Home एग्रीकल्चर मौसम अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह में तेज बारिश का अनुमान, पहले सप्ताह में सामान्य से 71 फीसदी अधिक वर्षा
अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह में तेज बारिश का अनुमान, पहले सप्ताह में सामान्य से 71 फीसदी अधिक वर्षा
अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह में तेज बारिश का अनुमान, पहले सप्ताह में सामान्य से 71 फीसदी अधिक वर्षा

अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह में तेज बारिश का अनुमान, पहले सप्ताह में सामान्य से 71 फीसदी अधिक वर्षा

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य गति से आगे बढ़ रहा है। तटीय कर्नाटक और केरल के बाद पिछले दो दिनों में दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु के अधिकांश हिस्सों और रायलसीमा और दक्षिण तटीय आंध्रप्रदेश के कुछ हिस्सों में मॉनसून पहुंच गया है। जून के पहले सप्ताह में देशभर में सामान्य से 71 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है तथा आगामी 24 घंटों के दौरान अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह में कहीं मध्यम तो कहीं तेज बारिश का अनुमान है।

मौसम की जानकारी देने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट के अनुसार एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र उत्तरी पंजाब के ऊपर बना हुआ है। गुजरात के ऊपर भी एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। बंगाल की खाड़ी के मध्य-पूर्वी भागों पर बना चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र जल्द ही एक निम्न दबाव के क्षेत्र में तब्दील हो सकता है। केरल के तटों के पास अरब सागर पर भी एक चक्रवाती सिस्टम हवाओं में बना हुआ है।

अगले 24 घंटों के दौरान अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह पर मध्यम से भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत, ओडिशा के दक्षिणी तटीय हिस्सों, आंध्र प्रदेश, केरल, तटीय कर्नाटक, कोंकण व गोवा, गुजरात के दक्षिणी भागों और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा भी हो सकती है। आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों, पूर्वी मध्य प्रदेश, गंगीय पश्चिम बंगाल और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल तथा सिक्किम में हल्की बारिश से मध्यम बारिश का अनुमान है। पूर्वी राजस्थान में धूल भरी आंधी या गरज के साथ छिटपुट बारिश हो सकती है। उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी हिस्सों में मौसम लगभग शुष्क रहेगा। दिल्ली समेत मैदानी हिस्सों में तापमान बढ़ेगा।

पिछले 24 घंटों में पोर्ट ब्लेयर में 165 मिलीमीटर बारिश हुई

बीते 24 घंटों के दौरान कोंकण-गोवा और अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह पर मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई। बीते 24 घंटों के दौरान देश में सबसे अधिक बारिश अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह के पोर्ट ब्लेयर में रिकॉर्ड की गई, जहां बारिश का आंकड़ा 165 मिमी रहा। केरल, तटीय कर्नाटक, तटीय ओडिशा, पश्चिम बंगाल, दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा हुई। पूर्वोत्तर भारत, झारखंड के कुछ हिस्सों, मध्य प्रदेश के शेष भागों, विदर्भ, पूर्वी राजस्थान, हरियाणा के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई जबकि हिमाचल और उत्तराखंड में एक-दो स्थानों पर वर्षा रिकॉर्ड की गई। आंतरिक ओडिशा, छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, रायलसीमा और तमिलनाडु में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिली।

कर्नाटक, तमिलनाडु के साथ रायलसीमा और दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश में पहुंचा मॉनसून

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य गति से आगे बढ़ रहा है। तटीय कर्नाटक और केरल के बाद पिछले दो दिनों में दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु के अधिकांश हिस्सों और रायलसीमा और दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में मॉनसून ने दस्तक दे दिया। पूर्वोत्तर भारत में मॉनसून के आगमन का सामान्य समय अब बदलकर 5 जून हो गया है, जहां अगले दो-तीन दिनों में मॉनसून दस्तक दे सकता है। कहा जा सकता है कि पूर्वोत्तर भारत में मॉनसून की रफ्तार धीमी है लेकिन आपको बता दें कि 3-4 दिनों की देरी को सामान्य ही माना जाता है।

