप्रिय हो चुकी थीं। उनकी किताबों की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके पुराने छात्रों में से एक, जो फिल्म-निर्माण के क्षेत्र में हैं, ने हाल में एक यू-ट्‍यूब वीडियो बनाया जिसमें बताया गया है कि उनकी किताबों ने छात्रों के जीवन को कितना प्रभावित किया है। स्‍वाभाविक रूप से ये वीडियो वायरल हो गया। बेहद विनम्र और मिलनसार चरित्र वाले के.सी. सिन्हा की सोशल मीडिया में भी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। उनके आधिकारिक फेसबुक पेज पर हजारों प्रशंसक हैं। उनकी सफलता का राज बदलावों के मुताबिक खुद को ढालने और उसके हिसाब से नतीजे देने की क्षमता में है। जब आईआईटी बोर्ड ने जेईई के लिए परीक्षाओं के पैटर्न को बदल दिया, तो एक साल के भीतर ही प्रोफेसर सिन्हा आईआईटी-जेईई मेन और एडवांस के लिए अपनी अब तक की लोकप्रिय एडुवाइजर पुस्तक  शृंखला लेकर आए। अपने छात्रों की बदलती जरूरतों के अनुकूल प्रासंगिक सामग्री मुहैया कराने के कारण उन्हें खुद को प्रतिस्‍पर्धी माहौल में बनाए रखने में कामयाबी मिली।

प्रोफेसर सिन्हा टेक्‍नोलॉजी के भी फैन हैं क्‍योंकि इसे वे दूर-दराज के छात्रों तक पहुंच बनाने के माध्‍यम के रूप में देखते हैं। उनके तीनों बेटे अनुराग, अभिषेक और अंकित आईआईटी शिक्षित इंजीनियर और तकनीक के विशेषज्ञ हैं जिनके कारण प्रोफेसर सिन्‍हा की महत्‍वाकांक्षाओं को मदद मिली है। वे कहते हैं, ‘2019 में विश्वविद्यालय से प्रोफेसर के रूप में अपने पद से सेवानिवृत्त होने के बाद मेरे पास करने के लिए बड़ी योजनाएं हैं। मेरी 10 साल की कार्ययोजना में शिक्षा को सस्ता, सुलभ और गुणवत्ता युक्त बनाना शामिल है।’ एडुवाइजर पब्लिशिंग ग्रुप, जो कि अब प्रोफेसर सिन्हा की अधिकांश स्कूली और प्रतियोगिता परीक्षा की किताबों को प्रकाशित करता है, ने उनके सपने को पूरा करने के लिए शिक्षा-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की एक फर्म योरट्‍यूटर्स (urTutors) के साथ करार किया है। एडुवाइजर K-12 स्कूल सेगमेंट में विज्ञान और गणित की पुस्तकों को प्रकाशित करने वाला प्रमुख प्रकाशक है और उसने एक ऐसा प्‍लेटफॉर्म बनाने के लिए urTutors.com के साथ साझेदारी की है जहां भविष्‍य के शिक्षकों को प्रशिक्षण एवं शिक्षण संसाधन (ऑनलाइन लर्निंग, शिक्षा में उत्कृष्टता के केंद्रों का विकास के साथ-साथ अन्‍य) को सस्ती दर पर अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके। प्रोफेसर सिन्हा युवा और ऊर्जावान उद्यमियों द्वारा स्थापित इन संगठनों का मार्गदर्शन भी करते हैं ताकि ये बिहार में शिक्षा को बढ़ावा दे सकें और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकें। संयोग से, एडुवाइजर और urTutors.com के सभी संस्थापक बिहार से ही हैं। अपने विस्‍तृत अनुभव और सोच के जरिये प्रोफेसर सिन्‍हा जिन उद्यमियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं, उनके बारे में वे कहते हैं, ‘इन युवाओं के बारे में जो बात मुझे उत्‍साहित करती है वह ये है कि वे आगे बढ़कर चुनौती लेने के लिए तैयार हैं और अपने लक्ष्‍य को लेकर भी पूरी तरह स्‍पष्‍ट हैं। मैं इस बारे में पूरी तरह आश्‍वस्‍त हूं कि गुणवत्‍ता और पारदर्शिता के जरिये शिक्षा में लोकतांत्रिक मूल्‍य लाने की उनकी सोच एवं अपने उत्‍पादों एवं सेवाओं जरिये शिक्षकों एवं छात्रों को एक साथ सशक्‍त बनाने का उनका प्रयास जरूर सफल होगा।’ प्रोफेसर सिन्‍हा के पहले से ही चमकदार कॅरिअर का अगला चरण भी दिलचस्‍प और अनुकरणीय रहने वाला है। वे जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे हैं, समाज को उसका हिस्‍सा वापस करने की प्रेरणा उनमें बढ़ती जा रही है। गांव के बच्‍चों को मिलने वाले अवसरों में कमी, ऐसी ही एक बड़ी समस्‍या है और प्रोफेसर सिन्‍हा जिसका समाधाना करना चाहते हैं। वे अपने कॉन्‍सेप्‍ट वीडियो लेक्‍चर्स तैयार कर रहे हैं और अगले शैक्षणिक सत्र में इन वीडियोज को एक ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म पर रिलीज करने की तैयारी में हैं। वे बिहार के मेधावी बच्‍चों का पलायन रोकना चाहते हैं। अब तक 66 किताबें लिख चुका यह 64 वर्षीय बुजुर्ग शतक लगाने की योजना बनाए बैठा है। क्‍वांटिटेटिव एप्‍टीट्‍यूड पर लिखी उनकी नई किताब को छात्रों ने हाथों-हाथ लिया है और अब प्रोफेसर सिन्‍हा देश में चल रहे पोस्‍ट ग्रेजुएट गण‍ित कोर्स पर अगली किताब लिखने की तैयारी में जुटे हैं। प्रोफेसर सिन्‍हा अपना समय पटना, दिल्‍ली, मुंबई और बेंगलूरू में बिताते हैं क्‍योंकि उनके बच्‍चे वहां बसे हुए हैं। वे इस समय का उपयोग अपने नाती-पोतों के साथ रिलैक्‍स करने के लिए करते हैं। अपनी इस पूरी यात्रा में उन्‍हें अपनी पत्‍नी का पूरा सहयोग मिला है जिन्‍होंने घर को बहुत अच्‍छी तरह संभाला और यह सुनिश्चित किया कि उनके पति का ध्‍यान अपने काम से न भटके। निश्चित रूप से शिक्षा जगत के एक चमकते सितारे के रूप में प्रोफेसर के.सी. सिन्‍हा ने सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि बिहार के लिए भी यश और सम्‍मान अर्जित किया है। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए ही आउटलुक पत्रिका ने उन्‍हें 2018 में ‘आइकन्‍स ऑफ बिहार’ अवार्ड से सम्‍मानित किया।