Home एग्रीकल्चर रुरल इकोनॉमी कृषि के सामने अस्तित्व का संकट : शेखावत
कृषि के सामने अस्तित्व का संकट : शेखावत
कृषि के सामने अस्तित्व का संकट : शेखावत

कृषि के सामने अस्तित्व का संकट : शेखावत

जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि देश में प्राकृतिक जल का प्रभावी संचयन न होने के कारण आज कृषि के सामने अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है।

बुदेलखंड क्षेत्र में पानी की समस्या और केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना के बारे में एक निजी संकल्प पर लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए शेखावत ने कहा कि देश को प्रकृति से हर साल चार हजार अरब घन मीटर पानी मिलता है जिसमें दो हजार अरब घन मीटर का संचयन संभव है लेकिन हम सिर्फ 300 अरब घन मीटर का संचयन कर पाते हैं।

बारिश के पानी का सही उपयोग नहीं होने से सबसे ज्यादा किसान प्रभावित

पिछले 70 साल में प्रकृति से मिलने वाले पानी की मात्रा लगभग वही है जबकि आबादी बढ़ने से प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता पांच हजार घन मीटर से घटकर 1,540 घन मीटर रह गई है। उन्होंने कहा कि कहीं बहुत ज्यादा तो कहीं बेहद कम बारिश से इस पानी का उस प्रकार उपयोग नहीं हो पाता जैसा होना चाहिए। इससे किसान सर्वाधिक प्रभावित हो रहा है। फसल प्रभावित होने से गोधन और पशुधन के चारे का संकट पैदा होता है।

पशुओं को खुले में छोड़ दिया जाता है जिससे फसलों की बर्बादी होती है

वह खाने के लिए पशुओं को खुले में छोड़ दिया जाता है जिससे फसलों की और बर्बादी होती है। इस चक्रव्यूह के कारण गांवों और कृषि के सामने अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है। लोग गांवों से पलायन कर शहरों की तरफ भाग रहे हैं जिससे शहरों पर भी दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना को लेकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों के बीच लगभग अंतिम सहमति बन गई है। मानसून के दिनों में तथा अन्य दिनों में जल के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों में कुछ असहमति है जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी तैयार हो चुकी है।

एजेंसी इनपुट