डी.एन.सिंह

शून्य से शिखर तक

जनवरी 1964 को गया जिले के खिजर सराय थाना क्षेत्र के सूरजु बीघा गाँव में जन्मे देवेंद्र नारायण सिंह को आज पूरा प्रदेश प्रसिद्ध बिल्डर डी.एन.सिंह के नाम से जानता है! सर्वोदय कंस्ट्रक्शन के प्रबंध निदेशक डी.एन.सिंह आज सफलता के जिस मुक़ाम पर खड़े हैं उससे पूरा प्रदेश तो वाकिफ है लेकिन जिन मुश्किल हालातों से गुज़रकर सिंह ने यह शोहरत हासिल की है, वो अद्‍भुत है और बेमिसाल भी

उनके परिवार के सदस्य बताते हैं ‌िक 1988 में देवेंद्र का विवाह अनुपमा कश्यप के साथ हुआ और और पति-पत्नी आगे की पढ़ाई के लिए गया से पटना आ गए। इसी साल अनुपमा ने पटना विश्वविधालय में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में दाखिला लिया तो देवेंद्र ने पटना इंजी‌िनयरिंग कॉलेज के छात्र के रूप में एम टेक की पढ़ाई आरम्भ की। मेघावी छात्र के रूप में पहचान रखने वाले देवेंद्र को यू जी सी की तरफ से 1800 रुपए प्रतिमाह स्टाइपेंड के तौर पर मिलते रहे और इसी छोटी सी रकम से पति-पत्नी का गुज़ारा होता। पुराने दिनों को याद कर डी.एन.सिंह कहते हैं की उनदिनों हम पटना के कंकड़बाग में बैद्यनाथ प्रसाद के मकान में 700 रुपए प्रतिमाह देकर किराये पर रहा करते थे। हमारे पास किसी प्रकार की कोई सवारी भी नहीं थी, ऐसे में हम दोनों पति-पत्नी कंकड़बाग स्थित अपने किराये के घर से प्रतिदिन पैदल विश्वविद्यालय आते जाते रहे, गया से जब हम पटना आये थे तो साथ में एक स्टोव भी लेकर आये थे लेकिन कुछ ही दिनों बाद अनुपमा के पिता ने हमें एक गैस चूल्हा दिलवाया। आर्थिक हालात बेहद खराब हो चले थे, ऐसे में मैंने कुछ काम करने का फैसला लिया और 1989 में मुझे एक कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा बोरिंग रोड स्थित कृष्णा अपार्टमेंट में ईट सप्लाई का काम मिला, कुछ ही वक़्त बाद कंपनी की इसी साइट पर मुझे बालू सप्लाई का भी काम मिला और हालात पहले से बेहतर हुए। निर्माणाधीन अपार्टमेंट पर आने जाने के क्रम में मैंने कंस्ट्रक्शन के कामों को बारीकी से समझा और आने वाले कुछ ही सालों में सर्वोदय कंस्ट्रक्शन के नाम से अपनी कंपनी की शुरुआत की। देवेंद्र कहते हैं ‌िक बी.आई.टी मेसरा में पढ़ाई के दौरान उनके एक मित्र रिपुंजय प्रसाद सिंह ने पटना में अपनी 5000 वर्गफीट खाली ज़मीन का मुझसे ज़िक्र किया था, बगैर देरी किए मैंने रिपुंजय से संपर्क किया और उसी ज़मीन से गणेश अपार्टमेंट के रूप में मेरे पहले प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई और इसके बाद मैंने कभी पलट कर पीछे नहीं देखा! जानकार बताते हैं ‌िक डी.एन.सिंह ने न केवल बिहार बल्कि दूसरे कई प्रमुख राज्यों तक अपने काम का विस्तार किया और इनकी कंपनी अबतक करीब 3 दर्ज़न से भी अधिक अपार्टमेंटों का सफलता पूर्वक निर्माण कर चुकी है। कंस्ट्रक्शन के कामों के अलावा देवेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य और क्वालिटी फ़ूड के क्षेत्र में भी कदम रखा और देव इंस्टिट्यूट ऑफ़ न्यूक्लीयर मेडिसिन और देव इमेजिंग एंड डायग्नोस्टिक सेंटर की सफलतापूर्वक शुरुआत की। साथ ही पटना के बोरिंग रोड और राजेंद्र नगर से गोल्ड जिम की दो शाखाओं का भी शुभांरभ किया। सिंह की फ़ूड डिवीज़न कंपनी के पास केवेन्टर्स मिल्क शेक की बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश की न केवल मास्टर फ्रेंचाइज़ी है बल्कि वे पटना में एल बी डब्लू रेस्तरां की दो शाखाओं के अलावा सभी सुविधाओं से युक्त होटल सर्वोदय का सफलता पूर्वक संचालन भी कर रहे हैं!  

