Home एग्रीकल्चर मौसम खराब मौसम ने सरसों किसानों की बढ़ाई चिंता, हल्की बारिश से गेहूं को होगा फायदा
खराब मौसम ने सरसों किसानों की बढ़ाई चिंता, हल्की बारिश से गेहूं को होगा फायदा
खराब मौसम ने सरसों किसानों की बढ़ाई चिंता, हल्की बारिश से गेहूं को होगा फायदा

खराब मौसम ने सरसों किसानों की बढ़ाई चिंता, हल्की बारिश से गेहूं को होगा फायदा

फसलों की पकाई के समय बेमौसम बारिश ने सरसों के साथ ही चना किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हरियाणा के झज्जर जिले के लडरावण गांव के किसान लक्ष्मण सिंह ने सरसों की फसल की कटाई तो कर दी है, लेकिन फसल अभी खेत में ही पड़ी हुई है, ऐसे में बारिश या फिर ओलावृष्टि हुई तो फसल झड़ जायेगी। उन्होंने कहा कि बारिश या फिर ओलावृष्टि हुई तो उत्पादकता तो कम होगी, साथ ही क्वालिटी पर भी असर पड़ेगा।

गुड़गांव के शिकोहपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) की हेड डॉ. अनामिका शर्मा ने आउटलुक को बताया कि सरसों की फसल पककर तैयार है, तथा कटाई का कार्य जोरो पर है, ऐसे में बारिश या फिर ओलावृष्टि हुई तो फसल को नुकसान ही होगा। उन्होंने कहा कि बारिश से गेहूं और जौ की फसल को फायदा होगा, साथ ही गर्मियों की सब्जियों की फसल लगाने की तैयारी के लिए यह बारिश लाभदायक है।

ओलावृष्टि हुई तो सभी फसलों में होगा नुकसान

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज (केटेट) डा.जेपीएस डबास ने बताया कि बारिश से गेहूं, जौ और गन्ने की फसल को फायदा होगा, लेकिन अगर ओलावृष्टि हुई या तेज बारिश और हवा चली तो सभी फसलों को नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि दलहनी फसलों में नमी ज्यादा रहेगी, जिससे कीड़े लगने की आशंका है। आम के पेड़ों पर बौर आया हुआ है, अत: नमी की मात्रा रहने से इसमें भी कीड़े लगने का डर है। उन्होंने बताया कि आलू की फसल की खुदाई में देरी होगी, साथ ही ओलावृष्टि हुई तो क्वालिटी भी प्रभावित होगी।

चार मार्च तक खराब मौसम की आशंका

पहाड़ों में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है, जिसका असर राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली सहित उत्‍तर भारत के कई इलाकों पर पड़ रहा है। दिल्‍ली-एनसीआर में शनिवार सुबह जहां कई इलाकों में हल्‍की बूंदाबादी हुई, वहीं कश्‍मीर में एक बार फिर से बर्फबारी हुई। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार हरियाणा और उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब, राजस्थान के कई क्षेत्रों में 2 से 4 मार्च तक बारिश के अलावा तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि की भी आशंका है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में हल्की बारिश देखी जा सकती है। विशेषज्ञों ने मौसम में आए बदलाव की वजह पश्चिमी विक्षोभ को बताया है।

बारिश से गेहूं और जौ की फसल को फायदा

राष्ट्रीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. जी पी सिंह ने बताया कि बारिश से गेहूं और जौ की फसल को फायदा ही होगा। अभी तक गेहूं की फसल को कहीं कोई नुकसान की खबर नहीं है, तथा उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश की वजह से सर्दी का मौसम लंबा होने से गेहूं की पछेती फसल को भी लाभ होगा। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्रालय ने दूसरे अग्रिम अनुमान में गेहूं का उत्पादन अनुमान 991 लाख टन का जारी किया है। मौसम आगे भी फसल के अनुकूल रहा तो, उत्पादन तय अनुमान से ज्यादा ही होने का अनुमान है। पिछले साल गेहूं का 971 लाख टन का उत्पादन हुआ था।

खाद्यान्न का रिकार्ड उत्पादन अनुमान

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2018-19 में देश में खाद्यान्न का रिकार्ड 28.13 करोड़ टन का उत्पादन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 2017-18 में 27.74 करोड़ टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था।