Home एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी सहकारिता अमीरों और गरीबों के बीच खाई पाटे : राधामोहन सिंह
सहकारिता अमीरों और गरीबों के बीच खाई पाटे : राधामोहन सिंह
सहकारिता अमीरों और गरीबों के बीच खाई पाटे : राधामोहन सिंह

सहकारिता अमीरों और गरीबों के बीच खाई पाटे : राधामोहन सिंह

केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने सहकारी समितियों से अमीरों और गरीबों के बीच खाई को पाटने के लिए आगे आने की अपील की।

राष्ट्रीय कृषि सहकारिता संघ की ओर से 65वें अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह का उद्घाटन करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि पूंजीवादी और साम्यवाद अमीरों और गरीबों के बीच की खाई को नहीं पाट सका लेकिन सहकारिता प्रजातांत्रिक मूल्य पर आधारित संस्था है जो जनहित में काम करती है।

केन्द्र सरकार ने 100 करोड़ रुपये के कोष के साथ सहकारी उद्यम सहयोग एवं नवाचार योजना शुरु की है जिसे बाद में बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये किया जायेगा। उन्होंने सहकारिता आंदोलन की बुनियाद और मजबूत बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को महिला, विकलांग या कमजोर वर्ग के सहकारी उद्यमों को तीन करोड़ तक की ऋण सहायता देने का अधिकार दिया है। इससे पहले यह ऋण देने की सीमा एक करोड़ रुपये थी।

उन्होंने कहा कि निजी उद्यमी का ध्यान केवल लाभ अर्जित करने पर होता है, जबकि सहकारिता का लाभ सदस्यों के बीच बांटा जाता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सहकारी संस्थाओं में सुधार एवं नवाचार के तहत उन्हें कंप्यूटरीकृत करने के लिए राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश में लगभग आठ लाख सहकारी संस्थान हैं और इसकी ताकत इतनी है कि सही तरीके से काम होने पर यह देश की तस्वीर बदल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार किया है तथा सरकार प्राथमिक सहकारी समितियों को कोर बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने बुधवार को एक योजना लॉन्च की जिसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र स्टार्टअप के लिए सस्ता ऋण प्रदान करना है।

इस मौके पर एनसीयूआई के अध्यक्ष चन्द्रपाल सिंह यादव ने कहा कि देश में सहकारिता आंदोलन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबका साथ-सबका विकास के नारे के अनुरूप है और यह किसानों की आय दोगुना करने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन का मूलभूत सिद्धांत शिक्षण और प्रशिक्षण साथ-साथ चलाना है। लेकिन हाल के दिनों में सरकार की ओर से इसे अलग-अलग करने की कोशिश की गई जो सहकारिता आंदोलन को नुकसान पहुंचायेगा। सरकार को इस दिशा में सोचना होगा।