Home एग्रीकल्चर रुरल इकोनॉमी लहसुन की खरीद अब 30 जून तक, उचित भाव नहीं मिलने से किसानों हो रहा है घाटा
लहसुन की खरीद अब 30 जून तक, उचित भाव नहीं मिलने से किसानों हो रहा है घाटा
लहसुन की खरीद अब 30 जून तक, उचित भाव नहीं मिलने से किसानों हो रहा है घाटा

लहसुन की खरीद अब 30 जून तक, उचित भाव नहीं मिलने से किसानों हो रहा है घाटा

चालू सीजन में लहसुन की कीमतों में आई भारी गिरावट के कारण किसानों को मुनाफा तो दूर लागत भी वसूल नहीं हो पा रही है जिससे लहसुन किसानों की नाराजगी राज्य सरकारों के खिलाफ बढ़ रही है। राज्यस्थान में राज्य सरकार ने लहसुन की खरीद की तारिख को 20 जून से बढ़ाकर 30 जून कर दिया है।

राज्य की मुख्यमंत्री ने टविट कर जानकारी दी है कि राज्य से लहसुन खरीद के लिए किसानों को दस दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य के कोटा, बारां, बूंदी, प्रतापगढ़, झालावाड़, चित्तौडगढ़ तथा जोधपुर जिलों में 28 केंद्रों पर बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत किसानों से लहसुन खरीदा जा रहा है।

उत्पादन मंडियों में भाव नीचे

एगमार्क नेट के अनुसार 21 जून को राजस्थान की जोधपुर मंडी में लहसुन के भाव 700 से 2,000 रुपये, कोटा में 1,100 से 2,300 रुपये तथा चित्तौडगढ़ में 1,500 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल रहे। राज्य सरकार लहसुन की खरीद 3,257 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर रही है लेकिन खरीद नियम कड़े होने के कारण खरीद का लाभ कुछ ही किसानों को मिल रहा है।

उत्पादन के मुकाबले खरीद नाममात्र की

सूत्रों के अनुसार बाजार हस्तक्षेत्र योजना के तहत राज्य से अभी तक केवल 59,722 टन लहसुन की खरीद ही की गई है जबकि चालू फसल सीजन 2017-18 में राज्य में लहसुन का उत्पादन 7 लाख टन से ज्यादा होने का अनुमान है। इसलिए आंकड़ों से ही पता चलता है कि कितने किसानों को सरकारी खरीद का लाभ मिला होगा।

उत्पादन अनुमान ज्यादा

कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2017-18 में लहसुन का उत्पादन बढ़कर 17.16 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 16.93 लाख टन का हुआ था।

निर्यात में हुई बढ़ोतरी

राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 के पहले 11 महीनों अप्रैल से फरवरी के दौरान लहसुन का निर्यात बढ़कर 26,527 टन का हुआ है जबकि वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान इसका निर्यात केवल 18,910 टन का ही हुआ था।