डॉ. नवनीत कुमार

अपनों के लिए कुछ करने की तड़प ने दिलाई कामयाबी

अपने लिए कुछ करने का सपना तो सभी देखते हैं मगर समाज के लिए कुछ करने का सपना देखना और उसे पूरा करने में खुद को झोंक देना सबके बस की बात नहीं होती। ये आलेख ऐसी ही शख्सियत डॉक्टर नवनीत कुमार के बारे में है जो बिहार के लोगों की आंखों के लिए नई ज्योेति साबित हो रहे हैं।

समाज के मध्य वर्गीय हिस्से से आने वाले लोग अकसर नौकरी, घर और बीवी-बच्चों की जिम्मेदारियों में ही उलझे रह जाते हैं। मगर ये भी सच है कि समाज के इसी हिस्से से ऐसे लोग भी निकलते हैं जो अपने लिए कम और समाज के लिए ज्यादा सोचते हैं। बिहार के ऐसे ही एक च‍िकित्सक हैं डॉक्टर नवनीत कुमार। नेत्र च‍िकित्सा के क्षेत्र में बिहार ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों में भी इनका नाम है। पटना में नेत्र च‍िकित्सा से संबंधित सभी अत्याधुनिक उपकरणों से लैस वेदांता नेत्र विज्ञान केंद्र, डॉक्टर नवनीत कुमार की उस उत्कृट इच्छा का प्रतिफल है जिसके तहत वे बिहार के मरीजों को आंख के इलाज के लिए बिहार में ही अत्याधुनिक सुविधा प्रदान करना चाहते थे। पटना के आशियाना-दीघा रोड पर करीब 10 हजार वर्ग फीट क्षेत्रफल में स्थापित वेदांता सेंटर फॉर ऑप्थेल्मिक साइंस पूर्णत: वातानुकूलित परिसर है जिसमें तीन ऑपरेशन थियेटर, पोस्टिओटी केयर, ओपीडी, डॉक्टर्स रूम आदि सभी मूलभूत सुविधाएं और इसके अलावा सभी जरूरी उपकरण मौजूद हैं।

हालांकि मध्यम वर्ग से आने वाले एक बच्चे के लिए इस उपलब्धि को हासिल करना कतई आसान नहीं था। बिहार के सीतामड़ी से आने वाले डॉक्टर नवनीत कुमार की शुरुआती शिक्षा जिले के सरकारी स्कूल में हुई। इनके पिता श्री विरेन्द्र कुमार इंजीनियर और मां सावित्री चौधरी सामान्य गृ‍हिणी थीं। चार भाई-बहनों में से एक नवनीत कुमार ने स्कूली पढ़ाई के दौरान ही डॉक्टर बनने की ठान ली थी। उनके इसी निश्चय का असर था कि हाईस्कूल पास होने के बाद पहले ही प्रयास में इनका मेडिकल एंट्रेंस क्लियर हो गया और उन्हें कर्नाटक के मैसूर मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल गया। यहां से एमबीबीएस करने के बाद उन्होंने नेत्र च‍िकित्सा में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के राजेंद्र प्रसाद नेत्र चिकित्सा केंद्र से नेत्र शल्य चिकित्सा में एम. डी. किया। नेत्र च‍िकित्सा में और विशेषज्ञता हासिल करने के लिए उन्होंने 2006 में ब्रिटेन के मैनचेस्टर में नेत्र शल्य च‍िकित्सा में ही एमआरसीएस किया और इसके बाद कुछ सालों तक इंग्लैड के अस्पतालों में कार्य किया।

मगर उनके मन में तो अपना देश बसा था इसलिए विदेशों में नौकरी के अवसरों को ठुकराकर डॉक्टर नवनीत कुमार भारत लौट आए। भारत लौटने के बाद उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों के नेत्र अस्पतालों में अपनी सेवा दी। इसमें दिल्ली का एम्स भी शामिल था जहां उन्होंने एक-एक दिन में 200 तक मरीजों का इलाज किया। हालांकि इन सभी अस्पतालों में नौकरी के दौरान एक चीज उन्हें परेशान करती थी। इन अस्पतालों में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या उनके गृहराज्य बिहार के लोगों की होती थी। डॉक्टर नवनीत कुमार को समझ आ गया था कि बिहार में नेत्र चिकित्सा की बुरी हालत के कारण वहां के लोगों को राज्य से बाहर इलाज के लिए जाना पड़ता है। बस यहीं से उनके जीवन की दिशा बदल गई और उन्होंने अपनी जन्मस्थ्ली बिहार को अपनी कर्मस्थली बनाने का इरादा कर लिया।

