Home एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी पंजाब में पानी बचाने और फसल विविधीकरण के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक जल्द
पंजाब में पानी बचाने और फसल विविधीकरण के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक जल्द
पंजाब में पानी बचाने और फसल विविधीकरण के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक जल्द

पंजाब में पानी बचाने और फसल विविधीकरण के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक जल्द

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि राज्य में धान की रोपाई 20 जून के बजाय एक जून किये जाने को खारिज कर करते हुए कहा कि धान की रोपाई की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया जायेगा।

प्रश्नकाल के दौरान भूजल संकट को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल प्रयोग के तौर पर धान की रोपाई 13 जून से शुरू की गई, लेकिन राज्य में धान की रोपाई की तारिख में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जल्द ही राज्य में भूजल के लापरवाह उपयोग को रोकने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करने और जल संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए फसल के पैटर्न को बदलने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाएंगे। उन्होंने सभी दलों से राजनीतिक संबद्धता से ऊपर उठने और पंजाब की गंभीर जल स्थिति के सामने एकजुट होने की अपील की।

राज्य में जल स्तर गिरने की औसत दर लगभग 50 सेमी प्रति वर्ष

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य पानी की भारी कमी का सामना कर रहा है और डायनामिक ग्राउंड वॉटर एस्टीमेशन रिपोर्ट 2017 जोकि वर्ष 2019 में प्रकाशित हुई है, का हवाला देते हुए कहा कि राज्य के 139 ब्लॉकों में पानी का अध्ययन किया गया है, उनमें से 109 में भूजलस्तर की हालत खराब है। उन्होंने कहा कि राज्य का भूजल स्तर लगभग 85 फीसदी घट रहा है और जल स्तर गिरने की औसत दर लगभग 50 सेमी प्रति वर्ष है।

राज्य के 83 फीसदी क्षेत्रफल में कम समय में पकने वाली प्रजातियों की रोपाई

एक अन्य सवाल का जबाव देते हुए मंख्यमंत्री ने कहा कि पहले राज्य में लंबी अविध में तैयार होने वाली धान की किस्मों की रोपाई की जाती थी। लेकिन पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) द्वारा धान की कम अवधि में तैयार होने वाली नई किस्में तैयार की गई है, जिनकी फसल कम समय में तैयार होती है, तथा पकने में कम दिन लगने के कारण सिंचाई के लिए पानी भी कम लगता है। उन्होंने कहा कि धान की नई किस्में जैसे पीआर 126, पीआर 124, पीआर 127, पीआर 121 और पीआर 122 की अब 83 फीसदी क्षेत्र में रोपाई की जा रही है, जोकि औसतन 110 दिनों में तैयार हो जाती हैं।


एजेंसी इनपुट