डॉ. आशुतोष त्रिवेदी

अपनी माटी से जुडा गरीबों का सेवक दंत चिकित्सक


आधुनिक दौर में चिकि‌ित्सकों के सेवा भावना से विरत होने के चलते और इलाज का खर्च दिन दूनी, रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रहा हो, अगर कोई डॉक्टर आज भी 25 साल पहले वाली फीस पर ही लोगों का इलाज कर रहा हो तो उसे प्रेरणास्रोत के रूप में ही देखा जाना चाहिये। पटना के नामी दंत चिकित्सक डॉक्टर आशुतोष त्रिवेदी ऐसे ही प्रेरणास्रोत हैं

एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले डॉक्टर त्रिवेदी को कॅरिअर में ऊंची उड़ान भरने और विदेशों में नौकरी करने के बेशुमार अवसर मिले मगर अपनी माटी से उनका जुड़ाव इतना मजबूत था कि उन्होंने बिहार की राजधानी पटना को ही अपनी कर्मस्थली चुना। उस समय उन्होंने अपनी जो फीस तय की थी, तमाम तरह की मुश्किलें आने के बावजूद आज भी उनकी फीस उतनी ही है। यही नहीं, डॉक्टर त्रिवेदी पटना में दंत चिकित्सा में नई-नई तकनीक और उपकरण लेकर आए हैं और भी उन्होंने कई सारी नई पहलें की हैं।

डॉक्टर त्रिवेदी पटना के दंत चिकित्सा क्षेत्र का जाना-माना नाम हैं जिन्होंने एक डेंटल सर्जन के रूप में इस पेशे को नई ऊंचाई प्रदान की है। एक बेहद काबिल डेंटल सर्जन के रूप में अपनी पहचान बना चुके डॉक्टर त्रिवेदी बिहार के स्वतंत्रता सेनानी और बिहार वित्त सेवा के अधिकारी रहे कपिल देव त्रिवेदी की सात संतानों में सबसे छोटे हैं।

बचपन से ही बेहद मेधावी छात्र रहे आशुतोष त्रिवेदी की आरंभिक शिक्षा पटना के दो नामी स्कूलों, पटना मॉन्टेसरी स्कूल और सेंट माइकल स्कूल में हुई। स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही उन्होंने एक सफल डेंटल सर्जन बनने का सपना देखा और बड़े होकर इस सपने को साकार भी किया। पहले उन्होंने बीआईडीएस की डिग्री हासिल की और उसके बाद कॉस्मेटिक एेंड डेंटल सर्जरी की डिग्री हासिल करने अमेरिका के न्यूयॉर्क गए। उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से प्रोस्थोडोंटिक्स और इंप्लांटोलॉजी में एमडीएस किया। अपने पेशे से जुड़ी इतनी सारी पढ़ाई करने के बाद स्वाभाविक रूप से उनके पास अमेरिका समेत दूसरे देशों से नौकरी के कई सारे प्रस्ताव आए मगर उन्होंने इन सभी प्रस्तावों को ठुकरा दिया, वे क्योंकि उनके दिमाग में तो वतन की सेवा भावना भरी थी।

वे भारत लौट आए और 90 के दशक में उन्होंने पटना में ओरो डेंटल के नाम से अपने निजी डेंटल क्लिनिक की शुरुआत की। तब उन्होंने अपनी फीस 25 रुपये तय की थी। और आज करीब 25 साल बीतने के बाद भी उनकी फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है बल्कि वह 25 रुपये ही है। इसके पीछे उनकी मां की इच्छा छिपी हुई है जो यह चाहती थीं कि डॉक्टर आशुतोष कम खर्च में लोगों को दंत चिकित्सा की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराएं। डॉक्टर त्रिवेदी को जानने वाले कहते हैं कि उन्होंने अपनी मां की इच्छा को पूरा करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है।

कई डॉक्टरों, सहायकों और तकनीशियनों से सज्जित डॉक्टर आशुतोष त्रिवेदी की टीम और उनका ओरो क्लिनिक भले ही पटना में स्थित हो लेकिन उनके मरीज इस शहर तक ही सीमित नहीं हैं। बिहार और अन्य जगहों के राजनीतिक और टेलीविजन सितारे, नौकरशाह और भारतीय और एनआरआई अपने गृह शहर में इलाज के लिए उनके क्लिनिक में आते हैं। पूरे देश में चल रहे मेडिकल टूरिज्म की तर्ज पर पटना में डेंटल टूरिज्म चल रहा है और इसका श्रेय डॉक्टर त्रिवेदी को ही जाता है। दंत चिकित्सा सेवाओं की भारी कमी को देखते हुए उन्होंने शहर के विभिन्न हिस्सों में ओरो डेंटल की कई उप शाखाएं स्थापित की हैं, जो एकसमान इलाज की सुविधा देती हैं।

