अजय मैतिन

मुश्किलों में भी नहीं मानी हार

साधना और संघर्ष भरी यह कथा एक अद्‍भुत जीवन यात्रा का प्रतिबिम्ब है। कोई व्यक्ति आत्म प्रेरणा और दुर्गम परिगम के द्वारा कैसे निरंतर प्रगति कर सकता है, यह गाथा उसी का दुर्लभ उदाहरण है। साधना और समृद्धि के प्रस्तुत प्रतीक हैं अजय मैतीन जिन्होंने शून्य से शिखर तक उपलब्धि अर्जित की है। अजय की संघर्ष यात्रा मात्र तीस वर्षों की कहानी है। उनका कहना है ‌िक उन्होंने अपने जीवन में जो कुछ और जितना भी प्राप्त किया, वह निरंतर परिष्कृत होते विचारों, लक्ष्य प्राप्ति के लिए वेगपूर्ण प्रवाह और समाज की सर्वोच्च सत्ता के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है। अपने मार्ग के प्रचंड प्रवाह के बीच आई सशक्त बाधाओं को पराजित कर अपने पूर्व- निर्धारित उदेश्यों को पूरा करना, इनकी सबसे बड़ी विशेषता है। जीवन एक आत्म निर्माण की प्रक्रिया है, आज अजय मैतीन एक लोकप्रिय मित्र कर्मठ व्यापारी समाधान प्रस्तुतकर्ता विशेष परामर्शदाता और एक विश्वसनीय प्रतिष्ठान ही नहीं बल्कि एक सुसंगठित संस्था के समर्पित और निष्ठावान नेता भी हैं। स्वाभाविक है ‌िक उनके अधिकांश गुण और विलक्षण प्रतिभा उनके स्वर्गीय पिता विश्वनाथ मैतीन का वरदान है जो स्वयं भी एक ख्याति प्राप्त प्रिंटिंग व्यवसायी रहे हैं। सच तो यह है ‌िक विपरीत परिस्थितियों के बीच भी एक परिवार मात्र साधना और संघर्ष के सहयोग से कैसे उन्नाति कर सकता है, कार्यकुशलता के नए मापदंड स्थापित कर सकता है, यह अजय मैतीन की पारिवारिक पृष्ठभूमि से स्पष्ट है

बिहार के गया में जन्मे अजय मैतिन की प्रारंभिक शिक्षा बाँकीपुर स्थित संत जोसेफ कॉन्वेंट हाई स्कूल में हुई। तत्पश्चात कक्षा 2 में इनका नामांकन पटना के प्रसिद्ध संत जेवियर्स स्कूल में हुआ और इसी विद्यालय से अजय ने 1979 में मैट्रिक की परीक्षा पास की! 1980 में अजय ने पटना विश्वविद्यालय के अधीन पटना कॉलेज में अपना नामांकन करवाया और 1982 में आई.ए की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए। 1984 में पटना कॉलेज से राजनीति विज्ञान में ऑनर्स करने के पश्चात 1985 में अजय पटना विश्वविद्यालय के एम.बी.ए कार्यक्रम से जुड़े और पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार की तलाश शुरू की। एक मेघावी छात्र के रूप में पहचान रखने वाले अजय के चाचा तारकेश्वर मैतिन पटना वाणिज्य महाविद्यालय के विश्वविख्यात प्रोफ़ेसर हैं और पिता विश्वनाथ प्रसाद मैतिन प्रिंटिंग के कारोबार की नामी शख्सियत थे। 50 के दशक में अजय के पिता ने मुंबई जाकर द टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रिंटिंग से संबंधित कामों का प्रशिक्षण हासिल किया और फिर गया वापस आकर तारा प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना की। बदलते समय के साथ कारोबार भी बढ़ता चला गया और फिर विश्वनाथ मैतिन ने अपने प्रिंटिंग व्यवसाय को पटना शिफ्ट कर लिया।

