डॉ. वरुण कुमार

गोली लगने से घायल मरीजों का मसीहा


बिहार की नेपाल सीमा पर स्थित सीतामढ़ी जिले में नंदीपत अस्‍पताल के संचालनकर्ता जनरल और लेप्रोस्‍कोपिक सर्जन डॉक्‍टर वरुण कुमार सीतामढ़ी और उसके आसपास के जिलों में ही नहीं, पड़ोसी देश नेपाल तक गोली लगने से घायल हुए लोगों के लिए उम्‍मीद की किरण बनकर उभरे हैं। 2009 में किराए के कमरे से छोटी-सी शुरुआत कर और कई साल तक संघर्ष का दौर देखने के बाद 2014 में नंदीपत अस्‍पताल के जरिये उन्‍होंने कामयाबी हासिल की। 2014 से पहले तक इस इलाके में गोली लगने से घायल हुए लोगों के इलाज की कोई सुविधा नहीं थी और उन्हें मुजफ्फरपुर या पटना का रुख करना पड़ता था मगर अब डॉक्‍टर कुमार ने इस कमी को पूरी कर दिया है। डॉक्‍टर कुमार अबतक गोली लगने से घायल हुए 100 से अधिक लोगों के शरीर से 105 गोलियां निकाल कर उन्‍हें जिंदगी का वरदान दे चुके हैं। 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र से एन डी ए (जदयू) द्वारा डॉ वरुण को प्रत्याशी बनाया गया लेकिन चिकित्सा (सर्जरी) के प्रति समर्पित डॉ.वरुण ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया

खास बात यह कि इस मामले में उनकी सफलता का प्रतिशत 100 है यानी उनके अस्‍पताल में आया ऐसा कोई भी मरीज अब तक मौत के मुंह में नहीं गया है। इस मामले में उनकी सफलता को देखते हुए ही उन्‍हें गोली डॉक्‍टर कहकर पुकारा जाने लगा है। सामाजिक कार्यों के मामले में भी डॉक्‍टर वरुण कुमार हमेशा आगे रहते हैं।

15 जनवरी, 1976 को जन्‍मे डॉक्‍टर कुमार ने एमबीबीएस की पढ़ाई किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ से की और एमएस की पढ़ाई कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से। पढ़ाई के बाद उन्‍होंने हल्‍द्वानी में नौकरी शुरू की। वहां सीनियर रेजिडेंट और सहायक प्रोफेसर के रूप में काम करने के दौरान उनका जीवन बहुत आराम से चल रहा था मगर खुद डॉक्‍टर वरुण और उनके पिता महेश प्रसाद लोगों को गोली लगने से होने वाली मौत की खबरों को देखकर बहुत व्‍यथित रहा करते थे। महेश प्रसाद कहते हैं कि 2014 से पहले सीतामढ़ी में ऐसा कोई अस्‍पताल नहीं था जहां गोली लगने से घायल हुए लोगों का इलाज हो पाता। ऐसे में मरीजों को मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्‍ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्‍पताल या फ‍िर पटना के पटना मेडिकल कॉलेज अस्‍पताल भेजना ही उपाय था। अकसर ऐसे मरीजों की रास्‍ते में ही मौत हो जाती थी। तब उन्‍होंने अपने बेटे से कहा कि वे अपने सर्जन होने का लाभ जिले को पहुंचाएं और ऐसे मरीजों की मदद करें। यह मुद्दा डॉक्‍टर वरुण को भी परेशान कर रहा था और इसलिए उन्‍होंने अपनी आरामदायक नौकरी छोड़ने और सीतामढ़ी में नए सिरे से संघर्ष करने का फैसला कर लिया। आखिरकार 2009 में उन्‍होंने सीतामढ़ी के डुमरा रोड इलाके में एक मकान किराए पर लेकर सिर्फ छह लोगों के साथ अपने अस्‍पताल की शुरुआत की और अगले चार साल यानी 2013 तक यहीं से काम करते रहे। इस दौरान उनकी पहचान एक काबिल सर्जन के रूप में तो बनी मगर वे जो सपना लेकर आए थे, वह अभी तक पूरा नहीं हुआ था। आरंभ में उनके पास संसाधन भी नहीं थे कि वे आधुनिक उपकरणों से लैस बड़ा अस्‍पताल आरंभ कर पाते।

