डॉ. अभय नारायण राय

पेशे को बनाया मिशन

गया स्थित अभय इंस्टीट्‍यूट ऑफ मैडिकल साइंसेज के संस्‍थापक डॉ. अभय नारायण राय ने अमेरिका से मिले नौकरी के प्रस्ताव को ठुकरा अपने देश की सेवा करने का संकल्प लिया। गरीब रोगियों के प्रति अपने समर्पण उनके त्वरित इलाज और सहानुभूति के बल पर ही वे आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं। राज्य के गरीब तबके के मरीजों के लिए वे मसीहा जैसे हैं

इसके बाद उन्होंने मेडिकल क्षेत्र को प्रोफेशन बनाने का फैसला किया और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) से एमबीबीएस और फि‍र एमडी की डिग्री हासिल की। आईएमएस-बीएचयू में मेडिकल रजिस्ट्रार और लेक्चरर के रूप में सेवा देने के बाद डॉक्टर राय उच्च शिक्षा के लिए 1973 में ब्रिटेन गए जहां उन्होंने महज छह महीने में लंदन से एमआरसीपी की उपाधि हासिल की। इसके बाद एक वर्ष तक उन्होंने मेडिसिन में एसएचओ के रूप में काम किया और फि‍र पश्चिमी इन्फंर्मरी ग्लाससगो में दो साल तक कार्डियोलॉजी के रजिस्ट्रार के रूप में काम करने के बाद आखिरकार साल 1976 में डॉ. राय देश की सेवा करने भारत लौट आए।

ब्रिटेन से लौटने से पहले डॉक्टर राय को अमेरिका में ग्रीन कार्ड सुविधाओं के साथ रेजिडेंट इन कार्डियोलॉजी के रूप में नौकरी का प्रस्ताव मिला लेकिन अमेरिका में काम करने के बदले उन्होंने देश की सेवा करना पसंद किया। उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक कॅरिअर को देखते हुए डॉ. राय एफआरसीपी (ग्लासगो) से भी सम्मानित किया गया।
डॉ. राय अनुराग नारायण मेमोरियल मगध मेडिकल कॉलेज, गया के साथ लंबे समय से जुड़ाव रहा। यह वह जगह है जहां से उनकी यादें जुड़ी हैं। इस कॉलेज में 1976 में उन्होंने एक सहायक प्रोफेसर के रूप में प्रवेश किया और सिर्फ दो साल बाद 1978 में उन्हें एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में पदोन्नत कर दिया। लंबे शैक्षणिक अनुभव के साथ साल 1982 में उन्हेंं प्रोफेसर बनाया गया और उन्होंने 2001 तक यहां एक प्रोफेसर के रूप में काम किया और 2002 में प्राचार्य के रूप में यहां से सेवानिवृत्त हुए। उनके कई छात्र और सहकर्मी आज भी डॉक्टर राय को एक उत्कृष्ट चिकित्सक और शिक्षक के रूप में याद करते हैं। सेवानिवृत्ति के इतने साल बाद भी डॉक्टर राय के कार्य भुलाए नहीं भूलते। उन्होंने गया में अभय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIMS) की स्थापना की है। वे इस संस्थान के मुखिया और मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष हैं। पूरे मगध परिक्षेत्र में अभय इंस्टीाटयूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एकमात्र सुपर-स्पेशियलिटी संस्थान है। डॉक्टर राय आईएमए, आईएमएएएमएस, एपीआई, सीएसआई, आईसीसी, एचएसआई और रेड क्रॉस गया जैसे कई चिकित्सा संगठनों के आजीवन सदस्य हैं। इसके अलावा, वे IMA की गया शाखा के अध्यक्ष, एपीआई मगध डिवीजन और एपीआई बिहार चैप्टर के अध्यक्ष, सीएसआई बिहार चैप्टर के अध्यक्ष, एपीआई की कार्यकारी समिति के सदस्य, एचएसआई इंडिया के अध्यक्ष, आईसीपी इंडिया के वाइस डीन और क्लिनिकल कार्डियोडायबेटिक सोसाइटी ऑफ इंडिया (CCDSI) के अध्यक्ष हैं। सीसीडीएसआई एक नव स्थापित अखिल भारतीय सोसाइटी है और डॉक्टर राय इसके संस्थापक अध्यक्ष हैं। इस सोसाइटी का उद्देश्य मेडिसिन, मधुमेह और रोग हृदय के क्षेत्र में डॉक्टरों को अद्यतन जानकारी प्रदान करना है।

