डॉ. रिदु कुमार शर्मा

अद्‍भुत और बेमिसाल शोहरत के धनी


फरवरी 1982 में पटना के नौबतपुर के कोरावां गाँव के एक किसान परिवार में जन्मे डॉ. रिदु कुमार शर्मा के संघर्ष की कहानी काफी दिलचस्प है। करीब पांच हज़ार की आबादी वाले इस गाँव में दूर-दूर तक कोई डॉक्टर न था। रिदु के पिता अरविन्द कुमार शर्मा पढ़े-लिखे किसान थे और उनकी चाहत थी ‌िक उनका पुत्र पढ़-लिखकर चिकित्सक बने और गरीबों की सेवा करे। रिदु मेघावी छात्र थे लेकिन परिवार की आर्थिक हालत अच्छी न थी। ऐसे में पटना के महेन्द्रू इलाके में एक लॉज में रहकर उन्होंने मेडिकल की तैयारी शुरू की।

कड़ी मेहनत, संघर्ष और बुलंद हौसले के बीच रिदु की मेहनत रंग लाई और आज उनकी गिनती बिहार के प्रमुख ऑन्कोलॉजिस्ट यानी कैंसर रोग विशेषज्ञों में की जाती है।

मगध कैंसर फाउंडेशन के संस्थापक और बिहार के जाने- माने कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रिदु कुमार शर्मा ने अल्पावधि में जो शोहरत हासिल की है वह अद्‍भुत है, और बेमिसाल भी। पटना के नौबतपुर के निकट त्रिभुवन हाई स्कूल से प्राइमरी शिक्षा ग्रहण करने वाले रिदु शर्मा ने इसी विद्यालय से 1997 में मैट्रिक और 1999 में नौबतपुर स्थित मालतीधारी कॉलेज से आई.एस.सी की परीक्षा पास की। डॉ. रिदु कहते हैं ‌िक परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण निजी तौर पर शिक्षक से पढ़ पाना मुश्किल सा था, ऐसे में सारी पढ़ाई मुझे खुद ही करनी पड़ी। पिता अरविन्द कुमार शर्मा चाहते थे ‌िक उनका पुत्र पढ़-लिखकर डॉक्टर बने। ऐसे में पिता की चाहत का सम्मान करना उनका फ़र्ज़ भी था और उनकी चाहत भी। इन्हीं सब परिस्थितियों के बीच रिदु 1999 में पटना आ गए और महेन्द्रू इलाके में स्थित एक लॉज में रहकर मेडिकल परीक्षाओं की तैयारियों में जी-जान से जुट गए। 2002 में ऑल इंडिया सी.बी.एस.सी/पी.एम.टी. द्वारा आयोजित परीक्षा के नतीजे काफी चौकाने वाले थे क्योंकि रिदु शर्मा ने राष्ट्रीय स्तर पर 260वां रैंक हासिल किया था। एक अत्यंत मेघावी छात्र के रूप में पहचान बना चुके रिदु शर्मा ने 2002 में मुंबई के प्रसिद्ध लोकमान्य तिलक मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया और 2002 से 08 तक इसी कॉलेज से पढ़कर एम.बी.बी.एस की डिग्री हासिल की। गाँव के लोगों और परिवार के सदस्यों की ख़ुशी और उत्साह के बीच डॉ. शर्मा को अब अपनी जिम्मेवारियां भी बढ़ती दिखाई दे रही थीं। ऐसे में उन्होंने पी.जी.आई चंडीगढ़ का रुख किया और 2009 से 2012 तक खूब दिल लगाकर पढ़ाई की और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट किया।