आखिरकार 2014 में सीतामढ़ी में वर्तमान स्‍थल स्थि‌त पर नंदीपत मेमोरियल हॉ‌िस्‍पटल एवं रिसर्च सेंटर अस्तित्‍व में आया। इसी दौरान नेपाल में मधेशी आंदोलन भड़क उठा। आंदोलन के दौरान एक दिन पुलिस तथा मधेशियों के बीच हुई झड़प में 17 लोग घायल हो गए जिसमें 14 लोगों को पुलिस की गोलियां लगी थीं। इन सभी 14 लोगों को नंदीपत अस्‍पताल लाया गया और डॉक्‍टर वरुण कुमार ने एक ही दिन में इन सभी लोगों का ऑपरेशन कर गोलियां निकाल कर उनकी जिंदगी बचाई! इसके बाद से उनका नाम पूरे इलाके में चमका और उन्‍होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस घटना के बाद से इलाके में गोलीबारी के शिकार हुए लोगों को इलाज के लिए नंदीपत अस्‍पताल लाया जाने लगा और डॉक्‍टर कुमार अबतक ऐसे 100 से अधिक लोगों का इलाज कर चुके हैं।

उन्होंने एक ऐसे मरीज की भी जान बचाई जिससे पूरे शरीर में 18 गोलियां लगी थीं। डॉक्‍टर कुमार के अनुसार उसकी एक किडनी और लिवर भी क्षतिग्रस्‍त हो गया था। पूरे शरीर, हाथ-पैर सभी जगह उसे गोलियां लगी थीं। दरअसल, इस व्‍यक्ति को अपराधियों ने गोलियों से भून दिया था। डॉक्‍टर कुमार ने सारी गोलियां निकालकर उसका ऑपरेशन किया और उसकी जान बचाई। एक गांव के मुखिया संजय कुमार को 4 गोलियां लगी थीं और उसे भी इन्‍होंने बचा लिया। उन्होंने इसके अलावा भी गंभीर रूप से घायल कई लोगों की जान बचाई। एक जनरल और लेप्रोस्‍कोपिक सर्जन होने के कारण डॉक्‍टर कुमार के पास सर्जरी के दूसरे मामले भी आते रहते हैं और उन्‍होंने अबतक अलग-अलग वजहों से जख्‍मी 235 से अधिक मरीजों का इलाज सफलतापूर्वक किया है। डॉक्‍टर कुमार को इस मिशन में अपनी पत्‍नी डॉक्‍टर श्‍वेता का पूरा सहयोग मिलता है। खुद एक प्रसूति, स्‍त्री एवं नि:संतानता रोग विशेषज्ञ डॉक्‍टर श्‍वेता नंदीपत अस्‍पताल का सारा प्रबंधन देखने के साथ-साथ डॉक्‍टर कुमार का घर भी कुशलता पूर्वक संभालती हैं।

डॉक्‍टर कुमार को उनकी उपलब्धियों के कारण सरकार तथा दूसरी संस्‍थाओं से कई सम्‍मान मिले हैं। स्‍थानीय जिलाधिकारी, जिले के प्रभारी मंत्री और सांसद ने उन्‍हें कई बार सम्‍मानित किया है। इसके अलावा नेपाल में भारतीय दूतावास ने नेपाल सरकार से सिफारिश की है कि डॉक्‍टर वरुण को सम्‍मानित किया जाए। साथ ही भारत सरकार को भी राज्‍य सरकार ने इसी आशय की सिफारिश भेजी है। जिले के आला अधिकारी मानते हैं कि डॉक्‍टर वरुण कुमार जो कार्य कर रहे हैं, वह बिलकुल अलग तरह की उपलब्धि है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि गोली लगने से घायल हुए व्‍यक्ति की जान बचाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है और इस चुनौती को अभी तक डॉक्‍टर वरुण कुमार ने सफलतापूर्वक पूरा किया है। डॉ. कुमार को ग्‍लोबल हैल्‍थ स्टडीज न्यूयॉर्क ने बैस्ट सर्जन के अवार्ड से नवाजा है। डॉक्‍टर कुमार सामाजिक कार्यों में भी पूरी तरह समर्पित हैं। हर वर्ष छठ पर्व पर वे व्रतियों के बीच 200 साड़ी और पूजन सामग्री का वितरण करते हैं। उन्‍होंने पुरुष नसबंदी के 177 ऑपरेशन, हार्निया और हाइड्रोसिल के अनगिनत ऑपरेशन किए हैं। बाढ़ आने के दौरान वे राहत शिविर लगाकर बाढ़ पी‍ड़‍ितों के बीच मदद सामग्री का वितरण करते हैं। इसके अलावा ब्‍लड डोनेशन, मरीजों का डायलिसिस करवाने जैसे कार्य भी डॉक्‍टर वरुण समय-समय पर करते रहते हैं।