बातचीत के दौरान अजय बताते हैं ‌िक उस दौर में मेरे पिता ने प्रिंटिंग जगत में जो मुकाम हासिल किया था, लोग आज भी उसकी मिसाल देते हैं। हमने वो दौर भी देखा है जब पिता के व्यवसाय से जुड़कर 75 से अधिक लोग काम करते थे और वह वक़्त भी देखा जब घर के सारे जेवर बिक गए और हमारा प्रेस बंद हो गया। पिता जी कहा करते थे ‌िक कठिन परिश्रम के साथ ईमानदारी के बूते आगे बढ़ने वाले न केवल अपनी मंज़िल खुद तय करते हैं बल्कि उन्हें सफलता अवश्य मिलती है।

प्रिंटिंग के पारिवारिक व्यवसाय होने के कारण अजय को प्रिंटिंग व्यवसाय की अच्छी जानकारी थी। ऐसे में अजय ने 1985 में पटना से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अधिकारियों से संपर्क किया और प्रिंटिंग सलूशन प्रोवाइडर के तौर पर काम करने की इच्छा ज़ाहिर की। अंग्रेजी अखबार के प्रबंधन को यह प्रस्ताव पसंद आया और अजय की कंपनी ग्राफिक ट्रेड्स ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया के साथ काम शुरू किया! कम खर्चे में अच्छी छपाई और प्रिंटिंग के तकनीकी ज्ञान को देखकर बिहार के प्रायः सभी हिंदी और अंग्रेजी दैनिक ग्राफिक ट्रेड्स से जुड़ते चले गए और अजय की शोहरत तेज़ी से बढ़ने लगी। अजय बताते हैं ‌िक 1987-88 तक हमने करीब-करीब बिहार से प्रकाशित होने वाले सभी समाचार पत्रों के साथ काम किया। और तो और, 1990 के आसपास बिहार के जितने भी प्रमुख प्रिंटिंग प्रेस थे उन सभी के सलूशन प्रोवाइडर के तौर पर हमने काम किया।

90 के दशक में प्रिंटिंग व्यवसाय करवट बदल रहा था साथ ही कम्प्यूटर युग का आरम्भ हो चुका था। ऐसे में अजय मैतिन ने बड़ा फैसला लिया और आई.टी क्षेत्र में काम करने का मन बनाया, इस काम के लिए अजय पूरी तरह तैयार नहीं थे लेकिन उन्हें इस क्षेत्र में संभावनाएं दिखाई दे रही थीं। ऐसे में मैतिन को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अजय कहते हैं ‌िक शुरुआती कई महीनों में यदि किसी जिले से माउस में खराबी की खबर भी मिलती तो मैं अपनी गाडी से लम्बी दूरी तय कर खुद वहां जाता ताकि उन्हें संतुष्ट कर सकूं! मेरी इस सोच के कारण अधिकारियों का भरोसा मुझपर बढ़ने लगा, साथ ही उन्हें यह भी महसूस हुआ ‌िक हमारा उद्देश्य केवल आर्थिक नहीं बल्कि सरकारी कामों में उत्पन्न बाधाओं को दूर करना भी है। गुज़रते समय के साथ मैंने देखा ‌िक मेरी प्रतिस्पर्धा, ईमानदारी, समर्पण, मेहनत के चलते अधिकारियों के भरोसे को कायम रखने का मेरा हर प्रयास सफल रहा।
राज्य एवं केंद्र की सरकारों के साथ काम के लम्बे अनुभव के बीच 2003-07 में अजय मैतिन को राष्ट्रीय स्तर पर कई अवार्ड्स मिले। 2006 में वे इंडियन एक्सप्रेस के एंटरप्राइस वार इमर्जिंग ईस्ट के पुरस्कार से सम्मानित हुए। इसके अलावा 2008 में उन्हें भारत सरकार के माइक्रो, स्मॉल एवं मीडियम एंटरप्राइज द्वारा स्पेशल रेकग्निशन राष्ट्रीय अवार्ड से, माननीय मुख्य अतिथि एवं तत्कालीन प्रधानमन्त्री डॉ.मनमोहन सिंह की मौजूदगी में नवाज़ा गया। इसके अलावा उन्हें 2009 में संत जेवियर्स अल्मुनि एसोसिएशन द्वारा सिग्नीफिकेंट अचीवमेंट अवार्ड और 2011 में स्वीडन की प्रसिद्ध कंपनी एक्सिस कम्युनिकेशन द्वारा बेस्ट इमर्जिंग सिस्टम इंटीग्रेटर अवार्ड और 2007,2008 एवं 2013 में प्रसिद्ध पत्रिका सी.आर.एन द्वारा सी.आर.एन एक्सेलेंस अवार्ड से नवाज़ा जा चुका है। आई.टी क्षेत्र के जानकारों का मानना है ‌िक अजय जिस प्रकार का कार्य आज कर रहे हैं उस स्तर का कार्य कौशल एवं क्षमता बिहार से बाहर की कंपनियों के पास है ही नहीं लेकिन अपने दम पर, जटिल समस्याओं एवं प्रतिकूल परिस्तिथियों में संयम, विवेक, धैर्य से इस प्रकार का काम करने वाले अजय संभवतः प्रदेश के पहले और अकेले ऐसे व्यक्ति हैं।