कुछ कर गुजरने की चाहत के बीच 2013 में डॉ. शर्मा ने पटना स्थित महावीर कैंसर संस्थान में अपना योगदान दिया और ग्यारह महीने तक सेवाएं दीं। दिसम्बर 2013 में डॉ. रिदु शर्मा ने बतौर सीनियर रेजिडेंट पटना स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी आई.जी.आई.एम.एस में अपना योगदान दिया और इसी साल त्रिवेंद्रम स्थित रीजनल कैंसर सेंटर से मेडिकल ऑन्कोलॉजी में डी.एम के लिए दाखिला लिया और 2014-17 में डी.एम की डिग्री हासिल की। इस अवधि में डॉ. शर्मा ने त्रिवेंद्रम में रहकर केमोथेरपी, टारगेटेड थेरेपी, बोन मेरो ट्रांसप्लांट और इम्मुनो थेरेपी आदि का भी प्रशिक्षण हासिल किया और 2017 में वापस पटना आ गए। श्रीकृष्णापुरी इलाके से अपनी निजी प्रैक्टिस की शुरुआत की। पटना स्थित पारस एच.एम.आर.आई हॉस्पिटल द्वारा उन्हें बतौर कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट के पद पर काम का ऑफर मिला जिसे डॉ रिदु शर्मा ने स्वीकार कर लिया। प्रदेश के ख्याति प्राप्त चिकित्सक, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और डॉ.बी.सी.रॉय राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित डॉ.सहजानंद प्रसाद सिंह कहते हैं ‌िक यदि हम डॉ. रिदु शर्मा की उम्र से नहीं बल्कि योग्यता के पैमाने पर उनके कार्यों का मूल्यांकन करेंगे तो पाएंगे ‌िक उनके व्यक्तित्व में कुछ ख़ास है। सफलता उम्र नहीं बल्कि, योग्यता को आधार बना आपके दरवाज़े पर दस्तक देती है और आपको देश में ऐसे कई उदाहरण मिल जायेंगेडॉ. सहजानंद आगे कहते हैं कि ऑन्कोलॉजी बड़ा जटिल विषय है और जिस प्रकार डॉ. शर्मा हिमेटो ऑन्कोलॉजी, पेडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी और बोन मेरो ट्रांसप्लांट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे है, ऐसे में पूरे भरोसे के साथ कहा जा सकता है ‌िक यह शख्स प्रदेश के चिकित्सा जगत में एक नई लकीर खींचेगा। अपने पेशे से संबंधित कई विषयों में फेलोशिप हासिल कर चुके डॉ.शर्मा न केवल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आजीवन सदस्य हैं बल्कि ICON और ESMO( Europaen society of medical oncology) के सदस्य भी हैं। एक कैंसर विशेषज्ञ के तौर पर डॉ.शर्मा इस बात को लेकर काफी चिंतित हैं ‌िक बच्चों में भी यह बीमारी तेज़ी से बढ़ रही है विशेषकर ब्लड कैंसर, ब्रेन ट्‍यूमर, किडनी कैंसर, सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा और बोन ट्‍यूमर आदि।

डॉ. शर्मा की पत्नी डॉ. प्रसनत्ता कहती हैं ‌िक हमने मगध कैंसर फाउंडेशन की शुरुआत कैंसर रोगियों को जागृत करने के मकसद से की थी। हमारा मानना है ‌िक रोगियों का उपचार जितना जरूरी है उतनी ही जरूरत उन्हें जागृत करने की भी है। मैं एक फॅमिली फिजिशियन हूँ और मेरा भी यह दायित्व बनता है ‌िक हम समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को उन पदार्थों से दूर रहने को कहें जो कर्क रोग के प्रमुख कारण हैं। मगध कैंसर फाउंडेशन द्वारा समय-समय पर शहरों और गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जाता है जिसमें तम्बाकू और सिगरेट से बचाव और उपायों पर चर्चा की जाती है। डॉ. रिदु कहते हैं ‌िक मुझे समय-समय पर बिहार और राज्य के बाहर भी फैकल्टी लेक्चर के लिए आमंत्रित किया जाता है और मैं जहाँ भी जाता हूँ, लोगों को एक बात जरूर कहता हूँ ‌िक आम लोग जब तक तम्बाकू का बहिष्कार नहीं करेंगे, तब तक कैंसर रूपी दानव हमारे सामने से नहीं हटेगा।