डॉक्टर राय को एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (एपीआई) द्वारा 2017 में ‘प्रतिष्ठित सदस्य’ पुरस्कार दिया गया। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार हर साल एपीआई के 15,000 से अधिक सदस्यों में से किसी एक को दिया जाता है। हाल ही में डॉक्टर राय को पटना में दैनिक जागरण हेल्थ एक्सीलेंस अवार्ड्स, 2018 में ‘सर्वश्रेष्ठ दूरदर्शी नेता (मेडिसिन)’ का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। मेडिसिन जगत से परिचित लोग बताते हैं कि डॉ. राय को समाज सेवा का शौक है। इस शौक ने उन्हें रोटरी इंटरनेशनल के सहयोग से सराहनीय कार्य करने के लिए प्रेरित किया है। उनके कार्यों को ध्यान में रखते हुए आउटलुक पत्रिका समूह ने वर्ष 2018 में उन्होंने आइकन्सन ऑफ बिहार की सूची में शामिल किया है।

रोटरी गया शहर के अध्यक्ष के रूप में उन्हों्ने अनुकरणीय कार्य किए हैं। गया के प्रसिद्ध आरके मेमोरियल एपीआई चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष, डॉ. राय कहते हैं कि साल 2002 में गरीब और जरूरतमंद रोगियों को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने एपीआई भवन की स्थापना की जहां वंचित वर्ग से आने वाले रोगियों को विशेषज्ञ डॉक्टरों का उपचार मिलता है। खुद डॉक्टर राय अपने साप्‍ताहिक ओपीडी के दौरान वहां इस वर्ग के कम से कम 80 से 100 मरीजों का इलाज करते हैं।

उनकी पत्नी लीला राय का कहना है कि डॉक्टर राय ने जेबी राय मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की है। डॉक्टर अभय नारायण राय खुद हैं इस ट्रस्ट के चेयरमैन और ट्रस्ट ने उनके पैतृक गांव लौवाडीह में एक स्नातकोत्तर महाविद्यालय शुरू किया है। इस कॉलेज का लक्ष्य गरीब ग्रामीण छात्रों, विशेषकर लड़कियों को उच्च शिक्षा प्रदान करना है। दो साल के लिए डॉक्टर राय ने मगध सुपर थर्टी के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। यह संस्थान हर साल इंजीनियर बनने के इच्छुक 30 गरीब ग्रामीण छात्रों को निशुल्क आवासीय कोचिंग प्रदान करता है। हाल ही में उन्होंने एक गया वेलफेयर ट्रस्ट स्थापित किया है। इसका उद्देश्य गरीबों की सेवा के लिए सामुदायिक हॉल और एक धर्मार्थ अस्पताल का निर्माण करना है।

डॉक्टर अभय नारायण राय की बेटी जया किशोर और दामाद संजय किशोर हैं। संजय किशोर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) में महानिरीक्षक (आईजी) के रूप में कार्यरत हैं। जया किशोर अपने पिता के बारे में कहती हैं, ‘डॉक्टर अभय बहुत ही प्रतिभाशाली व्यक्ति हैं जिन्होंने न केवल चिकित्सा जगत में बल्कि समाज सेवा में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।’ डॉक्टर अभय के पुत्र डॉक्टर अजितेश राय अमेरिका में सेंट लुइस में एक स्लीप लैब के निदेशक और प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट हैं। अपने पिता के बारे में उनका कहना है, ‘डॉक्टर अभय नारायण राय ने चिकित्सा विज्ञान, शिक्षा और सामाजिक सेवा में अद्‍भुत और अलक्षित सफलता प्राप्त की है।’