डॉ. आशुतोष शरण

ख्याति के शिखर पर

बिहार के मोतिहारी जिले में अपने ज़माने के प्रसिद्ध ह्दय रोग विशेषज्ञ स्व.डॉ. शम्भू शरण के पुत्र डॉ. आशुतोष शरण और उनकी पत्नी डॉ.जसवीर कौर शरण ने अपने दम पर चिकित्सा जगत को जो मुकाम दिलाया है वो क़ाबिले-तारीफ है। 1985 में मोतिहारी के ज्ञान बाबू चौक पर एक छोटे से क्लिनिक से शुरुआत करने वाले इस दंपत्ति ने प्रदेश के चिकित्सा जगत में अपनी अमिट छाप छोड़ी है

अक्टूबर 1956 में बिहार के मुजफ्फरपुर में जन्मे डॉ. आशुतोष शरण आज किसी परिचय के मोहताज़ नहीं। अपने ज़माने के ख्याति प्राप्त ह्दय रोग विशेषज्ञ स्व.डॉ.शम्भू शरण के पुत्र आशुतोष की प्रारम्भिक शिक्षा पटना के प्रसिद्ध संत जेवियर्स स्कूल से हुई। तत्पश्चात इनका नामांकन पटना के गर्दनीबाग हाई स्कूल में करवा दिया गया जहाँ आशुतोष ने छठी कक्षा तक पढ़ाई की। परिवार की सलाह पर आशुतोष बेतिया चले आए और सातवीं कक्षा में उनका नामांकन क्रिस्ट रज़ा हाईस्कूल में हुआ और इसी विद्यालय से आशुतोष ने साल 1971 में मैट्रिक की परीक्षा पास की।

साल 1971 में आशुतोष ने मोतिहारी के प्रसिद्ध एम.एस कॉलेज के पहले आई.एस.सी बैच में 1973 में दाखिला लिया और प्रथम श्रेणी में पास हुए। इसी साल इनका नामांकन दरभंगा मेडिकल कॉलेज में हुआ और इसी कॉलेज से आशुतोष शरण ने 1979 में एम.बी.बी.एस की डिग्री हासिल की।

पुराने दिनों को याद कर डॉ.आशुतोष कहते हैं ‌िक मेडिकल कॉलेज में उनकी मुलाकात जसवीर कौर ढिल्लन से हुई जो न केवल उनकी सहपाठी थीं बल्कि कॉलेज में उनकी पहचान एक मेघावी छात्रा के तौर पर हुआ करती थी। जसवीर से मेरी बढ़ती नज़दीकियां मेरी ज़िन्दगी का टर्निंग पॉइंट साबित हुईं और 1983 में हमने शादी कर ली। उनकी पत्नी और राज्य की जानी मानी गाइनोकोलॉजिस्ट डॉ.जसवीर कौर शरण कहती हैं कि 1970 में मैंने पटना के प्रसिद्ध संत जोसेफ कान्वेंट हाई स्कूल से ग्यारहवीं की परीक्षा पास की और 1972 में पटना साइंस कॉलेज में दाखिला लिया। 1973 में मेरा नामांकन दरभंगा मेडिकल कॉलेज में हुआ और 1979 में डॉ.आशुतोष और मैंने एक साथ ही एम.बी.बी.एस की पढ़ाई पूरी की।

इधर डॉ.आशुतोष 1982-84 तक पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ख्यातिप्राप्त चिकित्सक डॉ.नरेंद्र प्रसाद के अधीन रहकर जनरल सर्जरी में प्रशिक्षण लेने लगे तो उधर डॉ.जसवीर ने दरभंगा मेडिकल कॉलेज से एम.डी की डिग्री हासिल की। 1983 में डॉ.आशुतोष ने बतौर एस.डी.एम.ओ बेतिया के एम.जे.के अस्पताल में अपना योगदान दिया और स्टडी लीव लेकर 1982-84 में पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से पी.जी की पढ़ाई पूरी की और 1985 में मोतिहारी के टी.बी हॉस्पिटल में अपना योगदान दिया।

इधर, 1988 में डॉ.जसवीर कौर शरण ने बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग में अपना योगदान दिया और राज्य सरकार द्वारा इनकी नियुक्ति लक्ष्मीपुर मुंगेर स्थित रेफरल अस्पताल में कर दी गई लेकिन पति की मोतिहारी में पोस्टिंग होने के कारण इसी साल इनका तबादला मोतिहारी के सदर अस्पताल में कर दिया गया जहाँ ये लम्बे समय तक कार्यरत रहीं। बातचीत के क्रम में डॉ.आशुतोष शरण कहते हैं ‌िक उनके पिता डॉ.शम्भू शरण (अब दिवंगत) का नाम अपने समय के ख्यातिप्राप्त चिकित्सकों में शुमार था। वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष और आई.एम.ए के पितामह कहे जाने वाले डॉ.ए.के.एन.सिन्हा (अब दिवंगत) के करीबी मित्र डॉ. शरण 1954 के ग्रेजुएट थे, साथ ही राज्य के पहले ऐसे एम.आर.सी.पी भी रहे जिन्होंने कभी किसी मेडिकल कॉलेज में अपना योगदान नहीं दिया और ताउम्र अपने जिले मोतिहारी में ही प्रैक्टिस करते रहे। डॉ.शम्भू शरण ने मोतिहारी में एक छोटे से अस्पताल शरण हॉस्पिटल की स्थापना की थी लेकिन वे यह चाहते थे ‌िक उनके पुत्र डॉ.आशुतोष और पुत्रवधू डॉ.जसबीर अपनी अलग राह बनाए और कुछ अच्छा, कुछ अलग करने का प्रयास करें ताकि लोग उन्हें मेरे नहीं बल्कि उन्हें उनके नाम से पहचाने।

