क्लेमेन्ट फ्लोरियन

राष्ट्रपति पदक ने बढ़ाया मान

अक्टूबर 1955 में पश्चिम चम्पारण के बेतिया जिले के बानू छपरा गाँव के एक किसान परिवार में जन्मे क्लेमेन्ट फ्लोरियन का नाम बिहार अग्निशमन सेवा के क्षेत्र में बड़े सम्मान से लिया जाता है। अपने सेवा काल के दौरान दो बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित फ्लोरियन ने राज्य में आग लगने की कई बड़ी घटनाओं को न केवल नाकाम किया बल्कि सैकड़ों जान भी बचाई। राज्य अग्निशमन पदाधिकारी और बिहार अग्निशमन सेवा के निदेशक के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके फ्लोरियन के कार्यकाल में कुल 951 फायर मैन की नियुक्तियों पर सरकार ने अपनी सहमति दी और उन्होंने अपने कार्यकाल में 826 अग्निको को बहाल कर उन्हें प्रशिक्षित किया। क्लेमेन्ट फ्लोरियन ने बिहार के 203 थानों में मिस्ट टेक्नोलॉजी अग्निशमन वाहन की न केवल प्रतिनियुक्ति की बल्कि उनके प्रयास से बिहार फायर सर्विस एक्ट को भी उनके सेवा काल में लागू किया गया। अक्टूबर 2015 को सरकारी सेवा से निवृत्त हो चुके फ्लोरियन ने 2017 में फ्लोरेंसिया फायर सेफ्टी सोल्युशन नामक एक कंसल्टेंसी सर्विस की स्थापना की और आग लगने के कारणों और उससे बचाव से लोगों को जागरूक करने की मु‌िहम पर काम शुरू किया।

क्लेमेन्ट फ़्लोरियन के पिता फ्लोरियन इलास ने कभी सोचा भी न था ‌िक उनका पुत्र गाँव की गलियों से निकलकर एक दिन पूरे प्रदेश का नाम रोशन करेगा। 1972 में बेतिया के क्रिस्ट रज़ा हाई स्कूल से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक की परीक्षा पास करने के उपरांत 1974 में फ्लोरियन ने महारानी जानकी कुँवर महाविद्यालय से आई एस सी की परीक्षा पास की और इसी कॉलेज से 1976 में बी. एस. सी. किया।

1977 में उन्होंने बिहार सरकार में अपना योगदान दिया और राज्य सरकार द्वारा उनकी पहली नियुक्ति बिहार फायर सर्विस में बतौर फायर स्टेशन अफसर के रूप में कर दी गई। 1977 से 78 तक फ्लोरियन ने बिहार के गया जिले में रहकर फायर से सम्बंधित प्रशिक्षण हासिल किया और इसी साल उनकी पहली नियुक्ति कटिहार जिले में फायर स्टेशन अफसर के रूप में कर दी गई जहाँ वे 1982 तक कार्यरत रहे।

बातचीत के क्रम में फ्लोरियन बताते हैं कि 1982 से 84 के बीच मेरी पोस्टिंग अविभाजित बिहार के हज़ारीबाग़ में थी जब दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प में आगजनी की बड़ी घटना हुई थी। पुलिस के साथ मिलकर इस घटना में स्थानीय फायर सर्विस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने जिस प्रकार मेरे नेतृत्व में काम किया, उसकी मिसाल लोग आज भी देते हैं। 1985 में फ्लोरियन को हज़ारीबाग़ से पूर्णिया ट्रांसफर कर दिया गया जहाँ वे 1988 तक कार्यरत रहे और 3 साल की सेवा के पश्चात राज्य सरकार द्वारा एक बार फिर उनका तबादला जमशेदपुर कर दिया गया! पूर्णिया में अपनी पोस्टिंग के बीच 1987 में फ्लोरियन ने नागपुर स्थित नेशनल फायर सर्विस कॉलेज से एसटीओ यानी फायर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा भी हासिल किया।

दिनेश आनंद से हुई बातचीत में फ्लोरियन कहते हैं कि 3 मार्च, 1989 का वह दिन मैं कभी भूल नहीं सकता जब जमशेदपुर में टिस्को का स्थापना दिवस समारोह बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा था। टिस्को द्वारा निर्मित भव्य पंडाल में टिस्को के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठे हज़ारों लोग में सामने दिखाई जा रही झाकियों का आनंद ले रहे थे।

