Home एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मृदा स्वास्थ्य कार्ड से खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा, राष्ट्रीय तिलहन मिशन जल्द होगा शुरू : तोमर
मृदा स्वास्थ्य कार्ड से खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा, राष्ट्रीय तिलहन मिशन जल्द होगा शुरू : तोमर
मृदा स्वास्थ्य कार्ड से खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा, राष्ट्रीय तिलहन मिशन जल्द होगा शुरू : तोमर

मृदा स्वास्थ्य कार्ड से खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा, राष्ट्रीय तिलहन मिशन जल्द होगा शुरू : तोमर

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के पांच साल पूरे होने पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र तोमर ने बुधवार को बताया कि इससे किसानों को काफी फायदा मिल रहा है, क्योंकि इससे खेती लागत घट रही है और किसानों की आय में इजाफा हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है, साथ ही खाद्य तेलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार राष्ट्रीय तिलहन मिशन जल्द करेगी।

मिट्टी परीक्षण दिवस के मौके पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद परिसर स्थित सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के दूसरे चरण (2017-19) के दौरान 11 करोड़ से ज्यादा मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांटे गए और किसानों को इसका फायदा मिला है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किसानों के लिए विगत कुछ वर्षो के दौरान शुरू की गई योजनाओं का ही यह परिणाम है कि खाद्यान्नों के उत्पादन में भारत लगातार नया रिकॉर्ड बना रहा है और दूसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान के अनुसार, इस साल खाद्यान्नों का उत्पादन 29.19 करोड़ टन होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि खाद्यान्नों के मामले भारत आज आत्मनिर्भर है।

तोमर ने कहा कि कुछ साल पहले देश में दालों का अभाव हुआ करता था, लेकिन प्रधानमंत्री के आह्वान पर किसानों ने दालों की खेती में दिलचस्पी दिखाई, जिससे दालों के मामले में आत्मनिर्भरता आई, लेकिन तिलहनों को लेकर अभी आत्मनिर्भर होना बाकी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार जल्द ही राष्ट्रीय तिलहन मिशन लाने जा रही है। उन्होंने किसानों को मिट्टी का परीक्षण करवाने और वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार, उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड के हिसाब से खेती कर रहे किसानों की आय बढ़ी

मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रभावों को लेकर हाल ही में आई नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (एनपीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, मृदा स्वास्थ्य कार्ड का इस्तेमाल करने से अरहर की फसल से किसानों की आय में प्रति एकड़ 25,000-30,000 रुपये का इजाफा हुआ है। इसी प्रकार, धान की खेती से किसानों की आय में प्रति एकड़ 4,500 रुपये, सूरजमुखी की खेती से 25,000 रुपये प्रति एकड़, मूंगफली की खेती से 10,000 रुपये प्रति एकड़, कपास की खेती से 12,000 रुपये प्रति एकड़ और आलू की खेती से प्रति एकड़ 3,000 रुपये की आमदनी बढ़ी है।

सरकार का दावा मृदा स्वास्थ्य कार्ड से फसलों की लागत में आई कमी

रिपोर्ट बताती है कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड का उपयोग किए जाने से धान की उत्पादन लागत में 16-25 फीसदी तक की कमी आई है, जबकि दलहनी फसलों की उत्पादन लागत 10-15 फीसदी घट गई है, क्योंकि यूरिया का इस्तेमाल धान में जहां प्रति एकड़ 20 किलो कम हो गया है, वहीं दलहनी फसलों में खाद का उपयोग 10 किलो प्रति एकड़ घट गया है। पैदावार की बात करें तो मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार, खेती करने से धान की पैदावार में 20 फीसदी, गेहूं और ज्वार की पैदावार 10-15 फीसदी बढ़ी है, जबकि दलहनों की पैदावार में 30 फीसदी और तिलहनों में 40 फीसदी का इजाफा हुआ है।