इधर मोतिहारी के सदर अस्पताल से डॉ.जसवीर का ट्रांसफर बेतिया के एम.जे.के अस्पताल में कर दिया गया जहाँ वे 2004-05 तक कार्यरत रहीं। इसी बाद में अस्पताल से डॉ.जसवीर ने वी.आर.एस ले लिया।

परिवार के बुजुर्गों का कहना है ‌िक डॉ.आशुतोष और डॉ.जसवीर ने पिता की भावनाओं का सम्मान करते हुए मोतिहारी के ज्ञान बाबू चौक से शरण क्लिनिक के नाम से एक 10 बेड वाले छोटे से अस्पताल की शुरुआत की और फिर कभी पलट कर नहीं देखा। दिन महीने और साल बदलते गए और देखते ही देखते इस चिकित्सक जोड़े का नाम अब हर किसी की जुबां पर था। पिता द्वारा स्थापित छोटे से शरण हॉस्पिटल के पास अब आशुतोष नर्सिंग होम मल्टीस्पेशलिटी सेवाओं के बेहतर विकल्प के साथ जिले के मरीज़ों के लिए तैयार खड़ा था। डॉ.आशुतोष और डॉ.जसवीर कहते हैं ‌िक अमूमन एक मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में प्रायः यह देखा जाता है ‌िक सभी प्रकार की जांच की सुविधाएँ एक ही छत के नीचे उपलब्ध हों लेकिन हमने अपने अस्पताल में पैथोलॉजी, केमिस्ट शॉप, अल्ट्रासाउंड आदि अन्य सुविधाओं को अस्पताल परिसर से दूर रखा है ताकि मरीज़ अपनी सुविधानुसार जहाँ चाहे, जांच करा सकता है, साथ ही बेहतर चिकित्सा को ध्यान में रखकर पटना के वरिष्ठ चिकित्सक भी अपने सेवायें देने मोतिहारी आते हैं।  

एक सफल चिकित्सक के रूप में पहचान बना चुके इस दम्पति ने 1982 में समाज सेवा के इरादे से लायंस क्लब ऑफ़ मोतिहारी की सदस्यता ग्रहण की, डॉ. शरण इन दिनों लायंस क्लब कपल के अध्यक्ष है और अगले अध्यक्ष के तौर पर डॉ.जसवीर का नाम भी क्लब के सदस्यों के सामने है। डॉ.शरण लम्बे वक़्त से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की मोतिहारी शाखा के सचिव हैं, साथ ही एसोसिएशन ऑफ़ सर्जन्स ऑफ़ इंडिया के फेलो होने के अलावा फेलो ऑफ़ इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ़ सर्जन्स के सदस्य भी हैं। वे भारतीय पुलिस सेवा के एक अवकास प्राप्त अधिकारी द्वारा संचालित प्रसिद्ध संस्था ‘प्रयास’ के न केवल संरक्षक और अध्यक्ष हैं बल्कि विभिन्न प्रकार के खेलों को बढ़ावा देने के कारण इन्हें न केवल जिला एथलेटिक एसोसिएशन का अध्यक्ष बनाया गया है बल्कि ईस्ट चम्पारण बैडमिंटन एसोसिएशन के प्रेसिडेंट के तौर पर एक बड़ी जिम्मेवारी इन्हीं के कन्धों पर है। डॉ. आशुतोष शरण मोतिहारी के प्रसिद्ध नवीन भारती स्कूल के न केवल प्रेसिडेंट हैं बल्कि आयुष और अन्य चिकिसक एसोसिएशन के पास्ट प्रेजिडेंट और प्रेजिडेंट भी हैं।

डॉ.आशुतोष शरण और डॉ.जसवीर कहती हैं ‌िक हमारी बेटी डॉ.निकिता शरण रेडियोलाजिस्ट हैं और पुत्र डॉ.निखिल शरण लेप्रोस्कोपिक सर्जन, हमें पूरा भरोसा है ‌िक हमारे मरीज़ों को इन दोनों के अनुभवों के साथ बेहतर चिकित्सा का पूरा लाभ मिलेगा और आने वाले वक़्त में मोतिहारी में स्थित हमारा यह अस्पताल राज्य के चिकित्सा जगत में मील का पत्थर साबित होगा।