इसी बीच वहां बने विशाल पंडाल में आग लग गई और देखते ही देखते अफरातफरी मच गई और लोग बेतहाशा भागने लगे! मैं अपनी टीम के साथ अविलम्ब घटना स्थल पर पहुंचा और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया लेकिन तब तक इस घटना में 63 लोगों की मौत हो चुकी थीं और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके थे। जानकार बताते हैं ‌िक इस भयानक अागजनी के बीच फ्लोरियन और उनकी टीम ने जान की बाज़ी लगा दी और कड़ी मेहनत एवं अथक प्रयास के बाद वे आग पर काबू पाने में न केवल सफल रहे बल्कि दर्जनों जानें भी बचाई। इस खबर को देश के करीब-करीब सभी समाचारों पत्रों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। ऐसे में फ्लोरियन अपने बेहतर कामों के जरिए अब लोगों के सामने थे।
फ्लोरियन 1993 तक जमशेदपुर में कार्यरत रहे और इसी साल उनका तबादला मुजफ्फरपुर कर दिया गया। फ्लोरियन कहते हैं ‌िक आगलनी की सबसे अधिक घटनाएं मुजफ्फरपुर जिले में ही होती हैं, ऐसे में फायर सर्विस के कार्यालय को सर्वाधिक फोन कॉल भी इसी जिले से आते हैं।

6 जुलाई, 1996 को मुजफ्फरपुर के सरैयागंज में घटी आगजनी की एक घटना को याद कर फ्लोरियन बताते हैं ‌िक सरैयागंज की थोक दवाओं की मंडी में लगी भयावह आग की चपेट में 6-7 दुकानें आ गई थीं। सूचना मिलते ही मैं दमकल की गाड़ियों और अपनी टीम के साथ घटना स्थल पर पहुंचा। पूरे इलाके में अफरातफरी मची थी और दुकानों में रखी ईथर की बोतलों के कारण आग लगातार फैलती जा रही थी। हमने आग बुझाने के क्रम में देखा ‌िक एक दुकान में पांच लोग बेसुध पड़े थे, मैंने अपने सहयोगी फायरमेन सुधीर की सहायता से उन पाँचों को बाहर निकालने में सफलता हासिल की लेकिन इस प्रयास में मेरे सहयोगी सुधीर बुरी तरह झुलस गए।

इसी साल मुजफ्फरपुर-समस्तीपुर रोड पर एक बड़ी घटना घटी जब जिले के एक सर्वोच्च अधिकारी द्वारा फ्लोरियन को व्यक्तिगत तौर पर घटना की जानकारी लेने भेजा गया। घटनास्थल पर पुलिस भी मौजूद थी लेकिन फ्लोरियन ने अपने तज़ुर्बे के आधार पर जाना ‌िक यहाँ आगजनी की कोई घटना नहीं हुई है बल्कि केमिकल का रिसाव बड़े पैमाने पर हो रहा है।

फ्लोरियन विज्ञान के छात्र रहे हैं लिहाज़ा वहां फ़ैल रही गंध के आधार पर उन्हें यह समझते देर न लगी ‌िक किसी टैंक लॉरी के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण उस इलाके में एचसीएल यानी हाइड्रोक्लोरिक एसिड का रिसाव हो रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए फ्लोरियन ने आधी रात के वक़्त स्थानीय लोगों की सहायता से पास के गाँव को खाली करवाया और इस प्रकार सैकड़ों लोगों की जान बचाई। लम्बे कार्यकाल के दौरान क्लेमेन्ट फ्लोरियन की सराहनीय सेवाओं को देखते हुए 1995 में उन्हें राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया।   

6 जुलाई, 1996 के दिन फ्लोरियन को सहायक राज्य अग्निशमन पदाधिकारी यानी असिस्टेंट स्टेट फायर र्ऑफिसर के रूप में पदोनति मिली और वे स्थाई तौर पर पटना सचिवालय स्थित कार्यालय में बैठने लगे! इस दौर में बिहार राज्य अग्निशमन के लिए तैयार कई बड़ी योजनाओं पर काम करते हुए फ्लोरियन ने राज्य अग्निशमन पदाधिकारियों को सहयोग किया, साथ ही पटना में हुए कई भयावह अग्निकांडों के अग्निशमन का न केवल सफल नेतृत्व किया बल्कि विधि व्यवस्था बनाए रखने में स्थानीय पुलिस को सहयोग भी किया। विभाग के कुछ सेवा‌िनवृत्त अधिकारी कहते हैं ‌िक फ्लोरियन काम के मामले में सदैव दो कदम आगे रहे, भयंकर अग्निकांडों का निरीक्षण करने के उपरान्त फ्लोरियन राज्य सरकार को अपना प्रतिवेदन वक़्त पर सौपते और निरंतर विभाग में कुछ नया और कुछ अलग करने का प्रयास करते रहे।