बिहार सरकार के करीब करीब सभी विभागों के लिए काम कर चुकी अजय की कंपनी ने अब तक अपने राज्य और देश की कई महत्वपूर्व संस्थाओं और कंपनियों के साथ काम किया है। ऐसी सरकारी एवं निजी संस्थाएं कंपनियों की टेक्नीकल योग्यताओं के आधार पर ही चयन करती है और ऐसी कुछ बड़ी कंपनियों में एक नाम आज ग्राफिक ट्रेड्स प्राइवेट लिमिटेड का भी लिया जाता है।

अजय मैतिन कहते हैं ‌िक ज़िन्दगी में अच्छे और अनुभवी लोगों से मुलाक़ात काफी अहमियत रखती है जिनके साथ बिताये कुछ पल आपको अनुभवों से भर देते हैं। मेरे जीवन में पटना से प्रकाशित हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान के मुखिया आदरणीय वाई.सी.अग्रवाल और मेरे चाचा तारकेश्वर मैतिन का बहुमूल्य योगदान रहा है और इन्हे मैं अपना पथ प्रदर्शक मानता हूँद्घ अजय अपने पथप्रदर्शकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं ‌िक इस यात्रा में उन्होंने निडरता और साहस से जीवन जीने एवं अनुशासनबद्ध कर्मयोगी बने रहने को निरंतर प्रेरित किया है।

एक मुलाक़ात के दौरान अजय की पत्नी ममता ने कहा ‌िक उन्होंने हमेशा कुछ बड़ा करने की सोची। इसकी यह बानगी ही है ‌िक 2014 एवं 2019 के लोकसभा चुनाव में झारखण्ड राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उन्हें एक बड़ी जिम्मेवारी सौंपी गई जिसके तहत अजय की कंपनी ने प्रदेश के 7 हज़ार बूथों पर पोलिंग के लाइव वेबकास्टिंग के कार्य को संम्पन्न किया। इसके अलावा बिहार सरकार, पटना स्मार्ट सिटी से अत्याधुनिक, अभूतपूर्व एवं उच्च तकनीक ओपन एयर थिएटर का काम भी अजय की कंपनी को मिला है जिसमें बिहारवासियों के लिए सिनेमा, वर्ल्ड कप मैच आदि के इंतेज़ाम तो होंगे ही, साथ ही कई प्रकार के इवेंट्स के प्रसारण की भी व्यवस्था होगी। लॉ की पढ़ाई की तैयारियों में जुटी अजय मै‌ितल की पुत्री अनन्या और इंजीनियरिंग की तैयारियों में जुटे पुत्र प्रांशु अजय कहते हैं ‌िक हमारी दादी जानकी देवी बताती थीं ‌िक अजय कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति के दूरदर्शी इंसान हैं ... और आज हमें लगता है ‌िक हमारे पापा ने दादी जी की बातों को सच कर दिखाया।