बिहार के गया जिले में जन्मे देवेंद्र नारायण सिंह की ज़िन्दगी का सफर काफी शानदार रहा है। स्व.बासुदेव प्रसाद सिंह और सैब्या देवी के पुत्र देवेंद्र की प्रारंभिक शिक्षा अपने चाचा डॉ.अरविन्द कुमार और फूफा मदन लाल की देखरेख में पटना के राजेंद्र नगर स्थित राजेंद्र पब्लिक स्कूल से हुई। कुछ ही वक़्त बाद देवेंद्र वापस गाँव लौट गए और पिता की देखरेख में आगे की पढ़ाई शुरू की। शुरुआती कई महीनों तक देवेंद्र स्कूल नहीं गए और गाँव के शिक्षक रामवचन प्रसाद के अधीन शिक्षा ग्रहण की। संयुक्त परिवार में पले-बढे देवेंद्र के पिता ने अपने पुत्रों के अलावा गाँव के बच्चों के लिए भी निशुल्क पढ़ाई की व्यवस्था कर रखी थी। कुछ ही वक़्त बाद देवेंद्र के पिता ने पांचवीं कक्षा में इनका नामांकन एकंगरसराय के नज़दीक एकंगरडीह स्थित कुंडवापर के पास सीनियर बेसिक स्कूल में करवाया जहाँ खपरैल से बनी छत के नीचे देवेंद्र ने अपने सहपाठियों के साथ कुछ वक़्त बिताया। 6 माह की पढ़ाई के उपरान्त देवेंद्र नेतरहाट की परीक्षा में पास न हो सके ऐसे में उन्हें वापस घर लौटना पड़ा।
1974 में देवेंद्र के चाचा डॉ.अरविन्द कुमार का दाखिला गया स्थित गया मेडिकल कॉलेज में हुआ और देवेंद्र अपने चाचा के साथ आगे की पढ़ाई के लिए गया आ गए और गया के एक स्थानीय स्कूल में इनका नामांकन हुआ और इसी विद्यालय से देवेंद्र ने प्रथम श्रेणी में 1978 में मैट्रिक की परीक्षा पास की। देवेंद्र के पिता मेरीन ईन्जीनियर थे लेकिन उन्होंने खुद से अपना व्यापार शुरू किया था ऐसे में देवेंद्र खाली पड़े समय में पिता के कारोबार में उनका सहयोग करते। देवेंद्र कहते हैं ‌िक उनके पिता गाँव में सस्सों से तेल निकलने,धान कूटने के अलावा आटा चक्की का भी व्यवसाय करते थे, साथ ही उनका ट्रांसपोर्ट का भी कारोबार था। 1978 में देवेंद्र ने गया के प्रसिद्ध अनुग्रह मेमोरियल कॉलेज में दाखिला लिया और 1980 में आई.एस.सी की परीक्षा पास की। 1981 में देवेंद्र इंजीनियरिंग की परीक्षा में बैठे लेकिन पास नहीं हुए और इसी साल इन्होने बी.एस.सी में दाखिला लिया। साल 1982 में देवेंद्र ने पुनः इंजीनियरिंग की परीक्षा दी और बी.आई.टी मेसरा से उत्तीर्ण हुए और यहीं से साल 1986 में इंजीनियरिंग की परीक्षा भी पास की! ई.डी.एन.सिंह कहते हैं कि 1986 में राज्य में डॉ.जगन्नाथ मिश्रा की सरकार थी और गया की फाल्गु नदी पर अमरेंद्र दयाल सिंह के भसीन कंस्ट्रक्शन द्वारा पुल का निर्माण करवाया जा रहा था। ऐसे में मुझे इस कंपनी से जुड़कर मेटल सप्लाई करने का अवसर मिला। कुछ ही वक़्त बाद मैंने वह काम छोड़ दिया और 1987 में दैनिक वेतनभोगी के तौर पर कनीय अभियंता के रूप में गया रीजनल डेवलपमेंट अथॉरिटी में अपना योगदान दिया! देवेंद्र कहते हैं मैंने ‌िक जी.आर.डी.ए और भसीन कंस्ट्रक्शन कंपनी से जो कुछ कमाया उसे अपने गया स्थित घर के निर्माण में लगा दिया।