डॉक्टर त्रिवेदी की पत्नी प्रियदर्शिनी त्रिवेदी पटना में ही एक बड़े अंतरराष्ट्रीय एनजीओ में पदाधिकारी हैं। श्रीमती त्रिवेदी पिछले 20 वर्ष से सामाजिक क्षेत्र में काम कर रही हैं। वे जुड़वां बच्चों अमोघ और आन्या की मां हैं। उन्होंने बताया कि अपने काम की वजह से ही दोनों करीब आए और बाद में यह नजदीकी शादी में बदल गई। डॉक्टर त्रिवेदी बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के हैं और सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। हालांकि वे भगवान गणेश के भक्त हैं। उनके क्लिनिक में भगवान गणेश की कई मूर्तियां लगी हुई हैं जिनमें से कई तो बेहद दुर्लभ हैं और दूसरे देशों से मंगवाई गई हैं। वे कहते भी हैं कि मैं भगवान गणेश का सेवक हूं और उनकी आकृतियों और मूर्तियों के संग्रह का मुझे बहुत शौक है।

जहां तक चिकित्सा पेशे का सवाल है तो डॉक्टर आशुतोष को बिहार में दंत चिकित्सा के क्षेत्र में कई सारी नई पहल करने के लिए जाना जाता है। वर्ष 1999 में उन्होंने बिहार में पहली बार डेंटल इंप्लांट कर इतिहास रचा। डेंटल इंप्लांटोलॉजी की बिहार में शुरुआत, डिजिटल एक्स रे, चलंत चिकित्सा यूनिट, डेंटिस्ट्री एट होम जैसी पहलों ने ओरो डेंटल को पटना में लोगों का पसंदीदा डेंटल क्लिनिक बना दिया है। डेंटिस्ट्री एट होम के लिए डॉक्टर आशुतोष ने डेंटल मोबाइल वैन शुरू किया जिसका उद्‍घाटन बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने किया।

हर कोई तरक्की करे, इसके लिए डॉक्टर आशुतोष ने ‘अपना बढ़ता बिहार’ का नारा दिया है। हालांकि उनका यह नारा सिर्फ नारा भर नहीं है। वे सच में यह चाहते हैं कि उनका बिहार तरक्की करे। दरअसल दंत चिकित्सा के क्षेत्र में इतने सारे नए आयाम जोड़ने वाले डॉक्टर आशुतोष इस पेशे में कॅरिअर बनाने के इच्छुक छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने नए छात्रों के लिए भी कई पहल की हैं और इस दिशा में काम करते हुए लघु उद्योगों के कौशल विकास कार्यक्रमों और नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के साथ साझेदारी की है। नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के साथ गठजोड़ में दो कोर्स शुरू किए गए हैं-डेंटल असिस्टेंट और लैब असिस्टेंट। इसी के साथ ओरो डेंटल अध्ययन केंद्र और ऑन-जॉब प्रशिक्षण दोनों प्रदान करने वाला अध्ययन केंद्र बन गया है। दोनों कार्यक्रमों के लिए पाठ्‍यक्रम सामग्री डॉ. त्रिवेदी और उनकी टीम ने ही बनाई और बड़ी संख्या में छात्रों ने इसका लाभ उठाया।

एसआईएसआई और ओरो डेंटल के संयुक्त सहयोग के परिणामस्वरूप डेंचर फैब्रिकेशन के लिए कौशल विकास पाठ्‍यक्रम तैयार किए गए हैं। इन पाठ्‍यक्रमों के जरिये न सिर्फ युवाओं को नौकरी की तलाश करने के लिए कौशल प्रदान किया गया बल्कि राज्य के विभिन्न जिलों में स्थापित प्रयोगशालाओं से प्रशिक्षण भी दिलवाया गया। उन्होंने बिहार के एक हजार से ज्यादा बेरोजगारों को डेंटल फेब्रिकेशन यानी नकली दांत बनाने और लगाने की कला सिखाकर स्वरोजगार दिलाया है। डॉक्टर त्रिवेदी अब राज्य में नई और उन्नत तकनीक लाने के लिए दंत चिकित्सा और ओरल स्वास्थ्य पर एक शोध संस्थान का सपना देख रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि यह सपना भी जल्द पूरा होगा।

चिकित्सा जगत और सामाजिक कार्यों में उनकी भागीदारी को देखकर विभिन्न संस्थाओं ने उन्हें समय-समय पर सम्मानित किया है। उन्हें बिहार एंटरप्रेन्योर अवार्ड, बिहार श्री अवार्ड और बेस्ट डेंटल सर्जन अवार्ड आदि से सम्मानित किया जा चुका है। उनके द्वारा शुरू किए गए ओरो क्लिनिक को बेस्ट डेंटल क्लिनिक अवार्ड मिल चुका है। डॉक्टर होने के अलावा डॉ. आशुतोष त्रिवेदी संगीत प्रेमी भी हैं। उन्होंने कराओके गायन शो की अवधारणा पर एक रियलिटी शो ‘सारा बिहार गाएगा’ की रचना,  निर्माण और निर्देशन किया। इसका उद्देश्य अनसुनी संगीतमय आवाजों को एक मंच देना था, जिनकी प्रतिभा पर किसी का ध्यान नहीं गया होगा। कार्यक्रम के 52 एपिसोड को दूरदर्शन बिहार पर प्रसारित किया गया है।