Home एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया, 51 करोड़ पशुओं को लगेंगे टीके
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया, 51 करोड़ पशुओं को लगेंगे टीके
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया, 51 करोड़ पशुओं को लगेंगे टीके

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया, 51 करोड़ पशुओं को लगेंगे टीके

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने में पशुपालन और दूसरे व्यवसायों का बहुत बड़ा रोल है। पशुपालन हो, मछली पालन हो या मधुमक्खी पालन, इन पर किया गया निवेश, ज्यादा कमाई कराता है। इसलिए बीते पांच वर्षों में कृषि से जुड़े दूसरे विकल्पों पर हम एक नई अप्रोच के साथ आगे बढ़े हैं।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम और कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए कहा कि पशुधन की गुणवत्ता और स्वास्थ्य से लेकर डेयरी प्रोडक्ट्स की वैरायटी को विस्तार देने के लिए जो भी जरूरी कदम थे वो उठाए गए हैं। इसके साथ ही 1,059 करोड़ रुपये की राज्य की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास भी किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें समाधान खोजने हैं कि हरे चारे की उचित व्यवस्था कैसे सुनिश्चित हो, उन्हें भी पोषक आहार कैसे मिले?

इस पर 12,652 करोड़ रुपये की लागत आएगी

उन्होंने कहा कि पर्यावण और पशुधन हमेशा से ही भारत के आर्थिक चिंतन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत 51 करोड़ पशुओं को टीके लगाए जाएंगे। इसे 2024 तक जारी रखा जाएगा और इस पर 12,652 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य 2025 तक खुरपका-मुंहपका और ब्रूसीलोसिस बीमारी पर नियंत्रण पा लेना और 2030 तक इसका पूरी तरह उन्‍मूलन कर देना है। इन दोनों बीमारियों से दुग्‍ध व्‍यापार और अन्‍य पशुधन उत्‍पाद सीधे तौर पर नकारात्‍मक रूप से प्रभावित होते हैं। इस कार्यक्रम की शुरूआत से किसानों की आय दुगुनी करने के सरकार के प्रयासों को बहुत बल मिलेगा।

51 करोड़ गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअरों को साल में 2 बार लगेंगे टीके

इस टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत 51 करोड़ गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअरों को साल में 2 बार टीके लगाए जायेंगे। जिन पशुओं का टीकाकरण पूर्ण हो जायेगा, उन्हें पशु आधार देकर उनके कानों में टैग लगाया जायेगा। नई एप्रोच का परिणाम है कि 5 साल के दौरान दूध उत्पादन में करीब 7 फीसदी की वृद्धि हुई है। किसानों, पशुपालकों की आय में करीब 13 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। दुधारु पशुओं की गुणवत्ता के लिए पहले राष्ट्रीय गोकुल मिशन शुरु किया गया और इस वर्ष देश में पशुओं की उचित देखरेख के लिए कामधेनु आयोग बनाने का निर्णय हुआ।