डॉ. प्रवीण आनंद

होम्‍योपैथी के बारे में बदली लोगों की सोच

डॉक्‍टर प्रवीण आनंद मुजफ्फरपुर शहर के जाने-माने होम्‍योपैथी च‍िकित्‍सक हैं जो लोगों के बीच होम्‍योपैथी की सोच और समझ को बदलने में जुटे हैं। आमतौर पर एलोपैथी इलाज से हार चुके लोग ही होम्‍योपैथी की शरण में आते हैं और डॉक्‍टर प्रवीण आनंद इसी सोच को बदलना चाहते हैं, क्‍योंकि उनका मानना है कि होम्‍योपैथी इलाज की एक संपूर्ण पद्धति है जिससे किसी भी बीमारी का सटीक उपचार हो सकता है। बचपन से ही मरीजों का उपचार करने की इच्‍छा रखने वाले डॉक्‍टर आनंद की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुजफ्फरपुर शहर के कई आला अधिकारी और उनके परिजन भी इलाज के लिए उन्हीं के पास आते हैं। कई कैंसर रोगियों तक को स्‍वास्‍थ्‍य का वरदान दे चुके डॉक्‍टर प्रवीण आनंद बिहार में होम्‍योपैथी मेडिकल कॉलेजों की दुर्दशा से व्‍यथित हैं और इसलिए अपना मेडिकल कॉलेज शुरू करना चाहते हैं

बिहार के मुजफ्फरपुर में 2 जुलाई, 1975 को श्री नागेश्‍वर मिश्र और कुमुद मिश्र के घर जन्‍मे प्रवीण आनंद को बचपन से ही डॉक्‍टरों का जीवन लुभाता था। वे एमबीबीएस करना चाहते थे। उनके पिता नागेश्‍वर मिश्र बिहार सरकार में एक्‍जीक्‍युटिव इं‍जीनियर थे मगर उनमें ईमानदारी कूट-कूट कर भरी थी। उनका परिवार भी बड़ा था। ऐसे में उनके वेतन से बस किसी तरह परिवार का भरण-पोषण हो जाता था। नागेश्‍वर मिश्र प्रवीण आनंद की एमबीबीएस की पढ़ाई का खर्च उठाने में असमर्थ थे। इसके बावजूद प्रवीण ने हार नहीं मानी। जिला स्‍कूल से मैट्रिक और आरडीएस कॉलेज से इंटर करने के बाद उन्‍होंने मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज से स्‍नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्‍होंने यह तय किया कि अगर वे एमबीबीएस नहीं कर सकते तो होम्‍योपैथी के जरिये च‍िकित्‍सा करेंगे मगर डॉक्‍टर बनने की अपनी इच्‍छा जरूर पूरी करेंगे। मगर यह मुश्किल था क्योंकि इस पढ़ाई के लिए भी पिता की आर्थिक हालत मददगार नहीं थी। ऐसे में प्रवीण ने एजुकेशन लोन के लिए बैंक से संपर्क किया। यह वो दौर था जब बैंक भी आसानी से लोन नहीं देते थे और बैंक ने प्रवीण आनंद से लोन के लिए कोई संपत्ति गिरवी रखने की मांग की। हालांकि बाद में प्रवीण किसी तरह बैंक लोन लेने में कामयाब हुए और होम्‍योपैथी से एमडी की पढ़ाई पूरी की। वे आज भी बैंक लोन की ईएमआई भर रहे हैं। होम्‍योपैथी की डिग्री हासिल करने के बाद उन्‍होंने मुजफ्फरपुर के मिठनपुरा इलाके में अपना क्लिनिक शुरू किया। आरंभ में मरीज उतने नहीं थे मगर डॉक्‍टर आनंद ने इस क्षेत्र में संघर्ष की शुरुआत कर दी थी। उन्‍होंने खुद को एक काबिल डॉक्‍टर के रूप में स्‍थापित करने के लिए कड़ी मेहनत की। वे बिलकुल सुबह से लेकर देर रात तक क्लिनिक में बैठने लगे। उनके इलाज से लोगों को फायदा होने लगा और देखते ही देखते एक होम्‍योपैथी च‍िकित्‍सक के रूप में मुजफ्फरपुर में उनके नाम की चर्चा होने लगी। सबसे खास बात यह है कि अपने मरीजों के लिए डॉक्‍टर प्रवीण किसी भी समय उपलब्‍ध रहते हैं। देर गए रात में आप उन्‍हें फोन कर लें, वे मरीजों की सेवा के लिए उपलब्‍ध मिलते हैं। उनके इस गुण ने उनकी सफलता में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। एक डॉक्‍टर के रूप में उनकी कामयाबी को इस बात से आंका जा सकता है कि जिले के कई आला अधिकारी और उनके परिवार डॉक्‍टर प्रवीण आनंद से ही अपना इलाज करवाते हैं।