मध्य भारत और केरल में जून के पहले सप्ताह में हुई सबसे ज्यादा बारिश

इस बीच पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों के साथ-साथ कोंकण, महाराष्ट्र, तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश के बाकी हिस्सों में मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल बन रही हैं। जून के पहले सप्ताह में देश में मॉनसून वर्षा सामान्य से 71 फीसदी अधिक हुई है। इसमें सबसे अधिक योगदान मध्य भारत और केरल का है।

बंगाल की खाड़ी हो गई है सक्रिय

बंगाल की खाड़ी पर जल्द ही एक निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। वर्तमान में एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बंगाल की खाड़ी के मध्य-पूर्वी और इससे सटे बांग्लादेश तथा म्यांमार के तटीय भागों पर बना हुआ है। यही सिस्टम जल्द ही प्रभावी होकर निम्न दबाव का क्षेत्र बन सकता है। वायुमंडलीय स्थितियाँ और सामुद्रिक स्थितियाँ संकेत कर रही हैं कि अगले 24 घंटों में यह कम दबाव का क्षेत्र बन जाएगा। निम्न दबाव बनने के बाद 24 घंटों में ही यह गहरे निम्न दबाव का क्षेत्र बन जाएगा। इस सिस्टम के ओडिशा की ओर जाने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में यह पहला मॉनसून सिस्टम होगा। मॉनसून के शुरुआती समय में जब भी ऐसे मौसमी सिस्टम बनते हैं तो यह बहुत दूर तक नहीं जाते। प्रायः यह भी देखा गया है कि ऐसे सिस्टम तटों को पार करने के बाद रिकर्व करते हैं। अनुमान है कि यह सिस्टम देश के पूर्वी तटों और इसके आसपास के पूर्वी भारत के भागों पर ही रहने की संभावना है।

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 15 जून तक बिहार और झारखंड पहुंचता है

मॉनसून के आरंभ में बनने वाले निम्न दबाव के क्षेत्र केवल उन्हीं क्षेत्रों तक पहुँच पाते हैं जहाँ मॉनसून के आगे बढ़ने की संभावना है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 15 जून तक बिहार और झारखंड तक आ जाता है। यह मौसमी सिस्टम 12 जून को ओडिशा के तटों को पार करने के बाद पूर्वी भारत के ओर मुड़ सकता है और बिहार, झारखंड तथा पश्चिम बंगाल के ऊपर पहुँच जाएगा। आगे यह तराई क्षेत्रों में जा सकता है।

ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में 10 से 16 जून तक तेज बारिश

बंगाल की खाड़ी में बनने वाले इस सिस्टम के कारण दक्षिण-पश्चिम मॉनसून बड़ी छलांग लगाएगा। इसके कारण जहां इसके प्रभाव से मॉनसून का पूर्वी सिरा बंगाल की खाड़ी में आगे बढ़ते हुए मॉनसून पूर्वोत्तर को पार कर पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा में पहुँच जाएगा वहीं अरब सागर से उठने वाली सक्रिय लहर के कारण इसका पश्चिमी सिरा भी प्रगति करेगा। अरब सागर पर दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के सक्रिय होने के कारण आने वाले समय में मॉनसून कर्नाटक और रायलसीमा के भागों को पार करते हुए तेलंगाना पहुँच जाएगा। साथ ही मुंबई समेत महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र और मध्य महाराष्ट्र क्षेत्र में भी जल्द ही मॉनसून के आने की अच्छी खबर मिलेगी। आने वाले दिनों में मॉनसून के आगे बढ़ने के साथ ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में 10 से 16 जून के बीच तेज बारिश होने की संभावना है। कृषि क्षेत्र के लिए मॉनसून की तरफ से अब तक सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।