फ्लोरियन ने समय-समय पर फायरमैन और स्टेशन ऑफिसर्स को प्रशिक्षण देने के अलावा बाढ़, भूकंप आदि के अतिरिक्त आपदा प्रबंधन से संबंधित जागरूकता अभियान से जुड़कर स्थानीय नागरिकों को आगलगी के कारणों और उनसे बचाव से संबंधित मॉक ड्रिल भी आयोजित करवाया। साथ ही राज्य के कई शहरों में फायर से संबंधित कई सेमीनार भी सफलतापूर्वक आयोजित किये और इस अवधि में वे फायर के निदेशक प्रमुख के विशेष कार्य पदाधिकारी के तौर भी कार्यरत रहे।

2007 में फ्लोरियन सहायक प्रमंडलीय अग्निशाम पदाधिकारी के पद पर प्रोन्नत हुए और 2012 में एक बार फिर उन्हे प्रमंडलीय अग्निशाम पदाधिकारी के रूप में प्रोन्नति मिली।

इस बीच पटना स्थित सेंट जेवियर्स स्कूल के पूर्व छात्र और इलाहाबाद एग्रीकल्चर डीम्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक फ्लोरियन के पुत्र मोहित कुमार सिविल सर्विसेस की तैयारियों के दौरान एक रेल दुर्घटना के शिकार हो गए और उन्हें अपने दोनों पाँव गंवाने पड़े! जयपुर फुट के सहारे चलने वाले मोहित खुद को दिव्यांग नहीं समझते। यही वजह है ‌िक वे न केवल कार और बाइक खुद चलाते हैं बल्कि अपने पिता से किसी प्रकार की आर्थिक सहायता लिए बगैर अपने दम पर अपने निजी कोचिंग सेंटर का संचालन कर रहे हैं।

फ्लोरियन के अनुकरणीय कामों को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा उन्हें 2013 में प्रोन्नति देकर राज्य अग्निशाम पदाधिकारी के रूप में कार्यभार सौपा गया और इस अवधि में उनके किये गए कामों को लोग आज भी याद करते हैं। जानकारों का कहना है ‌िक 1990 के बाद से फायरमैन की कोई बहाली न होने के कारण विभाग इन कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा था, फ्लोरियन ने इस कमी को गंभीरता से लिया और राज्य सरकार का ध्यान इस ओर खींचा। कुछ ही समय बाद सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 951 फायरमेनों की नियुक्ति के लिए फ्लोरियन को अधिकृत किया। अपने कार्यकाल के अंतिम दौर तक फ्लोरियन द्वारा 826 अग्निकों की बहाली कर उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। उनके सेवा काल में ही बिहार के 203 थानों में मिस्ट टेक्नोलॉजी अग्निशमन वाहन की प्रतिनियुक्ति हुई और उनका यह कदम बिहार के अग्निशमन के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ।

2012 में एक बार फिर क्लेमेन्ट फ्लोरियन को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक देकर सम्मानित किया गया। 2014 में बिहार फायर सर्विस एक्ट का गठन हुआ जिसे फ्लोरियन के प्रयास से उनके ही सेवाकाल में लागू भी किया गया।

2015 में फ्लोरियन को बिहार अग्निशाम सेवा के निदेशक के तौर पर प्रोन्नति मिली और फ्लोरियन ने अपनी टीम के साथ सचिवालय स्थित सरकारी कार्यालय से लोदीपुर स्थित नवनिर्मित कार्यालय से अपना कार्य आरम्भ किया।

क्लेमेन्ट फ्लोरियन 31 अक्टूबर, 2015 को बिहार अग्निशाम सेवा के निदेशक पद से सेवानिवृत्त तो हो गए लेकिन अपने बेहतर कामों की बदौलत दो बार राष्ट्रपति पदक हासिल कर चुके इस शख्स की छवि आज भी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है। आज फ्लोरेनिका फायर सेफ्टी सोल्युशन के निदेशक के तौर पर काम कर रहे फ्लोरियन कहते हैं कि घर, ऑफिस, कार आदि में फायर से सम्बंधित सभी उपकरणों का होना केवल सरकार की नहीं बल्कि हमारी भी जिम्मेवारी बनती है ताकि वक़्त आने पर हम अपने जानो माल की हिफाज़त कर सकें।