डॉक्‍टर आनंद का नाम इतनी तेजी से फैलने का एक कारण यह भी है कि वे गंभीर से गंभीर मरीज का सफल इलाज करते हैं। खुद डॉक्‍टर आनंद बताते हैं कि उनके पास एक ऐसे नि:संतान दंपति आए जिन्हें शादी के 8 साल बाद भी संतान प्राप्‍त नहीं हुई थी। वे ऐलोपैथी से भी हर तरह का इलाज करवा चुके थे मगर सफलता नहीं मिली थी। डॉक्‍टर प्रवीण आनंद ने इस दंपत्ति का इलाज किया और आज उनके सूने घर में बच्‍चे की किलकारियां गूंज रही हैं। डॉक्‍टर आनंद ऐसे कई केस सफलतापूर्वक हल कर चुके हैं। उन्होंने कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी का इलाज भी किया है और कैंसर के कई मरीज आज बीमारी से पूरी तरह मुक्‍त जीवन जी रहे हैं।

क्लिनिक शुरू करने के बाद उनकी घरेलू जिंदगी में थोड़ी अव्‍यवस्‍था आ गई थी मगर शादी के बाद यह कमी दूर हो गई। उनकी पत्‍नी साक्षी आनंद सच्‍ची सहधर्मिणी हैं जो सुख और दुख में उनके साथ खड़ी रहती हैं। किसी भी विषय पर उनके सुझाव डॉक्‍टर आनंद के लिए कारगर साबित होते हैं। शादी के कुछ साल के अंदर ही बेटे अच्‍युत आनंद और बिटिया आराध्‍या आनंद के जन्‍म ने इस परिवार को खुशियों से भर दिया और डॉक्‍टर आनंद का पारिवारिक जीवन सच में आनंदमय हो गया। वे अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता से मिले संस्‍कारों को देते हैं। वे कहते हैं, ‘मेरे पिता हमेशा ईमानदारी के पक्षधर थे। उनका मानना था कि गलत तरीके से कमाए गए पैसे से घर के संस्‍कार बिगड़ जाते हैं। वे उदाहरण भी देते थे कि उनके कई साथी इंजीनियरों ने गलत तरीकों से धन अर्जित किया मगर उनके बच्‍चे बिगड़ गए। कई तो शराबी हो गए।’ ऐसे में डॉक्‍टर आनंद ने पिता की ईमानदारी की सीख को गांठ बांध कर रखा है और अपने बच्‍चों को भी यही संस्‍कार दे रहे हैं।

डॉक्‍टर प्रवीण आनंद का एक सपना है। वे अपना होम्‍योपैथी मेडिकल कॉलेज आरंभ करना चाहते हैं। दरअसल बिहार ही नहीं, पूरे देश में होम्‍योपैथी शिक्षा की जो दुर्दशा है, उसे लेकर वे व्‍यथित हैं। बिहार में जो गिने-चुने मेडिकल कॉलेज हैं भी, उनमें संसाधनों का घोर अभाव है। सरकार भी इसे लेकर उदासीन है। ऐसे में वे एक आधुनिक होम्‍योपैथी कॉलेज शुरू करना चाहते हैं जहां बच्‍चों को हर संसाधन सुलभ हों। हालांकि वे जानते हैं कि उनका यह सपना अभी पूरा नहीं हो सकता इसलिए वे अपनी भविष्‍य की योजनाओं में इसे शामिल करना चाहते हैं। हालांकि फ‍िलहाल बच्‍चों को शिक्षा देने के लिए वे मोतिहारी के आर.के. केडिया होम्‍योपैथी कॉलेज में बतौर प्रोफेसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

डॉक्‍टर आनंद होम्‍योपैथी च‍िकित्‍सकों की निम्न गुणवत्‍ता से दुखी हैं। इसका दोष वे झोला छाप डॉक्‍टरों को देते हैं। वे कहते हैं कि देश में कई लोग होम्‍योपैथी की एक या दो किताबें पढ़कर अपनी दुकान खोले बैठे हैं और मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। डॉक्‍टर आनंद कहते हैं कि होम्‍योपैथी का ज्ञान बहुत ही विस्‍तृत है, जिसे सिर्फ एक या दो किताबें पढ़कर नहीं सीखा जा सकता। डॉक्‍टर आनंद होम्‍योपैथी च‍िकित्‍सा की दुनिया का वो चमकता सितारा हैं जिसने अभी अपनी चमक दिखानी शुरू ही की है। उम्‍मीद है कि भविष्‍य में उनकी चमक पूरे बिहार, बल्कि पूरे देश में दिखाई देगी।