बिहार के हजारों चिकित्सक आज राज्य से दूर दूसरी जगहों पर काम कर रहे हैं। डॉक्टर नवनीत कुमार ऐसे सभी चि‍कित्सकों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। इनमें से कुछ डॉक्ट‍र भी यदि डॉक्टर नवनीत की तरह अपने राज्य के भाई बंधुओं का भला करने की नीयत से वापस लौटे तो निश्चित रूप से बिहार में स्वास्य्त क्षेत्र में क्रांति हो सकती है।

डॉक्टर नवनीत कुमार बिहार तो आ गए मगर मुश्किल ये थी कि सभी अत्याधुनिक सुविधाओं और उपकरणों से लैस नेत्र अस्पताल शुरू करने के लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे। उनके पास कुछ था तो नेत्र चिकित्सा का व्याओपक अनुभव था। अपने इसी अनुभव के बूते उन्होंने बिहार में ऐसा नेत्र अस्पताल बनाने का प्रण कर लिया जिससे ब‍िहार के लोगों को अपना समय और पैसा खर्च कर बिहार के बाहर इलाज के लिए न जाना पड़े। उनका अनुभव और उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ-साथ उनकी चिकित्सक पत्नी डॉक्टर नीतू ने उनका साथ दिया और अंतत: सभी बाधाओं को पार करके 2016 में उन्होंने पटना में वेदांता सेंटर फॉर ऑप्थेल्मिक साइंसेज की स्थापना कर डाली। इस केंद्र में मोतियाबिंद, क्यूर लेसिक (चश्मेे से छुटकारा), फेको तकनीक से मोतियाबिंद का इलाज, रेटिना का इलाज, न्यूरो ऑप्थे‍ल्मोलॉजी, पेडियाट्रि‍क ऑप्थे‍ल्मोलॉजी आदि का इलाज किया जाता है।

जैसा की पहले लिखा गया है इस केंद्र की स्थापना के पीछे डॉक्टर नवनीत कुमार की मंशा बिहार के मरीजों को इलाज के लिए बिहार से बाहर जाने से रोकना तो था, मगर उससे भी बढ़कर उनकी मंशा ये थी कि बिहार के लोगों को सामान्य खर्च में अत्याधुनिक सुविधाएं मिल जाएं। ये अस्पताल उनके इस सपने को सही तरीके से पूरा कर रहा है।

इस केंद्र की खासियत ये है कि ये पूरी तरह मरीजोन्मुखी सेंटर है। डॉक्टर नवनीत कुमार खुद मृदु भाषी डॉक्टर हैं और मरीजों से उनका व्यवहार दोस्ताना रहता है। उन्होंने अपने सारे स्टाफ को भी ये स्पष्ट‍ हिदायत दे रखी है कि मरीजों के साथ वि‍नम्रता पूर्वक व्यवहार किया जाए। सेंटर में हाईजीन यानी साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखा जाता है। जरा सी भी गंदगी बर्दास्त नहीं की जाती है। अस्पताल के अंदर कैफेटेरिया, दवा की दु‍कान और चश्मे‍ का काउंटर भी है ताकि मरीजों को एक ही जगह सारी सुविधाएं मिल सकें और उन्हें कहीं भटकना न पड़े। किसी फाइव स्टार होटल की तरह सु‍सज्जित इस सेंटर में सुविधाएं भी उसी श्रेणी की है मगर खास बात ये है कि उसके हिसाब से मरीजों पर आर्थिक बोझ ज्यादा नहीं डाला जाता।

वेदांता सेंटर फॉर ऑप्थेल्मिक साइंसेज की प्रसिद्धि बिहार की सीमाओं को पार कर पूरे देश में फैल चुकी है। यही वजह है कि कभी बिहार के मरीज इलाज के लिए बेंगलूरू जाते थे मगर अब बेंगलूरू के मरीज इलाज के लिए बिहार आते हैं। इसका पूरा श्रेय डॉक्टर नवनीत कुमार की सकारात्मक सोच और समाज का भला करने की उनकी इच्छा को जाता है।

डॉक्टर नवनीत कुमार के इस सेंटर में गरीब मरीजों का भी खास ध्यान रखा जाता है और उन्हें मुफ्त में अथवा रियायती दरों पर इलाज मुहैया कराया जाता है। खुद एक सामान्य परिवार से आने के कारण डॉक्टर नवनीत कुमार इस वर्ग के लोगों के दुख दर्द को खुद महसूस करते हैं। देश-विदेश में रहकर भी अपने राज्य को न भूलने वाले डॉक्टर नवनीत कुमार दूसरों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत हैं। अकसर लोग नाम कमाने के बाद अपनी जड़ों से कट जाते हैं मगर डॉक्टर नवनीत वर्षों तक अपनी जमीन से दूर रहकर उसे भूले नहीं और आखिरकार लंबे प्रयास के बाद वेदांता सेंटर
फॉर ऑप्थेल्मिक साइंसेज की स्थाापना करने में कामयाबी हासिल की जो आज नेत्र चिकित्सा‍ में अपना एक मुकाम बना चुका है।