Home एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी उत्तर प्रदेश के किसान औषधीय फसलों की खेती कर कमा रहे हैं ज्यादा मुनाफा
उत्तर प्रदेश के किसान औषधीय फसलों की खेती कर कमा रहे हैं ज्यादा मुनाफा
उत्तर प्रदेश के किसान औषधीय फसलों की खेती कर कमा रहे हैं ज्यादा मुनाफा

उत्तर प्रदेश के किसान औषधीय फसलों की खेती कर कमा रहे हैं ज्यादा मुनाफा

परंपरागत खेती के बजाए औषधीय फसलों की खेती कर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मंडल के किसान ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। औषधीय फसलों की खेती करने वाले किसानों को राज्य सरकार करीब 30 फीसदी की सब्सिडी दे रही है।

राज्य के बागवानी विभाग के अधिकारी हरजीत सिंह के अनुसार जिले के किसान तुलसी, शतावरी और एलोवेरा जैसी औषधीय फसलों की खेती कर ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने बताया कि एलोवेरा की खेती करने पर किसानों की लागत करीब 56,000 प्रति हेक्टेयर आती है, जिसके लिए राज्य सरकार किसानों को 16,000 रुपये की सब्सिडी देती है। सब्सिडी सीधे किसान के खाते में डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना के माध्यम से दी जाती है।

उन्होंने बताया कि तय लक्ष्य के अनुसार मुरादाबाद मंडल में शतावरी की खेती 35 हेक्टेयर में, तुलसी की खेती 55 हेक्टेयर में और एलोवेरा की खेती 20 हेक्टेयर में की जा रही है। उन्होंने बताया कि कई किसानों ने बिना राज्य सरकार की सहायता लिए औषधीय फसलों की खेती शुरू कर दी है, क्योंकि परंपरागत खेती के बजाए इससे किसानों को ज्यादा मुनाफा हो रहा हैं।

परंपरागत फसलों के मुकाबले ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं औषधीय फसलों की खेती से किसान

औषधीय फसलों की खेती करने वाले किसान राधे लाल ने बताया कि मैंने 19 बीघा में शतावरी और 12 बीघा में तुलसी तथा 16 बीघा में कलमेघ (हरा चिरायता) की फसल लगाई हुई है। ये फसलें पारंपरिक हर्बल दवा बनाने के काम में आती हैं। इनकी बड़े शहरों दिल्ली या फिर अलीगढ़ में अच्छी मांग रहती है। इन फसलों की खेती से अन्य फसलों जैसे गेहूं या धान के मुकाबले ज्यादा आमदनी होती है। एक अन्य किसान राजीव सिंह ने कहा कि ज्यादा आय होने के कारण उन्होंने परंपरागत फसलों के बजाए औषधीय फसलों की खेती करनी शुरू कर दी है।

मुरादाबाद में करीब 120 हेक्टेयर में हो रही है औषधीय फसलों की खेती

मुरादाबाद मंडल में करीब 120 हेक्टेयर में औषधीय फसलों की खेती हो रही है। औषधीय फसलों की खेती का कई तरह से उपयोग होता है, जैसे तुलसी की खेती करने से किसान जहां तुलसी के बीज, इसका तेल या फिर इसकी टहनियों को भी बेच सकते हैं। इसी तरह से एलोवेरा की मांग भी पूरे देश में लगातार बढ़ रही है, तथा इसकी खेती करने वाले किसानों को अन्य फसलों की तुलना में ज्यादा आमदनी होती है।

एजेंसी इनपुट