Home एग्रीकल्चर मौसम पूरे देश में मानसून पहुंचने के बावजूद 58 फीसदी हिस्से में बारिश सामान्य से कम
पूरे देश में मानसून पहुंचने के बावजूद 58 फीसदी हिस्से में बारिश सामान्य से कम
पूरे देश में मानसून पहुंचने के बावजूद 58 फीसदी हिस्से में बारिश सामान्य से कम

पूरे देश में मानसून पहुंचने के बावजूद 58 फीसदी हिस्से में बारिश सामान्य से कम

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे देश में 19 जुलाई को पहुंच गया है, हालांकि देश के 58 फीसदी हिस्से में अभी भी बारिश सामान्य से कम हुई है। खरीफ फसलों की बुआई का समय निकला रहा है जबकि देश के 36 सब डिवीजनों में से 20 में बारिश सामान्य से कम हुई है जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई हैं।

आएमडी के अनुसार चालू सीजन में सामान्य 15 जुलाई तक देशभर में मानसून छा जाता है लेकिन इस बार चार दिन की देरी से पूरे भारत में पहुंचा है। केरल में मानसून का आगमन भी इस बार आठ दिन की देरी से हुआ था। मानसूनी सीजन के पहले महीने जून में देशभर में बारिश सामान्य से 33 फीसदी कम हुई थी जबकि पहली जून से 20 जुलाई तक देशभर में सामान्य से 18 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान सामान्यत: 347 मिलीमिटर बारिश होती है जबकि चालू सीजन में अभी तक केवल 285 मिलीमिटर बारिश ही हुई है।

कई राज्यों में औसत से कम हुई बारिश

मौसम विभाग के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 20 जुलाई तक दौरान सबसे कम बारिश गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ में सामान्य से 65 फीसदी कम हुई है। पश्चिम बंगाल में सामान्य से 52 फीसदी कम, वेस्ट राजस्थान में सामान्य से 46 फीसदी कम, झारखंड में सामान्य से 42 फीसदी कम बारिश हुई है। इसके अलावा उत्तराखंड में 36 फीसदी, ओडिशा में 27 फीसदी, गुजरात रीजन में 32 फीसदी, मराठवाड़ा 33 फीसदी, विदर्भ में 38 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 22 फीसदी, गुजरात रीजन 32 फीसदी, तेलंगाना में 30 फीसदी के साथ ही दक्षिण कर्नाटक में भी सामान्य से 23 फीसदी कम बारिश हुई है।

खरीफ फसलों की बुआई में आई 6.84 फीसदी की कमी

मानसूनी बारिश कम होने का असर खरीफ फसलों की बुआई पर भी पड़ा है। कृषि मंत्रालय के अनुसार 19 जुलाई तक देशभर में फसलों की बुआई 6.84 फीसदी पिछड़ कर 567.37 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 609.03 लाख हेक्टयेर में हो चुकी थी।

अल नीनो कमजोर हुआ 

मानसून की निजी जानकारी देने वाली एजेंसी स्काई मेट के अनुसार मानसूनी सीजन में सबसे अधिक बारिश वाले महीने जुलाई का आधे ज्यादा हिस्सा बीत चुका है लेकिन मानसून पर अल नीनो का खतरा अभी भी टला नहीं है। हालांकि इस समय अल नीनो कमजोर होता हुआ दिखाई दे रहा है लेकिन मौसम से जुड़े ज्यादातर मॉडल संकेत दे रहे हैं कि जुलाई के बाकी समय में अल नीनो के अस्तित्व की 50 फीसदी से अधिक संभावना है। इसके अलावा अगस्त और सितंबर में भी अल नीनो के प्रभाव में होने की संभाव्यता 40 फीसदी के आसपास रहेगी।

भूमध्य रेखा के पास समुद्र की सतह के तापमान, खासकर नीनो 3.4 क्षेत्र में पिछले सप्ताह बढ़ोत्तर के बाद अब गिरावट हुई है लेकिन यह गिरावट बहुत मामूली है। स्काइमेट के मौसम विज्ञान विभाग के प्रेसिडेंट, एवीएम, जीपी शर्मा के अनुसार मानसून 2019 के संदर्भ में अल नीनो के प्रभाव को अभी भी कम करके नहीं आका जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि तापमान के कम होने के बाद भी मनसून पर इसका साया पूरी तरह से हटा नहीं है।

मानसून को प्रभावित करने वाले कुछ दूसरे पहलू

मानसून को प्रभावित करने वाले कुछ दूसरे पहलू भी हैं, जिनकी स्थिति सकारात्मक है। यह हैं इंडियन ओषन डायपोल (आईओडी) और माडन जूलियन ओशीलेशन (एमजेओ) जो मनसून के पक्ष में हवा बना रहे हैं। यह दोनों जब सकारात्मक होते हैं तब भारत में अच्छी मानसूनी वर्षा होती है और अल नीनो का प्रभाव कम हो जाता है। एमजेओ का मॉनसून सीज़न में हिन्द महासागर पर कम से कम एक बार और अधिकतम चार बार आना होता है। इस समय एमजेओ हिन्द महासागर पर दूसरे चरण में है। दूसरा और तीसरा चरण भारत के मुख्य भू-भाग पर अच्छी बारिश के लिए अनुकूल माना जाता है। एमजेओ अगले दो सप्ताह तक अनुकूल स्थिति में रहने वाला है।

अगस्त-सितंबर में अच्छी बारिश की उम्मीद

आईओडी को भारतीय नीनो भी कहा जाता है। समुद्र की सतह के तापमान में अनियमित अस्थिरता को आईओडी कहते हैं। इसकी गतिविधि होने पर हिंद महासागर का पश्चिम क्षेत्र गर्म हो जाता है जबकि पूर्वी क्षेत्र अपेक्षाकृत ठंडा होता है। यह भारतीय उपमहाद्वीप में मनसून को मजबूत करता है। जब यह सकारात्मक होता है तब पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्र की सतह का औसत तापमान अधिक होता है, बारिश भी अधिक होती है जबकि पूर्वी हिंद महासागर में पानी का तापमान कम होता है। नकारात्मक आईडी होने पर इसकी विपरीत स्थिति देखने को मिलती है। साप्ताहिक रुझानों को अगर देखें तो आईओडी सकारात्मक स्थिति में रहा है और मानसून सीजन के बाकी समय में भी यह सकारात्मक स्थिति में रहेगा। इससे मानसून सीजन के शेष महीनों में अच्छी बारिश की उम्मीद की जा सकती है।