1988 में देवेंद्र के पिता ने एकंगरसराय से ईट भट्ठे का कारोबार शुरू किया लेकिन पिता की तबियत ठीक न रहने के कारण देवेंद्र सिंह को यह कारोबार कुछ वक़्त के लिए संभालना पड़ा। जून 1988 में देवेंद्र और अनुपमा की शादी हुई और संघर्ष की नई शुरुआत हुई। अनुपमा के पिता स्व.सत्यदेव प्रसाद अपने ज़माने में नवादा के प्रसिद्ध उद्याेगपति हुआ करते थे। अनुपमा वनस्थली विद्यापीठ से स्नातक थी और शादी के बाद आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती थी। ऐसे में दोनों पति पत्नी 1988 में पटना आ गए और देवेंद्र सिंह ने पत्नी का नामांकन पटना विश्वविद्यालय में करवाया और खुद भी इंजीनियरिंग कॉलेज (एम.टेक) में दाखिला लिया! यू.जी.सी द्वारा देवेंद्र को स्टाइपंड के तौर पर मिल रहे 1800 रुपए घर के किराये में खर्च हो जाते और बचे रुपयों से महीने तक घर का खर्च चलता!
एकंगरसराय में पिता के ईट भट्ठे को भाइयों के सुपुर्द कर चुके सिंह 1989 में अपने भाई से एक ईट का सैंपल गिफ्ट के रूप में पैक करवा आशियाना बिल्डर्स के मालिक से मिलने पहुंचे। गिफ्ट के रूप में ईट की पैकिंग ने बिल्डर को प्रभावित किया और उसी दिन सिंह को एक ट्रक ईंट सप्लाई का आर्डर मिला। बिहार विधानसभा के सभापति अवधेश नारायण सिंह उन दिनों आशियाना ग्रुप के पार्टनर हुआ करते थे, सिंह को अवधेश नारायण सिंह का पूरा सहयोग मिला और देवेन्द्र कोइलवर से बालू लाकर रात के समय कृष्णा अपार्टमेंट के निर्माणाधीन साइट पर गिराने लगे। अपार्टमेंट में निरंतर आने जाने के दौरान सिंह को अपार्टमेंट निर्माण की तकनीकी जानकारी मिली और उन्होंने बिल्डर बनने का फैसला लिया। इधर 1986 में देवेंद्र के पिता मस्कुलर एट्रोपी नामक बीमारी की चपेट में आ गए और लम्बे चले इलाज के बाद दिसम्बर 1991 में उनका निधन हो गया। 1990 के आस पास डी.एन.सिंह ने सर्वोदय कंस्ट्रक्शन के नाम से एक कंपनी का गठन किया और एक दोस्त की खाली पड़ी 5000 वर्ग फ़ीट ज़मीन पर श्री गणेश अपार्टमेंट की बुनियाद रखी। देवेंद्र ने ग्राउंड के साथ 4 फ्लोर पर कुल 18 फ्लैट का निर्माण करवाया और फिर आगे आने वाले चंद ही सालों में डी.एन.सिंह का नाम अब हर किसी की जुबान पर था। डी.एन.सिंह द्वारा बनाए गए कुछ प्रमुख प्रोजेक्टों में जगतारणी टावर, बासुदेवा कमर्शियल काम्प्लेक्स, ओम निर्मलया अपार्टमेंट, श्री जगदीश अपार्टमेंट, गया सर्किट हाउस के निकट बिग बाजार, निर्माणाधीन सर्वोदय सिटी और सिल्वर कोस्ट आदि प्रमुख हैं। डी.एन.सिंह की मानें तो पटना के डाक बंगलो रोड के पास बैंक ऑफ़ बड़ौदा ए टी.एम के निकट इनकी खाली पड़ी 11 कट्ठे ज़मीन पर शीघ्र ही एक मॉल का निर्माण शुरू किया जाएगा।

अपनी पत्नी अनुपमा कश्यप से जुड़े एक सवाल पर डी.एन.सिंह कहते हैं ‌िक अनुपमा न केवल संगीत की अच्छी जानकारों में है बल्कि एक बेहतरीन सूफी और ग़ज़ल गायिका भी है। इसकी जानकारी लोगों को तब मिली जब होली की एक शाम गोल्फ क्लब द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने अपनी आवाज़ से पटना वासियों का परिचय करवाया। अपनी तरक्की में देवेंद्र अपनी पत्नी अनुपमा का महत्वपूर्ण योगदान मानते है जिन्होंने हर मुश्किल घडी में न केवल उनका साथ निभाया बल्कि अपने बच्चों को अच्छी तालीम और संस्कार दिए। अनुपमा और डी.एन.सिंह के दो बच्चों में पुत्र आकाशदीप ने हॉवर्ड बिज़नेस स्कूल से शिक्षा हासिल की है तो बेटी दीपांजलि ने गुडगाँव स्थित अंसल यूनिवर्सिटी से आर्किटेक्चर की पढ़ाई की है और उच्च शिक्षा हासिल करने के इरादे से लन्दन जाने की तैयारी में है।   

डी.एन.सिंह दीघा में बन रहे अपने ड्रीम प्रोजेक्ट सिल्वर कोस्ट और सगुणा खगौल रोड पर बन रहे सर्वोदय सिटी को लेकर बातचीत के क्रम में भावुक होकर कहते हैं ‌िक सिल्वर कोस्ट एक टाउनशिप है जिसमे 182 फ्लैटों का निर्माण मॉल कम मल्टीप्लेक्स और फ़ूड कोर्ट के साथ किया जाना है, साथ ही सर्वोदय सिटी में प्ले स्कूल, क्लब हाउस, स्विमिंग पूल, पुरुष एवं महिलों के लिए स्पा-डिपार्टमेंटल स्टोर एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाना हमारी प्राथमिकता में शामिल है। लेकिन सरकारी नीतियों के कारण ग्राहकों से किये गए वादों को पूरा करने में अब तक हम विफल रहे लेकिन जल्द ही हम अपने वायदों को पूरा करेंगे और अपने ग्राहकों की उमीदों पर खरा उतरने की हर संभव कोशिश करेंगे।