Home एग्रीकल्चर मौसम मानसून की देरी के कारण किसान खरीफ फसलों की बुवाई मध्य जून के बाद शुरू करे-स्काईमेट
मानसून की देरी के कारण किसान खरीफ फसलों की बुवाई मध्य जून के बाद शुरू करे-स्काईमेट
मानसून की देरी के कारण किसान खरीफ फसलों की बुवाई मध्य जून के बाद शुरू करे-स्काईमेट

मानसून की देरी के कारण किसान खरीफ फसलों की बुवाई मध्य जून के बाद शुरू करे-स्काईमेट

चालू खरीफ सीजन में मानसून के आगमन में देरी होने की आशंका है, इसलिए किसान जोखिम से बचने के लिए खरीफ फसलों की बुवाई मध्य जून के बाद ही शुरू करे। मौसम की जानकारी देने वाली निजी कंपनी स्काईमेट के अनुसार किसान खरीफ फसलों की बुवाई 10 से 15 दिन की देरी से शुरू करें।

स्काईमेट के अनुसार आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, उत्तर कर्नाटक के साथ ही मध्य भारत के राज्यों में मानसून के आगमन में देरी होगी। इसलिए खरीफ फसलों की बुवाई देरी से शुरू करें। किसान अगर जल्दी फसलों की बुवाई करेंगे, और बारिश में देरी हुई तो फिर किसानों की लागत बढ़ जायेगी।

सात जून को मानसून केरल पहुंचने का अनुमान

मानसून की सुस्त गति की वजह से केरल पहुंचने में देरी की आशंका है। स्काईमेट ने पहले 4 जून को केरल में मानसून पहुंचने की भविष्यवाणी की थी, लेकिन ताजा अनुमान में माना है कि मानसून का आगमन 7 जून के आसपास होगा, जिसमें 2 दिन आगे-पीछे हो सकते हैं। हालांकि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार केरल में मानसून के 6 जून तक आने की संभावना है जिसमें 4 दिन आगे-पीछे हो सकते हैं।

कई राज्यों के जलाशयों में पानी नीचले स्तर पर

स्काईमेट के प्रबंध निदेशक जतिन सिंह ने बताया कि देश में खाद्यान्न के कुल उत्पादन का करीब आधा उत्पादन खरीफ सीजन में होता है। खरीफ में खाद्यान्न उत्पादन में बारिश अहम है। अगर महाराष्ट्र की बात करें तो खरीफ में मुख्यत: सोयाबीन, अरहर, मूंग और उड़द तथा कपास का उत्पादन होता है। अरहर और मूंग की बुवाई जून के शुरू में हो जाती है, साथ ही कपास की बुवाई भी जून के आरंभ में होती है। चालू सीजन में मानसून के आने में देरी होगी, इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि खरीफ फसलों की बुवाई मध्य जून से शुरू करे। वैसे भी राज्य के जलाशयों में पानी का स्तर घटकर कुल भंडारण के 8 फीसदी पर आ गया है।

मध्य प्रदेश के किसान जून के तीसरे सप्ताह में बुवाई शुरू करें

इसी तरह से आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के किसानों को सलाह दी जाती है कि मक्का, अरहर और कपास की बुवाई जून के दूसरे सप्ताह में शुरू करें। वैसे भी इन राज्यों के जलाशयों में पानी का स्तर घटकर क्रमश: 5 फीसदी और 10 फीसदी के खतरनक स्तर पर आ गया है। मध्य प्रदेश के मध्य प्रदेश में खरीफ फसलों जैसे सोयाबीन, उड़द, अरहर और मक्का की बुवाई काफी हद तक मानसूनी बारिश पर ही निर्भर है। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि जून के तीसरे सप्ताह में खरीफ फसलों की बुवाई करें।